{"_id":"6a8494d65edc14f2f20b0993","slug":"students-have-been-making-rounds-of-the-college-for-10-days-but-havent-secured-admission-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-77702-2026-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: 10 दिन से महाविद्यालय के चक्कर लगा रहे छात्र, नहीं मिला दाखिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: 10 दिन से महाविद्यालय के चक्कर लगा रहे छात्र, नहीं मिला दाखिला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले के आठ राजकीय महाविद्यालयों में ओपन काउंसलिंग प्रक्रिया जारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के आठ राजकीय महाविद्यालयों में ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब ओपन काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। जिले के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में सैकड़ों की संख्या में रोजाना छात्र दाखिला लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
इनमें कई छात्रों को तो 100 रुपये देरी का अतिरिक्त शुल्क देकर दाखिला मिल जा रहा है, पर कई छात्र पिछले 8-10 दिन से लगातार चक्कर लगाने के बावजूद अपना दाखिला सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं। छात्रों का कहना है कि लगातार 10 दिन से दाखिले के लिए परेशान हैं। ओपन काउंसलिंग खुलते ही उम्मीद जगी थी कि अब दाखिला ले पाएंगे। महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीट ही खाली नहीं है। छात्रों ने बताया कि पहले जब दाखिले के लिए आए तो कहा गया कि जाति प्रमाणपत्र बनवाकर लाना पड़गा। इसके बाद ही दाखिला मिल पाएगा जबकि सामान्य सीटें पहले से खाली थीं।
हालांकि इसके बाद हमने जैसे-तैसे अपना ओबीसी का जन्म प्रमाणपत्र बनाया और फिर जब दाखिले के लिए पहुंचे, तो कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं। मैं कॉमर्स का छात्र हूं और कहा जा रहा है की बीएससी में दाखिला ले लीजिए। छात्रों का यह तक आरोप है कि जिस विषय की सीटों को फुल बताया जा रहा है, उसी विषय की सीट में दाखिला दिलाने के लिए कुछ लोग रिश्वत तक मांग रहे हैं। बता दें कि जिले के आठ सरकारी महाविद्यालयों में अब तक करीब 25 प्रतिशत सीटें खाली हैं। इनमें 23 अगस्त तक ओपन काउंसलिंग के तहत दाखिला प्रक्रिया चलेगी।
विज्ञापन
कोट्स
10 दिन से परेशान हूं। लगातार घर से कॉलेज और साइबर कैफे के चक्कर काट रहा हूं। पहले जन्म प्रमाणपत्र बनाने को कहा गया था और अब बनवाने के बावजूद कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं, तो दाखिला नहीं मिल पाएगा। -साहिल मौर्या
ओएससी कोटे से बीए में दाखिले के लिए आया था। पहले बताया गया कि दाखिला हो जाएगा, पर अब जब दस्तावेज आदि पूरे करके दो दिन बाद पहुंचा हूं तो कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं। -चिराग
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के आठ राजकीय महाविद्यालयों में ऑनलाइन काउंसलिंग प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब ओपन काउंसलिंग प्रक्रिया चल रही है। जिले के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में सैकड़ों की संख्या में रोजाना छात्र दाखिला लेने के लिए पहुंच रहे हैं।
इनमें कई छात्रों को तो 100 रुपये देरी का अतिरिक्त शुल्क देकर दाखिला मिल जा रहा है, पर कई छात्र पिछले 8-10 दिन से लगातार चक्कर लगाने के बावजूद अपना दाखिला सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं। छात्रों का कहना है कि लगातार 10 दिन से दाखिले के लिए परेशान हैं। ओपन काउंसलिंग खुलते ही उम्मीद जगी थी कि अब दाखिला ले पाएंगे। महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि सीट ही खाली नहीं है। छात्रों ने बताया कि पहले जब दाखिले के लिए आए तो कहा गया कि जाति प्रमाणपत्र बनवाकर लाना पड़गा। इसके बाद ही दाखिला मिल पाएगा जबकि सामान्य सीटें पहले से खाली थीं।
विज्ञापन
हालांकि इसके बाद हमने जैसे-तैसे अपना ओबीसी का जन्म प्रमाणपत्र बनाया और फिर जब दाखिले के लिए पहुंचे, तो कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं। मैं कॉमर्स का छात्र हूं और कहा जा रहा है की बीएससी में दाखिला ले लीजिए। छात्रों का यह तक आरोप है कि जिस विषय की सीटों को फुल बताया जा रहा है, उसी विषय की सीट में दाखिला दिलाने के लिए कुछ लोग रिश्वत तक मांग रहे हैं। बता दें कि जिले के आठ सरकारी महाविद्यालयों में अब तक करीब 25 प्रतिशत सीटें खाली हैं। इनमें 23 अगस्त तक ओपन काउंसलिंग के तहत दाखिला प्रक्रिया चलेगी।
विज्ञापन
कोट्स
10 दिन से परेशान हूं। लगातार घर से कॉलेज और साइबर कैफे के चक्कर काट रहा हूं। पहले जन्म प्रमाणपत्र बनाने को कहा गया था और अब बनवाने के बावजूद कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं, तो दाखिला नहीं मिल पाएगा। -साहिल मौर्या
ओएससी कोटे से बीए में दाखिले के लिए आया था। पहले बताया गया कि दाखिला हो जाएगा, पर अब जब दस्तावेज आदि पूरे करके दो दिन बाद पहुंचा हूं तो कहा जा रहा है कि सीटें फुल हो गई हैं। -चिराग