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Faridabad News: सबूतों के अभाव में तीन युवक बरी
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मोबाइल स्नैचिंग का मामला : गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। मोबाइल स्नैचिंग के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीन युवकों मोहम्मद शाकिर, पंकज और शिवम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
सुनवाई के दौरान केस में बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ही अदालत में घटना के वक्त बताए गए आरोपियों की पहचान नहीं कर सका। उसने बताया कि घटना अचानक हुई थी और पीछे से हमला होने के कारण वह हमलावरों को देख नहीं पाया। अदालत ने इसे केस की सबसे बड़ी कमजोरी माना। जांच के दौरान एक महिला पुष्पा का नाम सामने आया, जिसके नाम पर सिम कार्ड होना बताया गया था लेकिन अभियोजन पक्ष उसे गवाह के रूप में अदालत में पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा कि इससे मोबाइल की चेन ऑफ एविडेंस पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई। वहीं, गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया। आरोपियों से बरामद मोबाइल, बाइक और नकदी को घटना से जोड़ने में पुलिस असफल रही। बरामद बाइक के मॉडल में अंतर पाया गया, जबकि नकदी काफी समय बाद बरामद की गई, जिससे उसकी विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस के समक्ष दिए गए कबूलनामे को स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, घटनास्थल की निशानदेही को भी पर्याप्त सबूत नहीं माना गया। सभी पहलुओं पर विचार करते हुए नौ अप्रैल को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने हाल ही में फैसला सुनाते हुए तीनों युवकों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना सूरजकुंड क्षेत्र 21 फरवरी को हुई मोबाइल स्नैचिंग की घटना से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता ने अज्ञात युवकों पर मोबाइल छीनने का आरोप लगाया था।
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फरीदाबाद। मोबाइल स्नैचिंग के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीन युवकों मोहम्मद शाकिर, पंकज और शिवम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
सुनवाई के दौरान केस में बड़ा मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ही अदालत में घटना के वक्त बताए गए आरोपियों की पहचान नहीं कर सका। उसने बताया कि घटना अचानक हुई थी और पीछे से हमला होने के कारण वह हमलावरों को देख नहीं पाया। अदालत ने इसे केस की सबसे बड़ी कमजोरी माना। जांच के दौरान एक महिला पुष्पा का नाम सामने आया, जिसके नाम पर सिम कार्ड होना बताया गया था लेकिन अभियोजन पक्ष उसे गवाह के रूप में अदालत में पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने कहा कि इससे मोबाइल की चेन ऑफ एविडेंस पूरी तरह स्थापित नहीं हो पाई। वहीं, गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास पाया गया। आरोपियों से बरामद मोबाइल, बाइक और नकदी को घटना से जोड़ने में पुलिस असफल रही। बरामद बाइक के मॉडल में अंतर पाया गया, जबकि नकदी काफी समय बाद बरामद की गई, जिससे उसकी विश्वसनीयता संदिग्ध हो गई।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस के समक्ष दिए गए कबूलनामे को स्वतंत्र साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही, घटनास्थल की निशानदेही को भी पर्याप्त सबूत नहीं माना गया। सभी पहलुओं पर विचार करते हुए नौ अप्रैल को न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने हाल ही में फैसला सुनाते हुए तीनों युवकों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। जानकारी के अनुसार, यह मामला थाना सूरजकुंड क्षेत्र 21 फरवरी को हुई मोबाइल स्नैचिंग की घटना से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता ने अज्ञात युवकों पर मोबाइल छीनने का आरोप लगाया था।