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Faridabad News: फ्लायर ठप पड़े हैं आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल, सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले में सड़क सुरक्षा और आधुनिक यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा किए गए प्रयास जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। नूंह जिला मुख्यालय के दो प्रमुख और अत्यंत व्यस्त चौराहों पलवल टी-पॉइंट और अड़बर चौक पर लगाए गए आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम पिछले करीब दस दिनों से बंद पड़े हैं। नतीजतन यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
तत्कालीन उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के प्रयासों से करीब छह माह पहले इन चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल स्थापित किए गए थे, ताकि बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके और सड़क हादसों में कमी लाई जा सके। पलवल टी-पॉइंट पर 19 जुलाई 2025 को 14 लाख 38 हजार 308 रुपये की लागत से ट्रैफिक लाइट सिस्टम लगाया गया था। इस परियोजना में ट्रैफिक लाइट्स की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और संचालन शामिल था। इसी प्रकार अड़बर चौक पर 13 लाख 32 हजार 278 रुपये की लागत से सोलर पावर्ड हाइब्रिड ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया गया। नगरीय स्थानीय निकाय विभाग द्वारा संचालित इस स्मार्ट सिग्नल का उद्देश्य बिजली की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। यह व्यवस्था ट्रैफिक संचालन को सुगम बनाने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो सकती थी।
लेकिन नूंह शहर थाना पुलिस, यातायात पुलिस और नगरपरिषद की उदासीनता के चलते दोनों सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन सिग्नलों की मरम्मत या संचालन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। ऐसे में वाहन चालक मनमाने तरीके से चौराहों को पार कर रहे हैं, जिससे आए दिन टकराव की स्थिति बनती है। कई बार आड़े-तिरछे खड़े वाहनों के कारण एनएच-248ए और होड़ल-पाटौदा स्टेट हाईवे पर लंबा जाम लग जाता है, जिससे राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
अड़बर चौक पर पुलिस पोस्ट होने के बावजूद यातायात नियंत्रण प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में सक्रियता नहीं दिखाते, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि व्यवस्था समझदारी से संचालित न हो तो ऐसे प्रयासों का कोई लाभ नहीं रह जाता।
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खेड़ला मोड़ व मेडिकल कॉलेज मोड़ पर नहीं लगीं लाइटें
नगरपरिषद व जिला प्रशासन की लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं होता। योजना के तहत चार चौराहों पलवल टी-पॉइंट, अड़बर चौक, खेड़ला मोड़ और मेडिकल कॉलेज मोड़ पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि पलवल टी-पॉइंट और अड़बर चौक पर तो सिग्नल लगाए गए, लेकिन खेड़ला मोड़ और मेडिकल कॉलेज मोड़ पर अभी तक सिग्नल लाइटें नहीं लग पाई हैं, जिससे इन स्थानों पर भी यातायात अव्यवस्थित बना हुआ है।
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वर्जन
सिग्नल लाइट खराब होने की शिकायत संबंधित एजेंसी को दे दी गई है और जल्द ही इन्हें दुरुस्त करा दिया जाएगा। वहीं स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सिग्नलों को शीघ्र चालू कर यातायात व्यवस्था सुचारू बनाई जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और लोगों को राहत मिल सके।
संजय मनोचा, चेयरमैन, नूंह नगरपरिषद
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नूंह। जिले में सड़क सुरक्षा और आधुनिक यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा किए गए प्रयास जिम्मेदार विभागों की लापरवाही के कारण दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। नूंह जिला मुख्यालय के दो प्रमुख और अत्यंत व्यस्त चौराहों पलवल टी-पॉइंट और अड़बर चौक पर लगाए गए आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम पिछले करीब दस दिनों से बंद पड़े हैं। नतीजतन यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
तत्कालीन उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा के प्रयासों से करीब छह माह पहले इन चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल स्थापित किए गए थे, ताकि बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके और सड़क हादसों में कमी लाई जा सके। पलवल टी-पॉइंट पर 19 जुलाई 2025 को 14 लाख 38 हजार 308 रुपये की लागत से ट्रैफिक लाइट सिस्टम लगाया गया था। इस परियोजना में ट्रैफिक लाइट्स की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और संचालन शामिल था। इसी प्रकार अड़बर चौक पर 13 लाख 32 हजार 278 रुपये की लागत से सोलर पावर्ड हाइब्रिड ट्रैफिक सिग्नल कंट्रोल सिस्टम स्थापित किया गया। नगरीय स्थानीय निकाय विभाग द्वारा संचालित इस स्मार्ट सिग्नल का उद्देश्य बिजली की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना था। यह व्यवस्था ट्रैफिक संचालन को सुगम बनाने और दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने में कारगर साबित हो सकती थी।
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लेकिन नूंह शहर थाना पुलिस, यातायात पुलिस और नगरपरिषद की उदासीनता के चलते दोनों सिग्नल लंबे समय से बंद पड़े हैं। इन सिग्नलों की मरम्मत या संचालन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई है। ऐसे में वाहन चालक मनमाने तरीके से चौराहों को पार कर रहे हैं, जिससे आए दिन टकराव की स्थिति बनती है। कई बार आड़े-तिरछे खड़े वाहनों के कारण एनएच-248ए और होड़ल-पाटौदा स्टेट हाईवे पर लंबा जाम लग जाता है, जिससे राहगीरों और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप
अड़बर चौक पर पुलिस पोस्ट होने के बावजूद यातायात नियंत्रण प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में सक्रियता नहीं दिखाते, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि व्यवस्था समझदारी से संचालित न हो तो ऐसे प्रयासों का कोई लाभ नहीं रह जाता।
खेड़ला मोड़ व मेडिकल कॉलेज मोड़ पर नहीं लगीं लाइटें
नगरपरिषद व जिला प्रशासन की लापरवाही का आलम यहीं खत्म नहीं होता। योजना के तहत चार चौराहों पलवल टी-पॉइंट, अड़बर चौक, खेड़ला मोड़ और मेडिकल कॉलेज मोड़ पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि पलवल टी-पॉइंट और अड़बर चौक पर तो सिग्नल लगाए गए, लेकिन खेड़ला मोड़ और मेडिकल कॉलेज मोड़ पर अभी तक सिग्नल लाइटें नहीं लग पाई हैं, जिससे इन स्थानों पर भी यातायात अव्यवस्थित बना हुआ है।
वर्जन
सिग्नल लाइट खराब होने की शिकायत संबंधित एजेंसी को दे दी गई है और जल्द ही इन्हें दुरुस्त करा दिया जाएगा। वहीं स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सिग्नलों को शीघ्र चालू कर यातायात व्यवस्था सुचारू बनाई जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लग सके और लोगों को राहत मिल सके।
संजय मनोचा, चेयरमैन, नूंह नगरपरिषद
