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Faridabad News: सोशल मीडिया के मोह में गुम हो रहा मानसिक सुकून
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बचपन पर भारी पड़ रहा डिजिटल बोझ...रोजाना 4 से 6 छात्र पहुंच रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली और बढ़ते डिजिटल दबाव के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में जिला नागरिक अस्पताल में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पहुंच रहे हैं, जिन्हें याददाश्त कमजोर होने और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है।
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल सिंह का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 4 से 6 विद्यार्थी ऐसे आ रहे हैं, जो पढ़ाई पर फोकस की कमी, भूलने की समस्या और सोशल मीडिया की लत से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और इसके पीछे कई सामाजिक व पारिवारिक कारण जिम्मेदार हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी एक प्रमुख कारण बनकर उभर रहा है। बच्चे अक्सर खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे उनमें हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी विकसित हो सकती है। इसके अलावा, गलत या नकारात्मक जानकारी भी उनके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है।
परिवार व स्कूल का माहौल भी डाल रहा असर
डॉ. पारुल सिंह ने बताया कि आज के समय में बच्चों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां बच्चे खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों में अधिक समय बिताते थे, वहीं अब उनका अधिकांश समय मोबाइल और इंटरनेट पर बीत रहा है। इससे न केवल उनकी एकाग्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर परिवार और स्कूल का माहौल भी गहरा असर डालता है। यदि घर में तनावपूर्ण वातावरण हो या बच्चों की बात सुने बिना उन्हें डांटा जाए, तो इससे उनमें डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। वहीं, स्कूलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंकों का दबाव भी बच्चों में तनाव और असफलता का भय बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना, उनका स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना और सकारात्मक व सहयोगी माहौल देना आवश्यक है, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली और बढ़ते डिजिटल दबाव के बीच छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में जिला नागरिक अस्पताल में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र पहुंच रहे हैं, जिन्हें याददाश्त कमजोर होने और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है।
जिला नागरिक अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल सिंह का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन करीब 4 से 6 विद्यार्थी ऐसे आ रहे हैं, जो पढ़ाई पर फोकस की कमी, भूलने की समस्या और सोशल मीडिया की लत से परेशान हैं। उन्होंने बताया कि यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और इसके पीछे कई सामाजिक व पारिवारिक कारण जिम्मेदार हैं।
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डॉ. सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग भी एक प्रमुख कारण बनकर उभर रहा है। बच्चे अक्सर खुद की तुलना दूसरों से करने लगते हैं, जिससे उनमें हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी विकसित हो सकती है। इसके अलावा, गलत या नकारात्मक जानकारी भी उनके मानसिक संतुलन को प्रभावित करती है।
परिवार व स्कूल का माहौल भी डाल रहा असर
डॉ. पारुल सिंह ने बताया कि आज के समय में बच्चों की दिनचर्या में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां बच्चे खेलकूद और सामाजिक गतिविधियों में अधिक समय बिताते थे, वहीं अब उनका अधिकांश समय मोबाइल और इंटरनेट पर बीत रहा है। इससे न केवल उनकी एकाग्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर परिवार और स्कूल का माहौल भी गहरा असर डालता है। यदि घर में तनावपूर्ण वातावरण हो या बच्चों की बात सुने बिना उन्हें डांटा जाए, तो इससे उनमें डर और असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। वहीं, स्कूलों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंकों का दबाव भी बच्चों में तनाव और असफलता का भय बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों के साथ संवाद बनाए रखना, उनका स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना और सकारात्मक व सहयोगी माहौल देना आवश्यक है, ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रहकर अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।