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Faridabad News: जिले में सार्वजनिक परिवहन बदहाल, मेट्रो से शहर तक पहुंचना बना चुनौती
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ऑटो रिक्शा चालक उठा रहे फायदा, वसूलते हैं मनमाना किराया
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बदहाली आम यात्रियों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन गई है। मेट्रो स्टेशन से शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचने के लिए बस या किसी संगठित सार्वजनिक परिवहन की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसका सीधा फायदा ऑटो रिक्शा चालक उठा रहे हैं। तय मानकों की अनदेखी करते हुए वे यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यातायात नियमों का भी खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं।
विशेष रूप से सराय मेट्रो स्टेशन से लेकर एनएचपीसी चौक होते हुए दिल्ली मेट्रो की वायलेट लाइन के अंतिम स्टेशन राजा नहर सिंह तक स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस पूरे रूट पर मेट्रो से उतरने वाले यात्रियों को आगे जाने के लिए मजबूरी में ऑटोरिक्शा या निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां न तो नियमित सिटी बसें उपलब्ध हैं और न ही कोई सुव्यवस्थित फीडर सेवा।
नीलम चौक अजरौंदा मेट्रो स्टेशन से एनआईटी और शहर के अन्य प्रमुख इलाकों तक भी सार्वजनिक परिवहन की भारी कमी है। यहां से निकलने वाले यात्रियों को ऑटो चालकों द्वारा तय किए गए मनमाने किराए चुकाने पड़ते हैं। कई यात्रियों का कहना है कि किराया तय मीटर या सरकारी दरों से कहीं अधिक वसूला जाता है, लेकिन मजबूरी में उन्हें भुगतान करना पड़ता है।
यात्री यह भी आरोप लगा रहे हैं कि अधिकांश ऑटोरिक्शा चालक न तो निर्धारित यूनिफॉर्म पहनते हैं और न ही उनके पास सही पहचान पत्र या परमिट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि अगर मेट्रो स्टेशनों से विभिन्न सेक्टरों, एनआईटी, औद्योगिक क्षेत्रों और आवासीय इलाकों तक नियमित बस या फीडर सेवा शुरू कर दी जाए तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही ऑटोरिक्शा चालकों पर सख्त निगरानी और तय किराया दरों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
ऑफिस जाने के लिए मेट्रो से उतरने के बाद ऑटो चालकों से बहस करनी पड़ती है। चालक तय किराए से दोगुना तक मांगते हैं और मना करने पर सीधे मना कर देते हैं। इससे समय बर्बाद होता है। सरकार को बस सेवा शुरू करनी चाहिए ताकि रिक्शा चालकों की मनमानी बंद हो।-दीप्ति, एसजीएम नगर
सार्वजनिक बस सेवा नहीं होने के कारण रोज मजबूरी में महंगे ऑटो लेने पड़ते हैं। कई बार ऑटो चालक अकेली महिला देखकर ज्यादा किराया मांगते हैं।-सुषमा, सेक्टर तीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की बदहाली आम यात्रियों के लिए रोजमर्रा की परेशानी बन गई है। मेट्रो स्टेशन से शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचने के लिए बस या किसी संगठित सार्वजनिक परिवहन की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसका सीधा फायदा ऑटो रिक्शा चालक उठा रहे हैं। तय मानकों की अनदेखी करते हुए वे यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यातायात नियमों का भी खुलकर उल्लंघन कर रहे हैं।
विशेष रूप से सराय मेट्रो स्टेशन से लेकर एनएचपीसी चौक होते हुए दिल्ली मेट्रो की वायलेट लाइन के अंतिम स्टेशन राजा नहर सिंह तक स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस पूरे रूट पर मेट्रो से उतरने वाले यात्रियों को आगे जाने के लिए मजबूरी में ऑटोरिक्शा या निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां न तो नियमित सिटी बसें उपलब्ध हैं और न ही कोई सुव्यवस्थित फीडर सेवा।
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नीलम चौक अजरौंदा मेट्रो स्टेशन से एनआईटी और शहर के अन्य प्रमुख इलाकों तक भी सार्वजनिक परिवहन की भारी कमी है। यहां से निकलने वाले यात्रियों को ऑटो चालकों द्वारा तय किए गए मनमाने किराए चुकाने पड़ते हैं। कई यात्रियों का कहना है कि किराया तय मीटर या सरकारी दरों से कहीं अधिक वसूला जाता है, लेकिन मजबूरी में उन्हें भुगतान करना पड़ता है।
यात्री यह भी आरोप लगा रहे हैं कि अधिकांश ऑटोरिक्शा चालक न तो निर्धारित यूनिफॉर्म पहनते हैं और न ही उनके पास सही पहचान पत्र या परमिट स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शहरवासियों का कहना है कि अगर मेट्रो स्टेशनों से विभिन्न सेक्टरों, एनआईटी, औद्योगिक क्षेत्रों और आवासीय इलाकों तक नियमित बस या फीडर सेवा शुरू कर दी जाए तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही ऑटोरिक्शा चालकों पर सख्त निगरानी और तय किराया दरों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
ऑफिस जाने के लिए मेट्रो से उतरने के बाद ऑटो चालकों से बहस करनी पड़ती है। चालक तय किराए से दोगुना तक मांगते हैं और मना करने पर सीधे मना कर देते हैं। इससे समय बर्बाद होता है। सरकार को बस सेवा शुरू करनी चाहिए ताकि रिक्शा चालकों की मनमानी बंद हो।-दीप्ति, एसजीएम नगर
सार्वजनिक बस सेवा नहीं होने के कारण रोज मजबूरी में महंगे ऑटो लेने पड़ते हैं। कई बार ऑटो चालक अकेली महिला देखकर ज्यादा किराया मांगते हैं।-सुषमा, सेक्टर तीन