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Faridabad News: आईएमटी की कंपनी में नकली प्रोपिलीन ग्लाइकोल बनाने का भंडाफोड़, 42 ड्रम जब्त
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एफडीए की छापेमारी में इंडस्ट्रियल ग्रेड केमिकल को फार्मास्युटिकल ग्रेड बताकर बेचने का खुलासा, कंपनी मैनेजर गिरफ्तार एमएम
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सदर बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र के आईएमटी सेक्टर-69 स्थित कोंकना एशिया इंग्रेडिएंट्स लिमिटेड कंपनी में हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित रूप से नकली प्रोपिलीन ग्लाइकोल तैयार करने और उसकी री-पैकिंग के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। विभाग की छापेमारी में कंपनी परिसर से प्रोपिलीन ग्लाइकोल के 42 ड्रम बरामद किए गए। कार्रवाई का नेतृत्व ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार ने किया।
एफडीए को शिकायत मिली थी कि कंपनी में चीन से आयातित इंडस्ट्रियल ग्रेड प्रोपिलीन ग्लाइकोल को नामी कंपनी के लेबल लगाकर फार्मास्युटिकल ग्रेड के रूप में बाजार में बेचा जा रहा है। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने कंपनी में छापा मारा। जांच के दौरान अधिकारियों को 42 ड्रम प्रोपिलीन ग्लाइकोल के अलावा चीन निर्मित इंडस्ट्रियल ग्रेड प्रोपिलीन ग्लाइकोल के खाली ड्रम, ट्रांसफर पंप, फर्जी सीलिंग कवर और सीलिंग वायर भी मिले। सभी सामग्री को जब्त कर लिया गया।
एफडीए अधिकारियों ने मौके से प्रोपिलीन ग्लाइकोल के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेज दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इनमें डाईएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल जैसी हानिकारक अशुद्धियां तो नहीं हैं। यदि इनकी मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई जाती है, तो ऐसे रसायनों का उपयोग दवाओं में होने पर यह लोगों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
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प्रथम दृष्टया जांच में नकली और मिलावटी दवा निर्माण से जुड़े साक्ष्य मिलने पर एफडीए ने कंपनी के मैनेजर को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अदालत में पेश किया गया है। विभाग का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद मामले में अन्य संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा यह सामग्री किन-किन कंपनियों और राज्यों में आपूर्ति की गई।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। सदर बल्लभगढ़ थाना क्षेत्र के आईएमटी सेक्टर-69 स्थित कोंकना एशिया इंग्रेडिएंट्स लिमिटेड कंपनी में हरियाणा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित रूप से नकली प्रोपिलीन ग्लाइकोल तैयार करने और उसकी री-पैकिंग के गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। विभाग की छापेमारी में कंपनी परिसर से प्रोपिलीन ग्लाइकोल के 42 ड्रम बरामद किए गए। कार्रवाई का नेतृत्व ड्रग इंस्पेक्टर प्रवीण कुमार ने किया।
एफडीए को शिकायत मिली थी कि कंपनी में चीन से आयातित इंडस्ट्रियल ग्रेड प्रोपिलीन ग्लाइकोल को नामी कंपनी के लेबल लगाकर फार्मास्युटिकल ग्रेड के रूप में बाजार में बेचा जा रहा है। शिकायत के सत्यापन के बाद टीम ने कंपनी में छापा मारा। जांच के दौरान अधिकारियों को 42 ड्रम प्रोपिलीन ग्लाइकोल के अलावा चीन निर्मित इंडस्ट्रियल ग्रेड प्रोपिलीन ग्लाइकोल के खाली ड्रम, ट्रांसफर पंप, फर्जी सीलिंग कवर और सीलिंग वायर भी मिले। सभी सामग्री को जब्त कर लिया गया।
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एफडीए अधिकारियों ने मौके से प्रोपिलीन ग्लाइकोल के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेज दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इनमें डाईएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल जैसी हानिकारक अशुद्धियां तो नहीं हैं। यदि इनकी मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई जाती है, तो ऐसे रसायनों का उपयोग दवाओं में होने पर यह लोगों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है।
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प्रथम दृष्टया जांच में नकली और मिलावटी दवा निर्माण से जुड़े साक्ष्य मिलने पर एफडीए ने कंपनी के मैनेजर को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अदालत में पेश किया गया है। विभाग का कहना है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद मामले में अन्य संबंधित धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा यह सामग्री किन-किन कंपनियों और राज्यों में आपूर्ति की गई।