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Faridabad News: वाईएमसीए के नए कैंपस के लिए भूमि चिन्हित
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11 साल पुरानी योजना को मिली नई उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
छांयसा। जेसी बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के नए कैंपस के लिए अरुआ गांव में भूमि चिन्हित किए जाने से लंबे समय से लंबित विस्तार योजना को नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। अरुआ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने प्रस्तावित भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति दे दी है।
इसके बाद संबंधित दस्तावेज जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, अरुआ गांव में सरकार द्वारा प्रस्तावित डंपिंग स्टेशन का ग्रामीण पिछले दो वर्षों से विरोध कर रहे थे। अब उसी भूमि पर विश्वविद्यालय का नया कैंपस विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसे ग्रामीणों ने स्वीकार कर लिया। पूर्व एवं वर्तमान सरपंच ने करीब 143 एकड़ पंचायती भूमि से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को सौंप दिए हैं। वाईएमसीए के विस्तार के लिए वर्ष 2015 में गुरुग्राम रोड स्थित हनुमान मंदिर के सामने लगभग 18 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भूमि की कीमत भी जमा करा दी, लेकिन वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रक्रिया अटकने से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, जुलाई 2018 में प्रक्रिया को मंजूरी मिली थी और जनवरी 2020 में वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद भूमि विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हुई।
वर्तमान में सेक्टर-6 स्थित विश्वविद्यालय परिसर मात्र 20 एकड़ क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जबकि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नए पाठ्यक्रमों की आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त भूमि की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि अरुआ में प्रस्तावित भूमि विश्वविद्यालय को मिलती है तो भविष्य में नए कोर्स शुरू करने के साथ जिले के युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
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छांयसा। जेसी बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के नए कैंपस के लिए अरुआ गांव में भूमि चिन्हित किए जाने से लंबे समय से लंबित विस्तार योजना को नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। अरुआ ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने प्रस्तावित भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति दे दी है।
इसके बाद संबंधित दस्तावेज जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को आगामी कार्रवाई के लिए भेज दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, अरुआ गांव में सरकार द्वारा प्रस्तावित डंपिंग स्टेशन का ग्रामीण पिछले दो वर्षों से विरोध कर रहे थे। अब उसी भूमि पर विश्वविद्यालय का नया कैंपस विकसित करने का प्रस्ताव सामने आया है, जिसे ग्रामीणों ने स्वीकार कर लिया। पूर्व एवं वर्तमान सरपंच ने करीब 143 एकड़ पंचायती भूमि से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को सौंप दिए हैं। वाईएमसीए के विस्तार के लिए वर्ष 2015 में गुरुग्राम रोड स्थित हनुमान मंदिर के सामने लगभग 18 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भूमि की कीमत भी जमा करा दी, लेकिन वन विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रक्रिया अटकने से परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, जुलाई 2018 में प्रक्रिया को मंजूरी मिली थी और जनवरी 2020 में वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद भूमि विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हुई।
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वर्तमान में सेक्टर-6 स्थित विश्वविद्यालय परिसर मात्र 20 एकड़ क्षेत्र में संचालित हो रहा है, जबकि विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और नए पाठ्यक्रमों की आवश्यकता को देखते हुए अतिरिक्त भूमि की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि अरुआ में प्रस्तावित भूमि विश्वविद्यालय को मिलती है तो भविष्य में नए कोर्स शुरू करने के साथ जिले के युवाओं को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।