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Faridabad News: मेट्रो स्टेशनों के बाहर अतिक्रमण, फुटपाथ गायब और सड़कों पर लग रहा जाम
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स्टेशनों के बाहर रेहड़ी-पटरी, अवैध पार्किंग और बेतरतीब वाहनों से होती है यात्रियों को परेशानी, स्थायी समाधान की मांग
निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन बन चुकी मेट्रो से रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं, लेकिन फरीदाबाद के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के बाहर अतिक्रमण और अव्यवस्था यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी, दुकानदारों का सामान, अवैध पार्किंग और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचता। सुबह और शाम के पीक आवर्स में हालात और खराब हो जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बन जाती है।
बल्लभगढ़, नीलम मेट्रो, एस्कॉर्ट्स मुजेसर, बाटा चौक और ओल्ड फरीदाबाद मेट्रो स्टेशन के आसपास अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। कई जगह फुटपाथ पूरी तरह कब्जे में हैं, जिसके कारण यात्रियों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है। इससे हादसों का खतरा बढ़ने के साथ ही वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है। यात्रियों का कहना है कि पीक आवर्स में मेट्रो स्टेशन तक पहुंचना और बाहर निकलना दोनों मुश्किल हो जाता है।
बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन
बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन के बाहर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है। स्टेशन के आसपास रेहड़ी-पटरी और अस्थायी दुकानों के कारण फुटपाथ संकरे हो गए हैं। स्थानीय निवासी अमित शर्मा ने बताया कि स्टेशन से बाहर निकलते ही भीड़ और अतिक्रमण शुरू हो जाता है। पैदल चलने के लिए जगह नहीं मिलती। वहीं सीमा यादव ने बताया कि बच्चों के साथ मेट्रो तक जाना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक ओर फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा रहता है, जिस कारण तेज रफ्तार वाहनों के बीच चलना डरावना लगता है।
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नीलम और बाटा मेट्रो स्टेशन
नीलम और बाटा मेट्रो स्टेशन के आसपास दुकानों और वाहनों की बढ़ती संख्या से यातायात प्रभावित हो रहा है। पीक टाइम में यहां जाम लगना आम हो गया है। यात्री पूनम ने बताया कि मेट्रो से उतरने के बाद सड़क पार करना भी मुश्किल हो जाता है। पहले स्टेशन से मुख्य सड़क पर पहुंचने में दो से तीन मिनट लगते थे, लेकिन अब पांच से दस मिनट लग जाते हैं। फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी वालों ने कब्जा कर रखा है। आसपास बाजार क्षेत्र होने के कारण वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। कई बार सड़क किनारे खड़े वाहन और दुकानों के बाहर रखा सामान रास्ता रोक देता है।
एस्कॉर्ट्स मुजेसर स्टेशन
एस्कॉर्ट्स मुजेसर मेट्रो स्टेशन के आसपास रोजाना बड़ी संख्या में औद्योगिक कर्मचारियों और यात्रियों की आवाजाही रहती है। सुबह और शाम के समय स्टेशन के बाहर भीड़ बढ़ने के साथ ही रेहड़ी-पटरी, अवैध पार्किंग और बेतरतीब खड़े वाहनों से रास्ते संकरे हो जाते हैं। शिफ्ट बदलने के समय स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे पैदल यात्रियों को वाहनों के बीच से निकलना पड़ता है।
कार्रवाई के बाद भी दोबारा बन जाते हैं हालात
लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों ने मांग की है कि मेट्रो स्टेशनों के बाहर रेहड़ी-पटरी वालों के लिए अलग स्थान तय किया जाए, अवैध पार्किंग पर सख्ती की जाए और फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए खाली कराए जाएं।
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निधि कुशवाहा
फरीदाबाद। दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन बन चुकी मेट्रो से रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं, लेकिन फरीदाबाद के कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के बाहर अतिक्रमण और अव्यवस्था यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी, दुकानदारों का सामान, अवैध पार्किंग और सड़क किनारे खड़े वाहनों के कारण पैदल चलने वालों के लिए रास्ता तक नहीं बचता। सुबह और शाम के पीक आवर्स में हालात और खराब हो जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बन जाती है।
बल्लभगढ़, नीलम मेट्रो, एस्कॉर्ट्स मुजेसर, बाटा चौक और ओल्ड फरीदाबाद मेट्रो स्टेशन के आसपास अतिक्रमण की समस्या बनी हुई है। कई जगह फुटपाथ पूरी तरह कब्जे में हैं, जिसके कारण यात्रियों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है। इससे हादसों का खतरा बढ़ने के साथ ही वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है। यात्रियों का कहना है कि पीक आवर्स में मेट्रो स्टेशन तक पहुंचना और बाहर निकलना दोनों मुश्किल हो जाता है।
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बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन
बल्लभगढ़ मेट्रो स्टेशन के बाहर रोजाना बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही रहती है। स्टेशन के आसपास रेहड़ी-पटरी और अस्थायी दुकानों के कारण फुटपाथ संकरे हो गए हैं। स्थानीय निवासी अमित शर्मा ने बताया कि स्टेशन से बाहर निकलते ही भीड़ और अतिक्रमण शुरू हो जाता है। पैदल चलने के लिए जगह नहीं मिलती। वहीं सीमा यादव ने बताया कि बच्चों के साथ मेट्रो तक जाना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक ओर फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा रहता है, जिस कारण तेज रफ्तार वाहनों के बीच चलना डरावना लगता है।
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नीलम और बाटा मेट्रो स्टेशन
नीलम और बाटा मेट्रो स्टेशन के आसपास दुकानों और वाहनों की बढ़ती संख्या से यातायात प्रभावित हो रहा है। पीक टाइम में यहां जाम लगना आम हो गया है। यात्री पूनम ने बताया कि मेट्रो से उतरने के बाद सड़क पार करना भी मुश्किल हो जाता है। पहले स्टेशन से मुख्य सड़क पर पहुंचने में दो से तीन मिनट लगते थे, लेकिन अब पांच से दस मिनट लग जाते हैं। फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी वालों ने कब्जा कर रखा है। आसपास बाजार क्षेत्र होने के कारण वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। कई बार सड़क किनारे खड़े वाहन और दुकानों के बाहर रखा सामान रास्ता रोक देता है।
एस्कॉर्ट्स मुजेसर स्टेशन
एस्कॉर्ट्स मुजेसर मेट्रो स्टेशन के आसपास रोजाना बड़ी संख्या में औद्योगिक कर्मचारियों और यात्रियों की आवाजाही रहती है। सुबह और शाम के समय स्टेशन के बाहर भीड़ बढ़ने के साथ ही रेहड़ी-पटरी, अवैध पार्किंग और बेतरतीब खड़े वाहनों से रास्ते संकरे हो जाते हैं। शिफ्ट बदलने के समय स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे पैदल यात्रियों को वाहनों के बीच से निकलना पड़ता है।
कार्रवाई के बाद भी दोबारा बन जाते हैं हालात
लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। लोगों ने मांग की है कि मेट्रो स्टेशनों के बाहर रेहड़ी-पटरी वालों के लिए अलग स्थान तय किया जाए, अवैध पार्किंग पर सख्ती की जाए और फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए खाली कराए जाएं।