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दिल्ली में यमुना फिर हुई मैली: सीवेज सीधे नदी में, जनवरी-फरवरी से भी बदतर हालत; DPCC की रिपोर्ट में कई खुलासे

संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Sat, 11 Apr 2026 06:13 PM IST
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सार

डीपीसीसी की मार्च 2026 रिपोर्ट के अनुसार, यमुना नदी का प्रदूषण जनवरी और फरवरी की तुलना में और बढ़ गया है। बड़े पैमाने पर बिना साफ किया गया सीवेज नदी में मिल रहा है। फीकल कोलीफॉर्म और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) जैसे महत्वपूर्ण मानकों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।

DPCC report pollution in Yamuna River worsened further compared to march month in delhi
मार्च में यमुना का प्रदूषण बढ़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली से गुजरने वाली यमुना नदी की हालत एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली हो गई है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च महीने में नदी का प्रदूषण जनवरी और फरवरी की तुलना में और बढ़ गया है। खास तौर पर फीकल कोलीफॉर्म और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) जैसे अहम मानकों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

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यमुना में सीधे मिल रहा सीवेज का पानी
रिपोर्ट से साफ संकेत मिलता है कि बड़ी मात्रा में बिना साफ किया गया सीवेज (गंदा पानी) यमुना में मिल रहा है। फीकल कोलीफॉर्म का स्तर बढ़ना इस बात का संकेत होता है कि पानी में मानव या पशुओं के मल से जुड़ा प्रदूषण ज्यादा है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।
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आठ जगहों से लिए गए सैंपल
डीपीसीसी हर महीने यमुना के पानी की जांच करता है। इसके लिए नदी के किनारे आठ अलग-अलग जगहों से सैंपल लिए जाते हैं। इनमें पल्ला, वजीराबाद, आईएसबीटी ब्रिज, आईटीओ ब्रिज, निजामुद्दीन ब्रिज, हिंडन कट, ओखला बैराज और हरियाणा के असगरपुर जैसे इलाके शामिल हैं। 

मार्च की रिपोर्ट में तेजी से बढ़ा प्रदूषण
इन सैंपल्स में पानी की गुणवत्ता को मापने के लिए कई पैमानों जैसे बीओडी, घुली हुई ऑक्सीजन, केमिकल ऑक्सीजन डिमांड, पीएच और फीकल कोलीफॉर्म की जांच की जाती है। मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के असगरपुर इलाके में फीकल कोलीफॉर्म का स्तर 4 लाख (400,000 प्रति 100 मिलीलीटर सर्वाधिक संभावित संख्या) तक पहुंच गया, जो तय मानक 2,500 से कई गुना ज्यादा है। तुलना करें तो जनवरी में यह स्तर 3.5 लाख और फरवरी में 92,000 था। यानी मार्च में इसमें फिर से तेज उछाल देखा गया है।

आईएसबीटी ब्रिज पर मिला सुधार
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के अन्य हिस्सों में भी हालात बहुत अच्छे नहीं हैं। केवल आईएसबीटी ब्रिज पर थोड़ा सुधार देखने को मिला, जहां कोलीफॉर्म का स्तर जनवरी की तुलना में कम हुआ है। लेकिन, बाकी ज्यादातर जगहों पर फरवरी के बाद मार्च में प्रदूषण फिर बढ़ गया है। साथ ही, पल्ला इलाके में जरूर कुछ राहत दिखी, जहां फीकल कोलीफॉर्म का स्तर पहले के महीनों की तुलना काफी कम होकर 3,200 100 मिलीलीटर सर्वाधिक संभावित संख्या रहा। हालांकि, यह भी तय मानकों से ज्यादा ही है।

बीओडी का स्तर रहा चिंताजनक
रिपोर्ट में बीओडी के स्तर को भी बेहद चिंताजनक बताया गया है। बीओडी का मतलब होता है पानी में मौजूद गंदगी को खत्म करने के लिए सूक्ष्मजीवों को जितनी ऑक्सीजन चाहिए। अगर बीओडी ज्यादा होता है, तो पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुंचता है। मार्च में बीओडी का स्तर 2 से 60 मिलीग्राम प्रति लीटरके बीच दर्ज किया गया, जबकि सुरक्षित सीमा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है। सबसे ज्यादा बीओडी असगरपुर में 60 दर्ज किया गया, जो फरवरी के 34 मिलीग्राम प्रति लीटर से भी काफी ज्यादा है।

एसटीपी और सीईटीपी संबंधित डेटा अभी उपलब्ध नहीं
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली की नालियों से जुड़ा डेटा तो जारी कर दिया गया है, लेकिन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से संबंधित डेटा अभी उपलब्ध नहीं कराया गया है। इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यमुना की सफाई के प्रयास तभी सफल हो सकते हैं, जब प्रदूषण के आंकड़े नियमित और समय पर जारी किए जाएं। खासकर मॉनसून के बाद के महीनों में, जब नदी में पानी का बहाव कम हो जाता है, प्रदूषण तेजी से बढ़ता है।

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