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डीयू : इतिहास के पीजी सिलेबस से दिल्ली सल्तनत का वैकल्पिक पेपर हटा
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तहत चल रही है सिलेबस समीक्षा के तहत किया गया बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के स्नातकोत्तर सिलेबस से दिल्ली सल्तनत : स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया का वैकल्पिक पेपर हटा दिया गया है। इसके अलावा प्राचीन और आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़े कुछ पुराने पेपर को भी सिलेबस में जगह नहीं दिया गया है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लगातार हो रही सिलेबस समीक्षा के तहत किया गया है।
दिल्ली सल्तनत का वैकल्पिक पेपर (डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव-डीएसई) कई वर्षों से मध्यकालीन भारत के इतिहास की पढ़ाई का हिस्सा रहा है। इस पेपर में दिल्ली सल्तनत के केवल शासकों और युद्धों के बारे में नहीं पढ़ाया जाता था, बल्कि इसमें यह समझाया जाता था कि उस समय राज्य कैसे बनाए सत्ता और प्रशासन कैसे चलता था।
इसके साथ ही जेंडर एंड वुमेन इन अर्ली इंडिया पेपर भी शामिल नहीं है। इसमें प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति और उनकी भूमिका के बारे में पढ़ाया जाता था। प्राचीन भारत की राजनीति और धर्म से जुड़े पेपर भी नहीं पढ़ाए जाएंगे। पॉलिटिकल प्रोसेसेज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटीज इन एंशिएंट इंडिया नाम का पेपर भी नए सिलेबस में नहीं है। इसी तरह रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडियन लिटरेचर भी नए सिलेबस में शामिल नहीं किया गया है। तीसरे सेमेस्टर के लिए कई डीएसई पेपर प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन नए अधिसूचित सिलेबस में 16 पेपर ही शामिल किए गए हैं। कुछ अन्य पेपर अभी चर्चा के तहत हैं, जबकि कुछ पेपर पर अभी चर्चा नहीं हुई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास के स्नातकोत्तर सिलेबस से दिल्ली सल्तनत : स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया का वैकल्पिक पेपर हटा दिया गया है। इसके अलावा प्राचीन और आधुनिक भारत के इतिहास से जुड़े कुछ पुराने पेपर को भी सिलेबस में जगह नहीं दिया गया है। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लगातार हो रही सिलेबस समीक्षा के तहत किया गया है।
दिल्ली सल्तनत का वैकल्पिक पेपर (डिसिप्लिन स्पेसिफिक इलेक्टिव-डीएसई) कई वर्षों से मध्यकालीन भारत के इतिहास की पढ़ाई का हिस्सा रहा है। इस पेपर में दिल्ली सल्तनत के केवल शासकों और युद्धों के बारे में नहीं पढ़ाया जाता था, बल्कि इसमें यह समझाया जाता था कि उस समय राज्य कैसे बनाए सत्ता और प्रशासन कैसे चलता था।
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इसके साथ ही जेंडर एंड वुमेन इन अर्ली इंडिया पेपर भी शामिल नहीं है। इसमें प्राचीन भारत में महिलाओं की स्थिति और उनकी भूमिका के बारे में पढ़ाया जाता था। प्राचीन भारत की राजनीति और धर्म से जुड़े पेपर भी नहीं पढ़ाए जाएंगे। पॉलिटिकल प्रोसेसेज एंड स्ट्रक्चर ऑफ पॉलिटीज इन एंशिएंट इंडिया नाम का पेपर भी नए सिलेबस में नहीं है। इसी तरह रिलिजन एंड सोसाइटी इन एंशिएंट इंडियन लिटरेचर भी नए सिलेबस में शामिल नहीं किया गया है। तीसरे सेमेस्टर के लिए कई डीएसई पेपर प्रस्तावित किए गए थे, लेकिन नए अधिसूचित सिलेबस में 16 पेपर ही शामिल किए गए हैं। कुछ अन्य पेपर अभी चर्चा के तहत हैं, जबकि कुछ पेपर पर अभी चर्चा नहीं हुई है।
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