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Faridabad News: नए शोध से टीबी के बेहतर इलाज की जगी उम्मीद
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टीएचएसटीआई के वैज्ञानिकों को मिली सफलता, बनाई जा सकती हैं अत्यधिक प्रभावशाली दवाएं
नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। तपेदिक (टीबी) के इलाज को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। नए शोध में टीबी के बैक्टीरिया की एक अहम कमजोर कड़ी की पहचान की गई है, जिससे भविष्य में अधिक असरदार दवाएं विकसित करने की उम्मीद जगी है।
जिले में स्थित ट्रांसलेशन स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में बैक्टीरिया की कार्यप्रणाली को गहराई से समझा गया। शोध में सामने आया कि बैक्टीरिया के अंदर मौजूद कुछ विशेष सिस्टम- सेक, टैट और ईएसएक्स, उसके जीवित रहने और शरीर में फैलने में अहम भूमिका निभाते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार ये सिस्टम बैक्टीरिया के भीतर प्रोटीन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और उसकी बाहरी संरचना को मजबूत बनाए रखने का काम करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, ये सिस्टम बैक्टीरिया की सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था की तरह कार्य करते हैं। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के 92 महत्वपूर्ण घटकों और 198 जैविक प्रक्रियाओं का विस्तृत नक्शा तैयार किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बैक्टीरिया किन तंत्रों पर सबसे अधिक निर्भर करता है। आधुनिक तकनीक सीआरआईसीपीआर आई का उपयोग करते हुए सेक ए1 और टैट एसी प्रोटीन को कमजोर किया गया। इसके परिणामस्वरूप बैक्टीरिया की वृद्धि धीमी हो गई और उसकी जीवित रहने की क्षमता में कमी आई। साथ ही, उसकी बाहरी झिल्ली भी कमजोर हो गई, जिससे उसमें लीकेज की स्थिति उत्पन्न हुई और बाहरी हानिकारक तत्वों के प्रवेश की संभावना बढ़ गई। इसके अलावा बैक्टीरिया की संरचना और आकार में भी असामान्य बदलाव देखे गए, जो उसके कमजोर होने का संकेत हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इन आवश्यक प्रोटीन सिस्टम को लक्षित किया जाए, तो टीबी बैक्टीरिया को प्रभावी ढंग से कमजोर किया जा सकता है। इससे भविष्य में ऐसी नई दवाएं विकसित की जा सकती हैं, जो बीमारी को तेजी से खत्म करने में सक्षम होंगी।
शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि यह खोज टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक मजबूत आधार साबित होगी और उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। तपेदिक (टीबी) के इलाज को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। नए शोध में टीबी के बैक्टीरिया की एक अहम कमजोर कड़ी की पहचान की गई है, जिससे भविष्य में अधिक असरदार दवाएं विकसित करने की उम्मीद जगी है।
जिले में स्थित ट्रांसलेशन स्वास्थ्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में बैक्टीरिया की कार्यप्रणाली को गहराई से समझा गया। शोध में सामने आया कि बैक्टीरिया के अंदर मौजूद कुछ विशेष सिस्टम- सेक, टैट और ईएसएक्स, उसके जीवित रहने और शरीर में फैलने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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वैज्ञानिकों के अनुसार ये सिस्टम बैक्टीरिया के भीतर प्रोटीन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और उसकी बाहरी संरचना को मजबूत बनाए रखने का काम करते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, ये सिस्टम बैक्टीरिया की सुरक्षा और आपूर्ति व्यवस्था की तरह कार्य करते हैं। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने बैक्टीरिया के 92 महत्वपूर्ण घटकों और 198 जैविक प्रक्रियाओं का विस्तृत नक्शा तैयार किया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बैक्टीरिया किन तंत्रों पर सबसे अधिक निर्भर करता है। आधुनिक तकनीक सीआरआईसीपीआर आई का उपयोग करते हुए सेक ए1 और टैट एसी प्रोटीन को कमजोर किया गया। इसके परिणामस्वरूप बैक्टीरिया की वृद्धि धीमी हो गई और उसकी जीवित रहने की क्षमता में कमी आई। साथ ही, उसकी बाहरी झिल्ली भी कमजोर हो गई, जिससे उसमें लीकेज की स्थिति उत्पन्न हुई और बाहरी हानिकारक तत्वों के प्रवेश की संभावना बढ़ गई। इसके अलावा बैक्टीरिया की संरचना और आकार में भी असामान्य बदलाव देखे गए, जो उसके कमजोर होने का संकेत हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इन आवश्यक प्रोटीन सिस्टम को लक्षित किया जाए, तो टीबी बैक्टीरिया को प्रभावी ढंग से कमजोर किया जा सकता है। इससे भविष्य में ऐसी नई दवाएं विकसित की जा सकती हैं, जो बीमारी को तेजी से खत्म करने में सक्षम होंगी।
शोधकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि यह खोज टीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक मजबूत आधार साबित होगी और उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।