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Faridabad News: विकास अधूरा आवंटी परेशान, एचएसवीपी को पांच हजार रुपये मुआवजा देने के आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। फरीदाबाद में प्लॉटों की ई-नीलामी से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है जिसमें हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना पूरे विकास कार्यों के किसी भी प्लॉट को ई-नीलामी में शामिल करना आवंटियों के साथ अन्याय है।
आयोग के अनुसार 24 नवंबर 2023 को आवंटन पत्र जारी कर कब्जा प्रस्तावित कर दिया गया जबकि मौके पर सड़क, सीवर, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य अधूरे थे। इससे आवंटी तय समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पाए और मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि आवंटन पत्र की शर्त संख्या–5 के अनुसार यदि 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं दिया जाता, तो आवंटी को नियमानुसार ब्याज दिया जाना चाहिए। बावजूद इसके प्राधिकरण द्वारा स्वतः ब्याज भुगतान की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई जिसके चलते शिकायतकर्ता को आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम के तहत आयोग ने एचएसवीपी को 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ किया कि यह राशि पहले प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी और बाद में जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों से वसूली की जा सकती है।
आयोग ने भविष्य के लिए सख्त संदेश देते हुए निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्लॉट को नीलामी प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। साथ ही मुख्य प्रशासक एचएसवीपी से संबंधित फाइल की मूल नोटिंग शीट और एस्टेट ऑफिसर फरीदाबाद से अधिकारियों का विवरण मांगा गया है ताकि ऐसी लापरवाहियों पर रोक लगाई जा सके।
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फरीदाबाद। फरीदाबाद में प्लॉटों की ई-नीलामी से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है जिसमें हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिना पूरे विकास कार्यों के किसी भी प्लॉट को ई-नीलामी में शामिल करना आवंटियों के साथ अन्याय है।
आयोग के अनुसार 24 नवंबर 2023 को आवंटन पत्र जारी कर कब्जा प्रस्तावित कर दिया गया जबकि मौके पर सड़क, सीवर, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्य अधूरे थे। इससे आवंटी तय समय में निर्माण कार्य शुरू नहीं कर पाए और मानसिक व आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी।
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आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि आवंटन पत्र की शर्त संख्या–5 के अनुसार यदि 30 दिनों के भीतर कब्जा नहीं दिया जाता, तो आवंटी को नियमानुसार ब्याज दिया जाना चाहिए। बावजूद इसके प्राधिकरण द्वारा स्वतः ब्याज भुगतान की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई जिसके चलते शिकायतकर्ता को आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हरियाणा सेवा अधिकार अधिनियम के तहत आयोग ने एचएसवीपी को 15 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने साफ किया कि यह राशि पहले प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी और बाद में जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों से वसूली की जा सकती है।
आयोग ने भविष्य के लिए सख्त संदेश देते हुए निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सुनिश्चित किए बिना किसी भी प्लॉट को नीलामी प्रक्रिया में शामिल न किया जाए। साथ ही मुख्य प्रशासक एचएसवीपी से संबंधित फाइल की मूल नोटिंग शीट और एस्टेट ऑफिसर फरीदाबाद से अधिकारियों का विवरण मांगा गया है ताकि ऐसी लापरवाहियों पर रोक लगाई जा सके।