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फरीदाबाद: 160 फीट गहरे बोरवेल में गिरी मासूम की मौत, 10 घंटे चला रेस्क्यू, 15 साल पहले ढक्कन लगाकर किया था बंद

Mon, 28 Sep 2026 04:53 PM IST
अनुज कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बल्लभगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, बल्लभगढ़ Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 28 Sep 2026 04:53 PM IST
सार

फरीदाबाद में खुले बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची नेहा को बचाया नहीं जा सका। 10 घंटे के बचाव अभियान के बाद उसे बाहर निकाला गया। उस समय उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। डॉक्टरों ने उसे तत्काल मृत घोषित कर दिया।

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10-hour rescue operation for three-year-old girl who fell into 160 feet borewell
बोरवेल में गिरी बच्ची नेहा की मौत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गांव सीही में रविवार शाम बच्चों के साथ खेलते समय खुले बोरवेल में गिरी तीन साल बच्ची नेहा को रातभर चले करीब 10 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी बचाया नहीं जा सका। सोमवार सुबह करीब 3 बजकर 55 मिनट पर बचाव दल ने बच्ची को बोरवेल से बाहर निकाला। उस समय उसके शरीर में कोई हलचल नहीं थी। बच्ची को तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्ची के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद सोमवार की दोपहर को परिजनों को सौंप दिया।

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10-hour rescue operation for three-year-old girl who fell into 160 feet borewell
बोरवेल में गिरी बच्ची का रेस्क्यू करती टीम - फोटो : अमर उजाला

पिता उत्तर प्रदेश के मैनपुरी
मृतक नेहा के पिता रामदीन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं। वह पिछले कई वर्षों से अपने परिवार के साथ सीही गांव में रह रहे हैं और मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। रविवार की शाम को खेलते हुए वह बोरवेल के अंदर गिर गई।

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सुबह करीब चार बजे तक चला रेस्क्यू
बच्ची को बोरवेल से निकालने के लिए हरियाणा पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें रातभर मौके पर जुटी रहीं। एनडीआरएफ अधिकारी के अनुसार रविवार रात करीब 8 बजे टीम को बच्ची के बोरवेल में गिरने की सूचना मिली। इसके बाद टीम करीब 9 बजे गाजियाबाद से घटनास्थल पर पहुंची। उस समय तक अन्य विभागों की टीमें भी बचाव अभियान में जुटी हुई थीं।

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बोरवेल में गिरी बच्ची का रेस्क्यू करती टीम - फोटो : अमर उजाला

'गहराई करीब 160 फीट थी'
नगर निगम की ओर से बोरवेल की गहराई करीब 160 फीट बताई गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत में बचाव दल को बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन करीब दो घंटे के बाद उसकी आवाज आनी बंद हो गई।

सबसे पहले डाली गई ऑक्सीजन की पाइप
घटना की सूचना मिलने पर मौके पर बीके अस्पताल से सीएमओ डॉ जयंत अहूजा की टीम मौके पर पहुंची सबसे पहले टीम की ओर से दो पानी की पाइप के जरिए बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन को डालने की प्रक्रिया शुरू की गई। उसके बाद दूसरी टीम के जरिए सीसीटीवी कैमरों को डाल बच्ची की हालत को देखने का प्रयास किया। उस दौरान टीम को दो चप्पल नजर आई। जिससे उनको अंदेशा लगाया कि कि वह चप्पल बच्ची की है। लेकिन वह चप्पल बच्ची की नहीं होकर अन्य किया ओर की थी जो काफी समय से गिरी हुई थी।

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बोरवेल में गिरी बच्ची का रेस्क्यू करती टीम - फोटो : अमर उजाला

15 साल पहले ढक्कन लगाकर बंद किया गया था बोरवेल
नगर निगम के कार्यकारी अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि करीब 15 साल पहले बोरवेल को ढक्कन लगाकर बंद किया गया था। हालांकि, ढक्कन हटने की जानकारी नगर निगम को नहीं मिली थी। वहीं दूसरी ओर बच्ची की मौत के बाद सेक्टर-8 के लोगों में नगर निगम के प्रति नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि बोरवेल को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से बंद किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था। सोमवार की दोपहर पर पुलिस ने बच्ची का पोस्टमार्टम करवाने के बाद परिजनों को सौंप दिया है।

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