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Faridabad News: एसजीएफआई के खेलों में सिर्फ डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र ही होगा मान्य
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पारदर्शित बढ़ाने के लिए खेल विभाग ने लिया फैसला, जल्द लागू हो सकता है
गौरव मिश्रा
फरीदाबाद। आगामी नए खेल सत्र से स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के खेलों में बड़ा बदलाव किया गया है। खेल मैदानों पर उम्र में धोखाधड़ी रोकने के लिए अब ऑफलाइन जन्म प्रमाण पत्र की जगह केवल डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। जिला अधिकारियों के अनुसार, जिन खिलाड़ियों के पास डिजिटल सर्टिफिकेट होगा, उन्हें ही ब्लॉक स्तर के बाद जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। अधिकारियों का मानना है कि ऑफलाइन प्रमाण पत्रों की फोटोकॉपी में हेरफेर करके अक्सर बड़ी उम्र के खिलाड़ी छोटे आयु वर्ग (अंडर-14, 17 या 19) में खेल जाते थे। इससे असली और हकदार खिलाड़ियों का मौका छिन जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। फैसले पर जल्द मुहर लग सकती है।
खेल अधिकारियों का कहना है कि इसकी तैयारियां की जा रही हैं। इस फैसले को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। वहीं, खिलाड़ी भी इस फैसले से उत्साहित हैं। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से खिलाड़ियों का उत्साह भी बढ़ेगा और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।
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यह बहुत अच्छा फैसला है। कई बार हमसे ज्यादा उम्र के लड़के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर रेस में जीत जाते थे, अब हमें बराबरी का मौका मिलेगा। दक्ष, एथलेटिक्स खिलाड़ी
डिजिटल सर्टिफिकेट अनिवार्य होने से अब कोई कागजों में हेरफेर नहीं कर पाएगा। हम जैसे ईमानदार खिलाड़ियों के लिए यह व्यवस्था बेहद सुरक्षित और सही है। लविश, कबड्डी खिलाड़ी
शुरुआत में दौड़-भाग करके बनवाने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन भविष्य के लिए यह सही है। अब मैदान पर केवल असली प्रतिभा की ही जीत होगी, धोखेबाजों की नहीं। सचिन, एथलेटिक्स खिलाड़ी
इस नियम से चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। फर्जीवाड़ा रुकेगा और जो खिलाड़ी सच में उस आयुवर्ग का है, उसे ही आगे बढ़ने का सही मौका मिलेगा। हम पूरी कोशिश कर रहें हैं कि सही खिलाड़ियों को मंच मिल सके। -प्रेम शर्मा, जिला सहायक खेल शिक्षा अधिकारी
गौरव मिश्रा
फरीदाबाद। आगामी नए खेल सत्र से स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) के खेलों में बड़ा बदलाव किया गया है। खेल मैदानों पर उम्र में धोखाधड़ी रोकने के लिए अब ऑफलाइन जन्म प्रमाण पत्र की जगह केवल डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। जिला अधिकारियों के अनुसार, जिन खिलाड़ियों के पास डिजिटल सर्टिफिकेट होगा, उन्हें ही ब्लॉक स्तर के बाद जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। अधिकारियों का मानना है कि ऑफलाइन प्रमाण पत्रों की फोटोकॉपी में हेरफेर करके अक्सर बड़ी उम्र के खिलाड़ी छोटे आयु वर्ग (अंडर-14, 17 या 19) में खेल जाते थे। इससे असली और हकदार खिलाड़ियों का मौका छिन जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। फैसले पर जल्द मुहर लग सकती है।
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खेल अधिकारियों का कहना है कि इसकी तैयारियां की जा रही हैं। इस फैसले को जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। वहीं, खिलाड़ी भी इस फैसले से उत्साहित हैं। उनका कहना है कि ऐसे फैसलों से खिलाड़ियों का उत्साह भी बढ़ेगा और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।
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यह बहुत अच्छा फैसला है। कई बार हमसे ज्यादा उम्र के लड़के फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर रेस में जीत जाते थे, अब हमें बराबरी का मौका मिलेगा। दक्ष, एथलेटिक्स खिलाड़ी
डिजिटल सर्टिफिकेट अनिवार्य होने से अब कोई कागजों में हेरफेर नहीं कर पाएगा। हम जैसे ईमानदार खिलाड़ियों के लिए यह व्यवस्था बेहद सुरक्षित और सही है। लविश, कबड्डी खिलाड़ी
शुरुआत में दौड़-भाग करके बनवाने में थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन भविष्य के लिए यह सही है। अब मैदान पर केवल असली प्रतिभा की ही जीत होगी, धोखेबाजों की नहीं। सचिन, एथलेटिक्स खिलाड़ी
इस नियम से चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी। फर्जीवाड़ा रुकेगा और जो खिलाड़ी सच में उस आयुवर्ग का है, उसे ही आगे बढ़ने का सही मौका मिलेगा। हम पूरी कोशिश कर रहें हैं कि सही खिलाड़ियों को मंच मिल सके। -प्रेम शर्मा, जिला सहायक खेल शिक्षा अधिकारी