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Faridabad News: वाहन न मिलने पर रिक्शे से ले जाना पड़ा शव
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जिला नागरिक अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल की अव्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। टीबी से पीड़ित मरीज की मृत्यु के बाद शव वाहन उपलब्ध न होने पर परिजनों को मजबूरी में शव को ठेले पर रखकर ले जाना पड़ा। संवेदनशीलता से जुड़ी इस घटना के सामने आने के बाद मामला गरमा गया है और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली व स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल में टीबी मरीजों के इलाज और मार्गदर्शन को लेकर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। मरीज जब आपातकालीन विभाग में पहुंचते हैं तो उन्हें ओपीडी भेज दिया जाता है, जबकि ओपीडी से कई बार मरीजों को दोबारा आपातकालीन विभाग की ओर भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज और उनके परिजन घंटों तक इधर-उधर भटकते रहते हैं और उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि इलाज कहां होगा।
बृहस्पतिवार को न्यू भारत कॉलोनी निवासी सुमित्रा सारन अपने बेटे कर्ण को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचीं। कर्ण को टीबी की आशंका है और वह कई दिनों से खांसी व सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित है। परिजनों का आरोप है कि आपातकालीन विभाग से उन्हें ओपीडी भेज दिया गया, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। कर्ण घंटों स्ट्रेचर पर लेटा रहा और मां-बेटा इलाज के इंतजार में इमरजेंसी के बाहर खड़े रहे। इस संबंध में टीबी अधिकारी डॉ. हरजिंदर सिंह ने कहा कि मरीजों के इलाज में कोई कमी नहीं है। यदि कहीं अव्यवस्था सामने आई है तो डॉक्टरों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल की अव्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। टीबी से पीड़ित मरीज की मृत्यु के बाद शव वाहन उपलब्ध न होने पर परिजनों को मजबूरी में शव को ठेले पर रखकर ले जाना पड़ा। संवेदनशीलता से जुड़ी इस घटना के सामने आने के बाद मामला गरमा गया है और अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली व स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल में टीबी मरीजों के इलाज और मार्गदर्शन को लेकर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। मरीज जब आपातकालीन विभाग में पहुंचते हैं तो उन्हें ओपीडी भेज दिया जाता है, जबकि ओपीडी से कई बार मरीजों को दोबारा आपातकालीन विभाग की ओर भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज और उनके परिजन घंटों तक इधर-उधर भटकते रहते हैं और उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि इलाज कहां होगा।
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बृहस्पतिवार को न्यू भारत कॉलोनी निवासी सुमित्रा सारन अपने बेटे कर्ण को लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचीं। कर्ण को टीबी की आशंका है और वह कई दिनों से खांसी व सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित है। परिजनों का आरोप है कि आपातकालीन विभाग से उन्हें ओपीडी भेज दिया गया, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। कर्ण घंटों स्ट्रेचर पर लेटा रहा और मां-बेटा इलाज के इंतजार में इमरजेंसी के बाहर खड़े रहे। इस संबंध में टीबी अधिकारी डॉ. हरजिंदर सिंह ने कहा कि मरीजों के इलाज में कोई कमी नहीं है। यदि कहीं अव्यवस्था सामने आई है तो डॉक्टरों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।