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Faridabad News: परीक्षा पास करने के लिए शिक्षक ले रहे कोचिंग
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फिर से देनी होगी एचटेट परीक्षा, छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा प्रभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों के अनुसार अब सभी शिक्षकों को एचटेट परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। ऐसे में जिले के करीब 500 शिक्षकों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
इसमें विशेष रूप से 2010 से पहले जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। 2010 से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों का कहना है कि यह नियम 2010 से है, पर अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू कर दिया है। इससे हमें अब बच्चों को पढ़ाकर परीक्षा पास कराने के अलावा खुद भी कोचिंग करनी पड़ रही है, ताकि हम भी पास हो सकें और अपनी नौकरी बचा सकें। बता दें कि जिले में 500 शिक्षकों में से 100 से अधिक वह शिक्षक हैं, जोकि 2010 से पहले नियुक्त हुए थे। उन शिक्षकों का कहना है कि जो उस समय की पात्रता परीक्षा थी, वह हमने पास की थी, उसके बाद नियुक्ति मिली थी, पर अब इस परीक्षा को करीब 16 साल बाद देना एक कठिन कार्य होने वाला है। क्योंकि आज बहुत सारी चीजें पहल की तरह याद नहीं हैं, आयु भी पहले के समान नहीं है।
प्रदेशभर के छात्रों पर पड़ेगा असर
प्रदेशभर में 25 हजार से अधिक शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए इस परीक्षा को पास करने की तैयारी में जुट गए हैं। इसका मतलब यह है कि अब इसका प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। शिक्षकों का कहना है कि अभी उनका पूरा ध्यान छात्रों को पढ़ाने पर केंद्रित रहता था, पर अब खुद की पढ़ाई और कोचिंग पर भी जोर देना पड़ेगा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। जिले के विजय नाम के एक शिक्षक ने बताया कि भारत में करीब 25 लाख शिक्षक हैं, जो कि अगर इस परीक्षा की तैयारी में अब जुटेंगे तो देशभर के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं जिले के हजारों छात्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों के अनुसार अब सभी शिक्षकों को एचटेट परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। ऐसे में जिले के करीब 500 शिक्षकों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
इसमें विशेष रूप से 2010 से पहले जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। 2010 से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों का कहना है कि यह नियम 2010 से है, पर अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू कर दिया है। इससे हमें अब बच्चों को पढ़ाकर परीक्षा पास कराने के अलावा खुद भी कोचिंग करनी पड़ रही है, ताकि हम भी पास हो सकें और अपनी नौकरी बचा सकें। बता दें कि जिले में 500 शिक्षकों में से 100 से अधिक वह शिक्षक हैं, जोकि 2010 से पहले नियुक्त हुए थे। उन शिक्षकों का कहना है कि जो उस समय की पात्रता परीक्षा थी, वह हमने पास की थी, उसके बाद नियुक्ति मिली थी, पर अब इस परीक्षा को करीब 16 साल बाद देना एक कठिन कार्य होने वाला है। क्योंकि आज बहुत सारी चीजें पहल की तरह याद नहीं हैं, आयु भी पहले के समान नहीं है।
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प्रदेशभर के छात्रों पर पड़ेगा असर
प्रदेशभर में 25 हजार से अधिक शिक्षक अपनी नौकरी बचाने के लिए इस परीक्षा को पास करने की तैयारी में जुट गए हैं। इसका मतलब यह है कि अब इसका प्रभाव छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। शिक्षकों का कहना है कि अभी उनका पूरा ध्यान छात्रों को पढ़ाने पर केंद्रित रहता था, पर अब खुद की पढ़ाई और कोचिंग पर भी जोर देना पड़ेगा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। जिले के विजय नाम के एक शिक्षक ने बताया कि भारत में करीब 25 लाख शिक्षक हैं, जो कि अगर इस परीक्षा की तैयारी में अब जुटेंगे तो देशभर के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं जिले के हजारों छात्रों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।
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