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Delhi NCR News: बादशाहपुर बस अड्डे पर फिर बढ़ने लगा अतिक्रमण, लग रहा जाम
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- अतिक्रमण हटाने के कुछ माह बाद फिर वही हालात दिख रहे, रेहड़ियों और सड़क किनारे वाहन खड़ा करने से परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। बादशाहपुर बस अड्डे पर प्रशासनिक लापरवाही से एक बार फिर अतिक्रमण बढ़ने लगा है। कुछ माह पहले विशेष अभियान चलाकर बस अड्डे को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, लेकिन निगरानी के अभाव में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है। सड़क किनारे दोबारा रेहड़ियां सजने लगी हैं और सड़क किनारे वाहनों की अवैध पार्किंग से दिनभर जाम लगता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के कुछ दिन बाद फिर से विक्रेता मुख्य सड़क तक अपनी रेहड़ियां और दुकान लगाने लगे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई है जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सुबह और शाम के समय यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम लग जाता है। कई वाहन चालक निर्धारित पार्किंग का उपयोग करने के बजाय मुख्य सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं। इस कारण दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी होती है।
राहगीरों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के अभियान पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन नियमित निगरानी नहीं होने से उसका असर कुछ ही दिनों तक सीमित रहा। अब फिर से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। बादशाहपुर बस अड्डे पर प्रशासनिक लापरवाही से एक बार फिर अतिक्रमण बढ़ने लगा है। कुछ माह पहले विशेष अभियान चलाकर बस अड्डे को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था, लेकिन निगरानी के अभाव में स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है। सड़क किनारे दोबारा रेहड़ियां सजने लगी हैं और सड़क किनारे वाहनों की अवैध पार्किंग से दिनभर जाम लगता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के कुछ दिन बाद फिर से विक्रेता मुख्य सड़क तक अपनी रेहड़ियां और दुकान लगाने लगे हैं। इससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई है जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सुबह और शाम के समय यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम लग जाता है। कई वाहन चालक निर्धारित पार्किंग का उपयोग करने के बजाय मुख्य सड़क पर ही वाहन खड़े कर देते हैं। इस कारण दोनों ओर से आने-जाने वाले वाहनों को निकलने में परेशानी होती है।
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राहगीरों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के अभियान पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन नियमित निगरानी नहीं होने से उसका असर कुछ ही दिनों तक सीमित रहा। अब फिर से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
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