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Faridabad News: अब हर नल से बरसेगा शुद्ध जल, नगर निगम ने तैयार की एसओपी
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वार्ड 46 से पायलट प्रोजेक्ट का होगा आगाज, प्रत्येक ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी की वैज्ञानिक जांच अनिवार्य
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की प्यास बुझाने वाले ट्यूबवेल अब सीधे नगर निगम की निगरानी में रहेंगे। फरीदाबाद नगर निगम ने शहरवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक और नीतिगत फैसला लिया है।
अब तक शहर में पानी की गुणवत्ता की जांच केवल शिकायतों या विशेष परिस्थितियों में ही की जाती है लेकिन अब निगम ने एक सख्त एसओपी तैयार की है। इस नई नीति के तहत शहर के प्रत्येक ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी की वैज्ञानिक जांच अनिवार्य कर दी गई है। इस मिशन की शुरुआत वार्ड नंबर 46 से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे शहर के 1500 से अधिक ट्यूबवेलों पर लागू किया जाएगा। नगर निगम द्वारा तैयार की गई नई एसओपी का मुख्य उद्देश्य पानी की जांच प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। इस कार्यप्रणाली के तहत पानी के नमूने लेने के लिए एक विशेष समय सारिणी निर्धारित की गई है जिसमें नमूना संग्रह से लेकर लैब तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि एक बार जब पानी की गुणवत्ता का डेटाबेस तैयार हो जाएगा तो अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आसान होगा। यदि किसी ट्यूबवेल का पानी मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे तुरंत प्रभाव से बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
प्रशासन ने रणनीतिक रूप से वार्ड संख्या 46 को इस मुहिम के पहले पड़ाव के रूप में चुना है। बल्लभगढ़ डिवीजन का यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है और यहां लंबे समय से पानी के खारेपन और टीडीएस के असंतुलन की शिकायतें आती रही हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत क्षेत्र के सभी सरकारी ट्यूबवेलों की मैपिंग कर ली गई है। विशेषज्ञों की विशेष टीम इन स्रोतों से पानी के फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल नमूने लेगी। इस जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन के भीतर पानी की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या वह इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
1500 ट्यूबवेलों की होगी स्कैनिंग, बीमारियों पर लगेगी लगाम
इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता फरीदाबाद के भविष्य के जल प्रबंधन की दिशा तय करेगी। वर्तमान में फरीदाबाद में 1500 से अधिक सरकारी ट्यूबवेल संचालित हैं जो लाखों लोगों की प्यास बुझाते हैं। अक्सर देखा गया है कि पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज या सीवर के पानी के रिसाव के कारण शुद्ध पानी भी दूषित हो जाता है। इस व्यापक टेस्टिंग अभियान से हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी जल-जनित बीमारियों के स्रोत को जड़ से पकड़ने में मदद मिलेगी। नगर निगम का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर ट्यूबवेल का अपना एक हेल्थ कार्ड हो जिसे देखकर आम जनता भी यह आश्वस्त हो सके कि उनके घर आ रहा पानी शुद्ध है।
जांच के साथ समाधान तक होगा काम
निगम की तरफ से यह पहल प्रयोगशाला की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहने वाली है बल्कि यह भविष्य के लिए एक ठोस समाधान की नींव रखेगी। अगले 6 महीनों के भीतर जब सभी ट्यूबवेलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो जाएगी तो निगम के पास एक ऐसा डिजिटल वाटर मैप होगा जिससे भविष्य की योजनाओं को सटीक बनाया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर जिन इलाकों में पानी में फ्लोराइड या अन्य रसायनों की मात्रा अधिक पाई जाएगी वहां तत्काल प्रभाव से नए फिल्ट्रेशन प्लांट या वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा डेटा के आधार पर पुराने और जर्जर पाइपों को बदलने के कार्य को भी प्राथमिकता दी जाएगी जिससे संसाधनों का सही दिशा में उपयोग हो सके।
तय होगी जिम्मेदारों की जवाबदेही
नगर निगम अधिकारियों ने इस कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग का जोर इस बात पर है कि गर्मियों के मुख्य सीजन के शुरू होने से पहले अधिकांश वार्डों की डेटा रिपोर्ट तैयार हो जानी चाहिए ताकि पानी की किल्लत और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का पहले ही समाधान किया जा सके। स्थानीय पार्षदों और निवासियों ने भी सरकार के इस दूरदर्शी फैसले का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि अगर निगम इस एसओपी को सख्ती से लागू करता है तो यह बल्लभगढ़ और पूरे फरीदाबाद के नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
वर्जन
निगम की तरफ से सभी ट्यूबवेल के पानी की जांच के लिए एसओपी बनाई जा रही है। जल्द इसका काम शुरू कर दिया जाएगा। -हरीश, कार्यकारी अभियंता नगर निगम
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मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। शहर की प्यास बुझाने वाले ट्यूबवेल अब सीधे नगर निगम की निगरानी में रहेंगे। फरीदाबाद नगर निगम ने शहरवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक ऐतिहासिक और नीतिगत फैसला लिया है।
अब तक शहर में पानी की गुणवत्ता की जांच केवल शिकायतों या विशेष परिस्थितियों में ही की जाती है लेकिन अब निगम ने एक सख्त एसओपी तैयार की है। इस नई नीति के तहत शहर के प्रत्येक ट्यूबवेल से निकलने वाले पानी की वैज्ञानिक जांच अनिवार्य कर दी गई है। इस मिशन की शुरुआत वार्ड नंबर 46 से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है, जिसकी सफलता के बाद इसे पूरे शहर के 1500 से अधिक ट्यूबवेलों पर लागू किया जाएगा। नगर निगम द्वारा तैयार की गई नई एसओपी का मुख्य उद्देश्य पानी की जांच प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और पारदर्शिता को बढ़ाना है। इस कार्यप्रणाली के तहत पानी के नमूने लेने के लिए एक विशेष समय सारिणी निर्धारित की गई है जिसमें नमूना संग्रह से लेकर लैब तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि एक बार जब पानी की गुणवत्ता का डेटाबेस तैयार हो जाएगा तो अधिकारियों की जवाबदेही तय करना आसान होगा। यदि किसी ट्यूबवेल का पानी मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे तुरंत प्रभाव से बंद कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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प्रशासन ने रणनीतिक रूप से वार्ड संख्या 46 को इस मुहिम के पहले पड़ाव के रूप में चुना है। बल्लभगढ़ डिवीजन का यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है और यहां लंबे समय से पानी के खारेपन और टीडीएस के असंतुलन की शिकायतें आती रही हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत क्षेत्र के सभी सरकारी ट्यूबवेलों की मैपिंग कर ली गई है। विशेषज्ञों की विशेष टीम इन स्रोतों से पानी के फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल नमूने लेगी। इस जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन के भीतर पानी की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या वह इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
1500 ट्यूबवेलों की होगी स्कैनिंग, बीमारियों पर लगेगी लगाम
इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता फरीदाबाद के भविष्य के जल प्रबंधन की दिशा तय करेगी। वर्तमान में फरीदाबाद में 1500 से अधिक सरकारी ट्यूबवेल संचालित हैं जो लाखों लोगों की प्यास बुझाते हैं। अक्सर देखा गया है कि पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज या सीवर के पानी के रिसाव के कारण शुद्ध पानी भी दूषित हो जाता है। इस व्यापक टेस्टिंग अभियान से हैजा, टाइफाइड और पीलिया जैसी जल-जनित बीमारियों के स्रोत को जड़ से पकड़ने में मदद मिलेगी। नगर निगम का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर ट्यूबवेल का अपना एक हेल्थ कार्ड हो जिसे देखकर आम जनता भी यह आश्वस्त हो सके कि उनके घर आ रहा पानी शुद्ध है।
जांच के साथ समाधान तक होगा काम
निगम की तरफ से यह पहल प्रयोगशाला की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहने वाली है बल्कि यह भविष्य के लिए एक ठोस समाधान की नींव रखेगी। अगले 6 महीनों के भीतर जब सभी ट्यूबवेलों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो जाएगी तो निगम के पास एक ऐसा डिजिटल वाटर मैप होगा जिससे भविष्य की योजनाओं को सटीक बनाया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर जिन इलाकों में पानी में फ्लोराइड या अन्य रसायनों की मात्रा अधिक पाई जाएगी वहां तत्काल प्रभाव से नए फिल्ट्रेशन प्लांट या वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा डेटा के आधार पर पुराने और जर्जर पाइपों को बदलने के कार्य को भी प्राथमिकता दी जाएगी जिससे संसाधनों का सही दिशा में उपयोग हो सके।
तय होगी जिम्मेदारों की जवाबदेही
नगर निगम अधिकारियों ने इस कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं। विभाग का जोर इस बात पर है कि गर्मियों के मुख्य सीजन के शुरू होने से पहले अधिकांश वार्डों की डेटा रिपोर्ट तैयार हो जानी चाहिए ताकि पानी की किल्लत और गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का पहले ही समाधान किया जा सके। स्थानीय पार्षदों और निवासियों ने भी सरकार के इस दूरदर्शी फैसले का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि अगर निगम इस एसओपी को सख्ती से लागू करता है तो यह बल्लभगढ़ और पूरे फरीदाबाद के नागरिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
वर्जन
निगम की तरफ से सभी ट्यूबवेल के पानी की जांच के लिए एसओपी बनाई जा रही है। जल्द इसका काम शुरू कर दिया जाएगा। -हरीश, कार्यकारी अभियंता नगर निगम