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Faridabad News: फरीदाबाद में हर 25 वर्ग किमी पर लगेगा प्रदूषण निगरानी केंद्र
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प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई योजना लागू
कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम में होगा सुधार
वर्ल्ड बैंक से मिली राशि से कचरे से लेकर उद्योग तक हर स्तर पर बड़ा सुधार रोडमैप तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक पहचान के साथ बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे फरीदाबाद में अब हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यापक और तकनीक आधारित निगरानी तंत्र लागू किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के सहयोग से शुरू क्लीन एयर प्रोजेक्ट के तहत जिले को पहली बार पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से मॉनिटर करने की तैयारी है।
इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि पूरे जिले को 5x5 किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर हर 25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रदूषण मापक केंद्र स्थापित किए जाएंगे जिससे हवा में मौजूद प्रदूषण के सटीक स्रोतों की पहचान संभव हो सकेगी। फरीदाबाद हाल ही में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होने के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। मौजूदा समय में शहर में केवल चार प्रमुख निगरानी केंद्र ही सक्रिय हैं जो बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के मुकाबले नाकाफी माने जा रहे थे। नई योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर आठ की जाएगी। वहीं अगर जरूरत पड़ी तो पूरे जिले में 25 से अधिक सेंसर आधारित केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
ग्रिड आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद प्रशासन को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अधिक है और उसके पीछे कौन-सा कारण जिम्मेदार है। इससे वन साइज फिट्स ऑल की जगह क्षेत्र विशेष के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों, ट्रैफिक कॉरिडोर और रिहायशी इलाकों के प्रदूषण के स्तर की अलग-अलग पहचान हो सकेगी, जिससे समय रहते नियंत्रणात्मक कदम उठाना आसान होगा।
शहर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण डीजल आधारित सार्वजनिक परिवहन भी है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने फरीदाबाद के लिए कुल 500 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इनमें से 100 बसों की डिलीवरी जल्द कर दी जाएगी ये बसें आने वाले महीनों में सड़कों पर उतरेंगी और सार्वजनिक परिवहन को ग्रीन मोड में बदलने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही डीजल ऑटो की जगह ई-ऑटो को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए शहर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से तैयार किया जा रहा है। इससे प्रदूषण कम होने के साथ यात्रियों को भी सस्ती और साफ-सुथरी परिवहन सुविधा मिलेगी।
कचरा प्रबंधन में होगा बदलाव, 900 टन कचरे का होगा 100 प्रतिशत निपटान
फरीदाबाद में रोजाना करीब 900 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसका बड़ा हिस्सा अब तक डंपिंग ग्राउंड में जमा हो रहा है। नई योजना के तहत छोटे-छोटे इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जा सके। बंधवाड़ी में पहले से जमा कचरे के निस्तारण पर भी काम जारी है और अब तक करीब 50 प्रतिशत कचरे का वैज्ञानिक उपचार किया जा चुका है। इससे न केवल जमीन और पानी के प्रदूषण में कमी आने के साथ आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और बीमारियों से भी राहत मिलेगी।
उद्योगों को राहत के साथ सख्ती, स्वच्छ ईंधन पर जोर
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं भी शहर के प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को डीजल जनरेटर के स्थान पर गैस आधारित जनरेटर और बॉयलर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी भी दी जा रही है। साथ ही एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे फैक्ट्रियों से निकलने वाले उत्सर्जन पर नजर रखी जा सके। इससे उद्योगों पर सीधा दबाव बनेगा कि वे तय मानकों का पालन करें। प्रदूषण के कारण फरीदाबाद में सांस, एलर्जी और हृदय संबंधी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में शहर की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा जा सकता है।
तेजी से लागू होगा प्रोजेक्ट, दिखेंगे जमीन पर नतीजे
वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता मिलने के बाद अब इस परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारने की तैयारी है। प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तय समयसीमा में सभी काम पूरे हो सकें। आने वाले महीनों में जब निगरानी केंद्र, इलेक्ट्रिक बसें और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पूरी तरह काम करने लगेंगे तब फरीदाबाद की पहचान केवल औद्योगिक शहर के रूप में नहीं बल्कि सस्टेनेबल और क्लीन सिटी के रूप में भी स्थापित हो सकेगी।
वर्जन
फरीदाबाद में इलेक्ट्रिक बसों के लिए बस अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही बसों का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। -संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी
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कचरा प्रबंधन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम में होगा सुधार
वर्ल्ड बैंक से मिली राशि से कचरे से लेकर उद्योग तक हर स्तर पर बड़ा सुधार रोडमैप तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। औद्योगिक पहचान के साथ बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे फरीदाबाद में अब हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए व्यापक और तकनीक आधारित निगरानी तंत्र लागू किया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के सहयोग से शुरू क्लीन एयर प्रोजेक्ट के तहत जिले को पहली बार पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से मॉनिटर करने की तैयारी है।
इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि पूरे जिले को 5x5 किलोमीटर के ग्रिड में बांटकर हर 25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रदूषण मापक केंद्र स्थापित किए जाएंगे जिससे हवा में मौजूद प्रदूषण के सटीक स्रोतों की पहचान संभव हो सकेगी। फरीदाबाद हाल ही में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होने के बाद सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है। मौजूदा समय में शहर में केवल चार प्रमुख निगरानी केंद्र ही सक्रिय हैं जो बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के मुकाबले नाकाफी माने जा रहे थे। नई योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर आठ की जाएगी। वहीं अगर जरूरत पड़ी तो पूरे जिले में 25 से अधिक सेंसर आधारित केंद्र स्थापित किए जा सकते हैं।
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ग्रिड आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद प्रशासन को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि किस क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर अधिक है और उसके पीछे कौन-सा कारण जिम्मेदार है। इससे वन साइज फिट्स ऑल की जगह क्षेत्र विशेष के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों, ट्रैफिक कॉरिडोर और रिहायशी इलाकों के प्रदूषण के स्तर की अलग-अलग पहचान हो सकेगी, जिससे समय रहते नियंत्रणात्मक कदम उठाना आसान होगा।
शहर में प्रदूषण का एक बड़ा कारण डीजल आधारित सार्वजनिक परिवहन भी है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने फरीदाबाद के लिए कुल 500 नई इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इनमें से 100 बसों की डिलीवरी जल्द कर दी जाएगी ये बसें आने वाले महीनों में सड़कों पर उतरेंगी और सार्वजनिक परिवहन को ग्रीन मोड में बदलने की दिशा में अहम भूमिका निभाएंगी। इसके साथ ही डीजल ऑटो की जगह ई-ऑटो को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दी जा रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए शहर में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क भी तेजी से तैयार किया जा रहा है। इससे प्रदूषण कम होने के साथ यात्रियों को भी सस्ती और साफ-सुथरी परिवहन सुविधा मिलेगी।
कचरा प्रबंधन में होगा बदलाव, 900 टन कचरे का होगा 100 प्रतिशत निपटान
फरीदाबाद में रोजाना करीब 900 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसका बड़ा हिस्सा अब तक डंपिंग ग्राउंड में जमा हो रहा है। नई योजना के तहत छोटे-छोटे इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जिससे कचरे का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जा सके। बंधवाड़ी में पहले से जमा कचरे के निस्तारण पर भी काम जारी है और अब तक करीब 50 प्रतिशत कचरे का वैज्ञानिक उपचार किया जा चुका है। इससे न केवल जमीन और पानी के प्रदूषण में कमी आने के साथ आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और बीमारियों से भी राहत मिलेगी।
उद्योगों को राहत के साथ सख्ती, स्वच्छ ईंधन पर जोर
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं भी शहर के प्रदूषण का बड़ा कारण रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को डीजल जनरेटर के स्थान पर गैस आधारित जनरेटर और बॉयलर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके लिए आर्थिक सहायता और सब्सिडी भी दी जा रही है। साथ ही एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे फैक्ट्रियों से निकलने वाले उत्सर्जन पर नजर रखी जा सके। इससे उद्योगों पर सीधा दबाव बनेगा कि वे तय मानकों का पालन करें। प्रदूषण के कारण फरीदाबाद में सांस, एलर्जी और हृदय संबंधी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में शहर की हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार देखा जा सकता है।
तेजी से लागू होगा प्रोजेक्ट, दिखेंगे जमीन पर नतीजे
वर्ल्ड बैंक से वित्तीय सहायता मिलने के बाद अब इस परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारने की तैयारी है। प्रशासनिक स्तर पर इसके लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तय समयसीमा में सभी काम पूरे हो सकें। आने वाले महीनों में जब निगरानी केंद्र, इलेक्ट्रिक बसें और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पूरी तरह काम करने लगेंगे तब फरीदाबाद की पहचान केवल औद्योगिक शहर के रूप में नहीं बल्कि सस्टेनेबल और क्लीन सिटी के रूप में भी स्थापित हो सकेगी।
वर्जन
फरीदाबाद में इलेक्ट्रिक बसों के लिए बस अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। जल्द ही बसों का संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा। -संदीप दहिया, अधीक्षण अभियंता, एचएसवीपी