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Delhi NCR News: 2047 में दिल्ली को तीन गुना से ज्यादा बिजली की होगी जरूरत
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मास्टर प्लान में 25,500 मेगावाट की अधिकतम मांग का अनुमान, 49 नए उपकेंद्रों से लेकर भूमिगत केबल और सौर ऊर्जा तक का खाका
विनोद डबास
नई दिल्ली। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 के अनुसार वर्ष 2047 तक दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग 25,500 मेगावाट तक पहुंच सकती है। वर्ष 2021 में दिल्ली की पारंपरिक बिजली आपूर्ति क्षमता करीब 7,161 मेगावाट थी। ऐसे में अगले ढाई दशक में बिजली व्यवस्था की क्षमता को कई गुना बढ़ाने की जरूरत होगी।
अनुमानित मांग को देखते हुए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड ने दीर्घकालीन बिजली नेटवर्क योजना तैयार की है। इसमें नए बिजली उपकेंद्रों के निर्माण, पारेषण लाइनों के विस्तार, बिजली तारों को भूमिगत करने और अक्षय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाने की योजना है। योजना के मुताबिक विकसित इलाकों में बिजली की मांग सालाना करीब चार प्रतिशत, नई दिल्ली क्षेत्र में दो प्रतिशत और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
49 नए बड़े उपकेंद्र प्रस्तावित
दिल्ली में फिलहाल 765 किलोवोल्ट के दो, 400 किलोवोल्ट के आठ और 220 किलोवोल्ट के 43 बड़े उपकेंद्र हैं। 53 मौजूदा उपकेंद्रों के अलावा वर्ष 2047 तक 49 नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव है। इनमें 765 किलोवोल्ट के दो, 400 किलोवोल्ट के 10 और 220 किलोवोल्ट के 37 उपकेंद्र शामिल हैं। इनके लिए जमीन पहले से सुरक्षित करने पर भी जोर दिया गया है।
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नए विकसित इलाकों को बिजली नेटवर्क से जोड़ने की विशेष योजना
नरेला, बवाना, पल्ला, रोहिणी, कंझावला, द्वारका, नजफगढ़, मित्रांऊ और दक्षिण दिल्ली के नए विकसित इलाकों को बिजली नेटवर्क से जोड़ने की विशेष योजना है। पल्ला में बड़ा उपकेंद्र प्रस्तावित है। इसकी क्षमता 765 किलोवोल्ट स्तर पर 6,000 एमवीए और 400 किलोवोल्ट स्तर पर 2,500 एमवीए होगी। इसके लिए करीब 1.60 लाख वर्गमीटर जमीन की जरूरत होगी। दक्षिण दिल्ली के मांडी गांव में भी 765 किलोवोल्ट का उपकेंद्र प्रस्तावित है।
लैंड पूलिंग वाले क्षेत्रों पर भी फोकस
लैंड पूलिंग के तहत विकसित होने वाले इलाकों की भविष्य की बिजली जरूरत को भी योजना में शामिल किया गया है। मित्रांऊ और जट खोड़ में 2,500 एमवीए क्षमता वाले 400/220 किलोवोल्ट उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। वहीं नरेला-बवाना क्षेत्र के होलंबी कलां, बुढ़पुर और बांकनेर में 800 एमवीए क्षमता वाले 220/66 किलोवोल्ट उपकेंद्र बनाए जाने की योजना है।
भूमिगत होंगी बिजली लाइनें
बिजली के तारों के जाल को कम करने के लिए घनी आबादी और नए विकसित क्षेत्रों में पारेषण लाइनों को भूमिगत करने पर जोर दिया गया है। 765 किलोवोल्ट लाइन के लिए 67 मीटर, 400 किलोवोल्ट के लिए 46 मीटर और 220 किलोवोल्ट लाइन के लिए 32 मीटर चौड़ा मार्ग सुरक्षित रखने का प्रावधान है। भूमिगत 220 किलोवोल्ट केबल के लिए सड़क के साथ 2गुणा2 मीटर जगह रखी जाएगी।
सौर ऊर्जा का बढ़ेगा हिस्सा
बढ़ती बिजली मांग पूरी करने में अक्षय ऊर्जा की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। वर्ष 2021 में दिल्ली के पास 923 मेगावाट अक्षय ऊर्जा खरीद या बिजली समझौते परिचालन में थे। 500 वर्गमीटर से अधिक छत वाले सरकारी और संस्थागत भवनों पर सौर संयंत्र लगाने के साथ मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, डिपो और स्टेडियमों में भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा। स्मार्ट मीटर और समय के अनुसार बिजली दर तय करने की व्यवस्था से बिजली खपत को नियंत्रित करने पर भी जोर रहेगा।
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विनोद डबास
नई दिल्ली। मास्टर प्लान दिल्ली-2047 के अनुसार वर्ष 2047 तक दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग 25,500 मेगावाट तक पहुंच सकती है। वर्ष 2021 में दिल्ली की पारंपरिक बिजली आपूर्ति क्षमता करीब 7,161 मेगावाट थी। ऐसे में अगले ढाई दशक में बिजली व्यवस्था की क्षमता को कई गुना बढ़ाने की जरूरत होगी।
अनुमानित मांग को देखते हुए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड ने दीर्घकालीन बिजली नेटवर्क योजना तैयार की है। इसमें नए बिजली उपकेंद्रों के निर्माण, पारेषण लाइनों के विस्तार, बिजली तारों को भूमिगत करने और अक्षय ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाने की योजना है। योजना के मुताबिक विकसित इलाकों में बिजली की मांग सालाना करीब चार प्रतिशत, नई दिल्ली क्षेत्र में दो प्रतिशत और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में सात प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है।
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49 नए बड़े उपकेंद्र प्रस्तावित
दिल्ली में फिलहाल 765 किलोवोल्ट के दो, 400 किलोवोल्ट के आठ और 220 किलोवोल्ट के 43 बड़े उपकेंद्र हैं। 53 मौजूदा उपकेंद्रों के अलावा वर्ष 2047 तक 49 नए उपकेंद्र बनाने का प्रस्ताव है। इनमें 765 किलोवोल्ट के दो, 400 किलोवोल्ट के 10 और 220 किलोवोल्ट के 37 उपकेंद्र शामिल हैं। इनके लिए जमीन पहले से सुरक्षित करने पर भी जोर दिया गया है।
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नए विकसित इलाकों को बिजली नेटवर्क से जोड़ने की विशेष योजना
नरेला, बवाना, पल्ला, रोहिणी, कंझावला, द्वारका, नजफगढ़, मित्रांऊ और दक्षिण दिल्ली के नए विकसित इलाकों को बिजली नेटवर्क से जोड़ने की विशेष योजना है। पल्ला में बड़ा उपकेंद्र प्रस्तावित है। इसकी क्षमता 765 किलोवोल्ट स्तर पर 6,000 एमवीए और 400 किलोवोल्ट स्तर पर 2,500 एमवीए होगी। इसके लिए करीब 1.60 लाख वर्गमीटर जमीन की जरूरत होगी। दक्षिण दिल्ली के मांडी गांव में भी 765 किलोवोल्ट का उपकेंद्र प्रस्तावित है।
लैंड पूलिंग वाले क्षेत्रों पर भी फोकस
लैंड पूलिंग के तहत विकसित होने वाले इलाकों की भविष्य की बिजली जरूरत को भी योजना में शामिल किया गया है। मित्रांऊ और जट खोड़ में 2,500 एमवीए क्षमता वाले 400/220 किलोवोल्ट उपकेंद्र प्रस्तावित हैं। वहीं नरेला-बवाना क्षेत्र के होलंबी कलां, बुढ़पुर और बांकनेर में 800 एमवीए क्षमता वाले 220/66 किलोवोल्ट उपकेंद्र बनाए जाने की योजना है।
भूमिगत होंगी बिजली लाइनें
बिजली के तारों के जाल को कम करने के लिए घनी आबादी और नए विकसित क्षेत्रों में पारेषण लाइनों को भूमिगत करने पर जोर दिया गया है। 765 किलोवोल्ट लाइन के लिए 67 मीटर, 400 किलोवोल्ट के लिए 46 मीटर और 220 किलोवोल्ट लाइन के लिए 32 मीटर चौड़ा मार्ग सुरक्षित रखने का प्रावधान है। भूमिगत 220 किलोवोल्ट केबल के लिए सड़क के साथ 2गुणा2 मीटर जगह रखी जाएगी।
सौर ऊर्जा का बढ़ेगा हिस्सा
बढ़ती बिजली मांग पूरी करने में अक्षय ऊर्जा की भूमिका भी बढ़ाई जाएगी। वर्ष 2021 में दिल्ली के पास 923 मेगावाट अक्षय ऊर्जा खरीद या बिजली समझौते परिचालन में थे। 500 वर्गमीटर से अधिक छत वाले सरकारी और संस्थागत भवनों पर सौर संयंत्र लगाने के साथ मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, डिपो और स्टेडियमों में भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा। स्मार्ट मीटर और समय के अनुसार बिजली दर तय करने की व्यवस्था से बिजली खपत को नियंत्रित करने पर भी जोर रहेगा।