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लाल किला ब्लास्ट: जसीर बिलाल वानी की जमानत याचिका खारिज
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हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील भी खारिज की, एनआईए ने वानी को सह-षड्यंत्रकारी बताया है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 के लाल किला आतंकी हमले के मामले में आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश की डिफॉल्ट जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर उसकी अपील भी खारिज कर दी।
डिफॉल्ट जमानत उस स्थिति में मिलती है, जब जांच एजेंसी निर्धारित कानूनी अवधि में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं करती। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग निवासी 20 वर्षीय वानी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 10 नवंबर 2025 को लाल किला क्षेत्र में हुए कार बम विस्फोट का सक्रिय सह-षड्यंत्रकारी बताया है।
एनआईए के अनुसार, वानी ने डॉ. उमर-उन-नबी के साथ मिलकर आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता दी। एजेंसी का आरोप है कि उसने ड्रोन में बदलाव करने और रॉकेट विकसित करने का प्रयास भी किया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 के लाल किला आतंकी हमले के मामले में आरोपी जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश की डिफॉल्ट जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर उसकी अपील भी खारिज कर दी।
डिफॉल्ट जमानत उस स्थिति में मिलती है, जब जांच एजेंसी निर्धारित कानूनी अवधि में जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल नहीं करती। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग निवासी 20 वर्षीय वानी को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने 10 नवंबर 2025 को लाल किला क्षेत्र में हुए कार बम विस्फोट का सक्रिय सह-षड्यंत्रकारी बताया है।
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एनआईए के अनुसार, वानी ने डॉ. उमर-उन-नबी के साथ मिलकर आतंकी मॉड्यूल को तकनीकी सहायता दी। एजेंसी का आरोप है कि उसने ड्रोन में बदलाव करने और रॉकेट विकसित करने का प्रयास भी किया था।
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