JNU Protest : जेएनयू में बवाल के बीच फैकल्टी सदस्यों ने खोला मोर्चा, प्रोफेसर क्रिस्टु दास का आमरण अनशन शुरू
JNU Protest: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को हुए बवाल के बाद फैकल्टी सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। जेएनयू ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने परिसर में आमरण अनशन शुरू किया है। यह अनशन तालाबंदी, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित करने और हंगामे के विरोध में है।
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बृहस्पतिवार को हुए बवाल के बाद छात्र संघ और शिक्षक संघ के खिलाफ अब फैकल्टी सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया है। स्कूलों की तालाबंदी, छात्रों की पढ़ाई प्रभावित करने, तोड़फोड़ और हंगामे के विरोध में जेएनयू ऐतिहासिक अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने जेएनयू परिसर के साबरमती टी प्वाइंट पर आमरण अनशन बैठ गए है। प्रोफेसर के समर्थन में कई दूसरे फैकल्टी सदस्य और छात्र भी समर्थन के लिए मैदान में उतरे है।
जेएनयू प्रोफेसर क्रिस्टु दास ने कहा कि यहां तीन अलग-अलग भूमिकाओं में आमरण अनशन पर बैठा हूं। पहला जेएनयू में इतिहास के पूर्व छात्र के तौर पर, दूसरा राष्ट्र के जिम्मेदार नागरिक के रूप में और तीसरा संकाय सदस्य के रूप में आमरण अनशन कर रहा हूं। परिसर में चल रही घटनाओं से सभी अवगत है। लाइब्रेरी में तोड़फोड़, उसके बाद छात्र संघ पदाधिकारियों के निष्कासन और फिर छात्र संघों ने विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। विश्वविद्यालय में हड़ताल के नाम पर कक्षाओं में जबरन ताला लगाकर जेएनयू छात्र के पदाधिकारी जेएनयू शिक्षक संघ के समर्थन से तोड़फोड़ और गुंडागर्दी कर रहे हैं।
तोड़फोड़ के खिलाफ आमरण अनशन
छात्रों को कक्षाओं से बाहर जाने के लिए मजबूर किया गया। यह आमरण अनशन उन तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ है जिन्होंने लोकतंत्र के नाम पर हंगामा, दरवाजे बंद और छात्रों और शिक्षकों को कक्षा में प्रवेश करने से रोका। हम बौद्धिक बहसों और चर्चाओं का स्वागत करते हैं।
जेएनयू शिक्षक संघ और छात्र संघ को आकर बहस और खुली चर्ची करनी चाहिए। यह तोड़फोड़ के खिलाफ आमरण अनशन है। उन्होंने कहा कि अगर जेएनयू प्रशासन निष्कासन रद्द करने के लिए तैयार नहीं है तो छात्र संघ अदालत का रुख क्यों नहीं करता है उनको अदालत जाने से कौन रोक रहा है। जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित की टिप्पणियों में छात्र संघ को कुछ कमियां नजर आती है तो जेएनयू हमेशा से बौद्धिक संस्कृति में विश्ववास रखने वाला संस्थान रहा है। उन्हें सार्वजनिक बहस के लिए आमंत्रित करना चाहिए था।
कुछ उपद्रवियों के समूह से जेएनयू को खतरा
जेएनयू के शोधार्थी छात्र सप्तार्ष शील ने कहा कि जेएनयू लंबे समय से लोकतंत्र का केंद्र रहा है। कुछ उपद्रवियों के एक समूह से खतरे में है। तोड़फोड़ के बाद भी वह रोजाना कक्षाओं में हंगामा कर रहे है। छात्रों को परेशान किया जा रहा है। कई इमारतों को बंद कर दिया है। जिस कारण कक्षाएं नहीं हो पा रही है। इस तरह के कृत्य के खिलाफ है। हम जेएनयू और इसके अध्ययन के माहौल को जेएनयू शिक्षक संघ और छात्र संघ की दुष्प्रचारियों से बचाने के लिए एकजुटता से खड़े हैं। हम जेएनयू में स्थिति सामान्य चाहते है।