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सोनिया गांधी वोटर लिस्ट मामला: द्वारका कोर्ट ने फैसला टाला, 25 जुलाई को सुरक्षित रखा था निर्णय

Thu, 13 Aug 2026 01:56 PM IST
Rahul Kumar Tiwari एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Thu, 13 Aug 2026 01:56 PM IST
सार

द्वारका कोर्ट ने सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में भारतीय नागरिक बनने से पहले शामिल किए जाने के मामले में दायर पुनरीक्षण याचिका पर फैसला टाल दिया। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। 

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Dwarka Court deferred decision on revision petition regarding inclusion of Sonia Gandhi name in voter list
सोनिया गांधी - फोटो : ANI

विस्तार

द्वारका कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने गुरुवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दायर पुनरीक्षण याचिका पर फैसला टाल दिया। यह मामला कथित तौर पर सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में उनका नाम शामिल किए जाने से जुड़ा है।
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पुनरीक्षण याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले ही उनका नाम मतदाता सूची में शामिल कर दिया गया था। उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसे मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद इस आदेश को पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई।
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विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने, जिनका अब द्वारका कोर्ट में तबादला हो चुका है, को 13 अगस्त यानी आज इस मामले में फैसला सुनाना था। उन्होंने 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा था। विशेष न्यायाधीश के समक्ष सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा और तरुणम चीमा ने दलील दी कि पुनरीक्षण याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए दस्तावेज वास्तविक नहीं हैं। वहीं, पुनरीक्षण याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बर्मन और अधिवक्ता नीरज पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि प्रतिवादी यह बताने में सक्षम नहीं हैं कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल किया गया।

चार जुलाई को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक आवेदन के जवाब में अपना पक्ष दाखिल किया था। इस आवेदन में भारतीय नागरिक बनने से पहले कथित तौर पर मतदाता सूची में उनका नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लेने की मांग की गई थी।

16 मई को पुनरीक्षण याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी की ओर से एक अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए आवेदन दाखिल किया गया था। इससे पहले 18 अप्रैल को जवाबी दलीलें पूरी होने के बाद याचिकाकर्ता ने एक दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने की अनुमति मांगी थी। यह दस्तावेज वर्ष 1980 की चुनाव आयोग की एक रिपोर्ट थी। इसके बाद विकास त्रिपाठी की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का आवेदन दिया गया।

30 मार्च को कोर्ट ने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायतकर्ता की दलीलें सुनी थीं। कोर्ट ने सोनिया गांधी के वकील की दलीलें भी सुनीं। इस दौरान कोर्ट ने सोनिया गांधी के वकील से पूछा था कि "आप इस मुद्दे को कैसे नजरअंदाज करेंगे कि सोनिया गांधी 1983 में भारत की नागरिक बनने से पहले ही मतदाता बन गई थीं?"
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सोनिया गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने दलील दी थी कि यह एक "फिशिंग और रोविंग इंक्वायरी" है और एसीजेएम ने इसे सही तरीके से खारिज किया था।दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता बर्मन ने दलील दी थी कि भारतीय नागरिक बने बिना मतदाता सूची में नाम शामिल कराना संभव नहीं था। उन्होंने कहा था कि वे कोर्ट के सामने यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा केवल जाली दस्तावेजों या धोखाधड़ी के जरिए ही किया जा सकता था।
 

इस पर कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता एफआईआर के लिए कोर्ट के सामने आए हैं और यह मामला करीब आधी सदी पुराना है। कोर्ट ने सवाल किया था कि जांच किसके खिलाफ की जाएगी और कहा था कि मामले का दायरा बढ़ाया जा रहा है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा था कि वे इस तथ्य से अवगत हैं। उन्होंने बताया था कि अब उन्हें चुनाव आयोग से मतदाता सूची की एक प्रति मिली है। उन्होंने रोल की प्रति के लिए आवेदन किया था और उन्हें प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई गई थीं।
 

कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल याचिकाकर्ता की ओर से जो जानकारी सामने रखी गई है, वह केवल नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों से संबंधित है। शिकायतकर्ता के वकील ने कहा था कि यह एक विदेशी नागरिक की ओर से की गई घोषणा का मामला है और प्रथम दृष्टया यह दिखाया जा सकता है कि गलत घोषणा की गई थी, जिसकी जांच की जरूरत है।
 
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