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Delhi NCR News: टीबी के नए टीके सुरक्षित, लेकिन हर संक्रमण से नहीं बचा सकते
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-फेज तीन ट्रायल इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च समेत कई संस्थानों ने किया
नई दिल्ली। टीबी के दो नए टीके सुरक्षित हैं, लेकिन ये बीमारी के सभी प्रकारों से पूरी तरह सुरक्षा नहीं दे पाते। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) समेत कई संस्थानों की ओर से किए गए फेज तीन ट्रायल में यह बात सामने आई। ट्रायल के नतीजे द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने दो नए टीकों वीपीएम1002 और इम्यूवैक की सुरक्षा और असर का आकलन करने के लिए प्रीवेंटीबी ट्रायल किया। वीपीएम1002 एक आधुनिक तकनीक से बना रिकॉम्बिनेंट बीसीजी टीका है, जबकि इम्यूवैक एक निष्क्रिय टीका है, जिसे संक्रमण फैलाए बिना शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। देश में फिलहाल टीबी से बचाव के लिए जन्म के समय बीसीजी टीका लगाया जाता है, लेकिन बड़े बच्चों और वयस्कों में इसकी प्रभावशीलता सीमित मानी जाती है।
ट्रायल में 12,700 से ज्यादा लोग शामिल
ट्रायल में 12,700 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। ये सभी टीबी मरीजों के संपर्क में आए थे। इनकी उम्र छह साल या उससे ज्यादा थी। एक समूह को वीपीएम1002, दूसरे को इम्यूवैक और तीसरे को प्लेसिबो (नकली दवा) दी गई। करीब 38 महीनों तक इन लोगों की निगरानी की गई। नतीजों में पाया गया कि दोनों टीके सुरक्षित हैं और शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करते हैं। लेकिन, ये सभी मामलों को रोकने में प्रभावी नहीं पाए गए।
टीबी को गंभीर बनने से रोकने में की मदद
इन टीकों ने उन लोगों में टीबी को गंभीर (एक्टिव) बनने से रोकने में मदद की, जिनमें पहले से लेटेंट टीबी था। वीपीएम1002 ने खासतौर पर फेफड़ों के बाहर होने वाले एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ लगभग 50 फीसदी तक असर दिखाया। छह से 14 साल के बच्चों में वीपीएम1002 ने सभी प्रकार के टीबी के खिलाफ कुछ सुरक्षा दिखाई, जबकि इम्यूवैक ने छह से 10 साल के बच्चों में एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी से बचाव में मदद की। हालांकि, शोध में यह भी पाया गया कि कम वजन वाले बच्चों और वयस्कों में ये टीके असरदार नहीं रहे।
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नई दिल्ली। टीबी के दो नए टीके सुरक्षित हैं, लेकिन ये बीमारी के सभी प्रकारों से पूरी तरह सुरक्षा नहीं दे पाते। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) समेत कई संस्थानों की ओर से किए गए फेज तीन ट्रायल में यह बात सामने आई। ट्रायल के नतीजे द ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने दो नए टीकों वीपीएम1002 और इम्यूवैक की सुरक्षा और असर का आकलन करने के लिए प्रीवेंटीबी ट्रायल किया। वीपीएम1002 एक आधुनिक तकनीक से बना रिकॉम्बिनेंट बीसीजी टीका है, जबकि इम्यूवैक एक निष्क्रिय टीका है, जिसे संक्रमण फैलाए बिना शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। देश में फिलहाल टीबी से बचाव के लिए जन्म के समय बीसीजी टीका लगाया जाता है, लेकिन बड़े बच्चों और वयस्कों में इसकी प्रभावशीलता सीमित मानी जाती है।
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ट्रायल में 12,700 से ज्यादा लोग शामिल
ट्रायल में 12,700 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। ये सभी टीबी मरीजों के संपर्क में आए थे। इनकी उम्र छह साल या उससे ज्यादा थी। एक समूह को वीपीएम1002, दूसरे को इम्यूवैक और तीसरे को प्लेसिबो (नकली दवा) दी गई। करीब 38 महीनों तक इन लोगों की निगरानी की गई। नतीजों में पाया गया कि दोनों टीके सुरक्षित हैं और शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स पैदा करते हैं। लेकिन, ये सभी मामलों को रोकने में प्रभावी नहीं पाए गए।
टीबी को गंभीर बनने से रोकने में की मदद
इन टीकों ने उन लोगों में टीबी को गंभीर (एक्टिव) बनने से रोकने में मदद की, जिनमें पहले से लेटेंट टीबी था। वीपीएम1002 ने खासतौर पर फेफड़ों के बाहर होने वाले एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के खिलाफ लगभग 50 फीसदी तक असर दिखाया। छह से 14 साल के बच्चों में वीपीएम1002 ने सभी प्रकार के टीबी के खिलाफ कुछ सुरक्षा दिखाई, जबकि इम्यूवैक ने छह से 10 साल के बच्चों में एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी से बचाव में मदद की। हालांकि, शोध में यह भी पाया गया कि कम वजन वाले बच्चों और वयस्कों में ये टीके असरदार नहीं रहे।