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Faridabad News: तीन हजार विकास कार्यों की फाइलें खंगाल रही एसीबी, बिजली से जुड़े कुछ कार्यों में गड़बड़ी के संकेत
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सड़क, सीवर और पानी के साथ अब बिजली के कामों का भी होगा भौतिक सत्यापन, इंजीनियरिंग विंग करेगी तकनीकी जांच में मदद
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। नगर निगम के पिछले वर्षों के विकास कार्यों की जांच अब सड़क, सीवर और पानी की लाइन से आगे बढ़कर बिजली के कामों तक पहुंच गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) करीब तीन हजार विकास कार्यों की फाइलों को खंगाल रहा है। प्रारंभिक पड़ताल में बिजली से जुड़े कुछ कार्यों में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। इसी दौरान निगम के पास बड़ी संख्या में 36 वॉट की लाइटें भी मिली हैं जिनकी खरीद काफी समय पहले किए जाने के बावजूद अब तक इस्तेमाल नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि लाइटों की जरूरत, खरीद, आपूर्ति, भंडारण और इस्तेमाल के बीच कितना अंतर रहा और क्यों रहा।
नगर निगम में वर्ष 2022 से 2026 के बीच कराए गए विकास कार्यों से जुड़ी करीब तीन हजार फाइलों की एसीबी जांच कर रही है। इन फाइलों में सड़क, सीवर, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। जांच के लिए निगम से रिकॉर्ड लिया जा चुका है। एसीबी अपनी इंजीनियरिंग विंग की मदद से दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान कर रही है। बिजली के कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्वीकृत काम, खरीद, आपूर्ति, इंस्टॉलेशन और भुगतान के बीच तालमेल भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
प्रथम दृष्टि में बिजली के कुछ कार्यों को लेकर सवाल सामने आने के बाद यह पहलू अब जांच में महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित एजेंसी को केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।
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काफी पहले खरीदी लाइटें, अब तक इस्तेमाल नहीं
जांच के दौरान सामने आया एक महत्वपूर्ण बिंदु निगम के स्टोर में रखी 36 वॉट की लाइटों से जुड़ा है। निगम के पास इन लाइटों की बड़ी संख्या मौजूद है। बताया जा रहा है कि इनकी खरीद काफी समय पहले हो चुकी थी लेकिन अब तक इनका इस्तेमाल नहीं किया गया। यही स्थिति जांच के लिए सबसे अहम सवाल बन गई है। एसीबी यह देख सकती है कि लाइटें किस योजना या कार्य के तहत खरीदी गईं उस समय इनकी कितनी जरूरत बताई गई थी कितनी मात्रा में खरीद की गई और खरीद के बाद उन्हें कहां लगाया जाना था। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लाइटों के रखे रहने से उनकी उपयोगिता और स्थिति पर क्या असर पड़ा। यदि सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री लंबे समय तक स्टोर में ही पड़ी रहती है तो खरीद की आवश्यकता और योजना की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इन लाइटों की खरीद में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
सड़क, सीवर और पानी के काम भी जांच में
एसीबी की जांच केवल बिजली के कार्यों तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों में नगर निगम की ओर से कराए गए सड़क, सीवर, पानी की लाइन, नाली और अन्य विकास कार्यों की फाइलें भी जांच के दायरे में हैं। इसमें एनएचपीसी के औद्योगिक इलाके में बनी रोड के साथ एनआईटी एक नंबर में सड़क के काम की जांच की बात भी सामने आ रही है। जांच में कार्य की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया को देखा जा रहा है। दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि काम निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ या नहीं। जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच भी की जाएगी।
जांच पूरी होने पर सामने आएगी असली तस्वीर
करीब तीन हजार फाइलों की जांच अपने आप में लंबी प्रक्रिया है। इसमें रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन, तकनीकी परीक्षण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करना होगा।
अभी फाइलों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।-मनीष सहगल, डीएसपी एसीबी
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। नगर निगम के पिछले वर्षों के विकास कार्यों की जांच अब सड़क, सीवर और पानी की लाइन से आगे बढ़कर बिजली के कामों तक पहुंच गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) करीब तीन हजार विकास कार्यों की फाइलों को खंगाल रहा है। प्रारंभिक पड़ताल में बिजली से जुड़े कुछ कार्यों में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। इसी दौरान निगम के पास बड़ी संख्या में 36 वॉट की लाइटें भी मिली हैं जिनकी खरीद काफी समय पहले किए जाने के बावजूद अब तक इस्तेमाल नहीं होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि लाइटों की जरूरत, खरीद, आपूर्ति, भंडारण और इस्तेमाल के बीच कितना अंतर रहा और क्यों रहा।
नगर निगम में वर्ष 2022 से 2026 के बीच कराए गए विकास कार्यों से जुड़ी करीब तीन हजार फाइलों की एसीबी जांच कर रही है। इन फाइलों में सड़क, सीवर, पानी, स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्य शामिल हैं। जांच के लिए निगम से रिकॉर्ड लिया जा चुका है। एसीबी अपनी इंजीनियरिंग विंग की मदद से दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान कर रही है। बिजली के कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, स्वीकृत काम, खरीद, आपूर्ति, इंस्टॉलेशन और भुगतान के बीच तालमेल भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
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प्रथम दृष्टि में बिजली के कुछ कार्यों को लेकर सवाल सामने आने के बाद यह पहलू अब जांच में महत्वपूर्ण हो गया है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि किसी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित एजेंसी को केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।
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काफी पहले खरीदी लाइटें, अब तक इस्तेमाल नहीं
जांच के दौरान सामने आया एक महत्वपूर्ण बिंदु निगम के स्टोर में रखी 36 वॉट की लाइटों से जुड़ा है। निगम के पास इन लाइटों की बड़ी संख्या मौजूद है। बताया जा रहा है कि इनकी खरीद काफी समय पहले हो चुकी थी लेकिन अब तक इनका इस्तेमाल नहीं किया गया। यही स्थिति जांच के लिए सबसे अहम सवाल बन गई है। एसीबी यह देख सकती है कि लाइटें किस योजना या कार्य के तहत खरीदी गईं उस समय इनकी कितनी जरूरत बताई गई थी कितनी मात्रा में खरीद की गई और खरीद के बाद उन्हें कहां लगाया जाना था। इसके साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लाइटों के रखे रहने से उनकी उपयोगिता और स्थिति पर क्या असर पड़ा। यदि सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री लंबे समय तक स्टोर में ही पड़ी रहती है तो खरीद की आवश्यकता और योजना की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इन लाइटों की खरीद में किसी नियम का उल्लंघन हुआ है या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
सड़क, सीवर और पानी के काम भी जांच में
एसीबी की जांच केवल बिजली के कार्यों तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों में नगर निगम की ओर से कराए गए सड़क, सीवर, पानी की लाइन, नाली और अन्य विकास कार्यों की फाइलें भी जांच के दायरे में हैं। इसमें एनएचपीसी के औद्योगिक इलाके में बनी रोड के साथ एनआईटी एक नंबर में सड़क के काम की जांच की बात भी सामने आ रही है। जांच में कार्य की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया को देखा जा रहा है। दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि काम निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ या नहीं। जरूरत पड़ने पर मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच भी की जाएगी।
जांच पूरी होने पर सामने आएगी असली तस्वीर
करीब तीन हजार फाइलों की जांच अपने आप में लंबी प्रक्रिया है। इसमें रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन, तकनीकी परीक्षण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान करना होगा।
अभी फाइलों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।-मनीष सहगल, डीएसपी एसीबी