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एम्स में इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू: पहले दिन हटाए गए हरीश के खाने और सांस लेने के पाइप, डॉक्टर अलर्ट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Sun, 15 Mar 2026 09:58 PM IST
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सार

सूत्रों का कहना है कि लाइफ सपोर्ट के कुछ उपकरण हटाए जाने के बाद अब आगे की स्थिति हरीश राणा के शरीर की प्रतिक्रिया और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करेगी। डॉक्टरों का मानना है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो सकती है।

Euthanasia Process Initiated at AIIMS Two Major Life Support Tubes Removed from Harish Rana
हरीश राणा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

एम्स के डॉ. बीआर आंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर यूनिट में शनिवार को भर्ती हुए हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) प्रक्रिया शुरू हो गई है। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति की निगरानी करते हुए चरणबद्ध तरीके से जीवनरक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। एम्स इस मामले में आधिकारिक बयान नहीं दे रहा और सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मानने की बात कह रहा है।

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लगातार हालात पर नजर बनाए हैं डॉक्टर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हरीश के शरीर से लाइफ सपोर्ट से जुड़े दो प्रमुख पाइप सांस लेने के लिए ट्रैकियोस्टॉमी ट्यूब और पोषण के लिए पीईजी फीडिंग ट्यूब को हटा दिया हैं। यह प्रक्रिया पूरी देखभाल, दर्द-रहित तरीके से और धीरे-धीरे की जा रही है। डॉक्टरों की पूरी कोशिश है कि हरीश को तकलीफ न हो और वे प्राकृतिक, सम्मानजनक तरीके से अंतिम यात्रा पूरी करें। अस्पताल सूत्रों के अनुसार हरीश की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, सूत्रों ने हरीश की स्थिति को देखते हुए आशंका जताई है कि करीब एक-दो दिन में वह इस पीड़ा से मुक्त हो जाएंगे।

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निश्चित समयसीमा तय नहीं 
सूत्रों का कहना है कि लाइफ सपोर्ट के कुछ उपकरण हटाए जाने के बाद अब आगे की स्थिति हरीश राणा के शरीर की प्रतिक्रिया और चिकित्सकीय स्थिति पर निर्भर करेगी। डॉक्टरों का मानना है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु की यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो सकती है, हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी मंजूरी दी है
गौरतलब है कि निष्क्रिय इच्छामृत्यु के तहत मरीज को जीवनरक्षक उपकरणों पर कृत्रिम रूप से जिंदा रखने वाली चिकित्सा सहायता धीरे-धीरे हटाई जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तों के साथ इस प्रक्रिया को कानूनी मंजूरी दी हुई है, जिसके तहत मरीज की स्थिति, परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्ड की अनुमति अनिवार्य होती है।

एक महत्वपूर्ण मिसाल
एम्स में चल रही यह प्रक्रिया देश में निष्क्रिय इच्छामृत्यु के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखी जा रही है। अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकीय टीम पूरे मामले को संवेदनशीलता और सावधानी के साथ संभाल रही है।

अब आगे क्या?
बीते शनिवार हरीश को गाजियाबाद से एंबुलेंस में सकुशल एम्स लाया गया। इस दौरान हरीश के पिता अशोक राणा और उनकी मां निर्मला देवी भी मौजूद रहीं। दोनों अस्पताल में हैं और अपने बेटे के साथ आखिरी पल बीता रहे हैं। शनिवार को अपने दिल पर पत्थर रखकर और नम आंखों से निर्मला देवी ने अपने बेटे का माथा चूमा। परिजनों का कहना है कि अस्पताल की पैलिएटिव केयर टीम उनकी हर संभव आरामदायक देखभाल कर रही है। ऐसे में डॉक्टरों के अनुसार, प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है, यह उनकी मौजूदा स्थिति पर निर्भर करेगा।

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