{"_id":"697e46fa177df0f77005d8a8","slug":"the-acquiring-company-suffered-a-major-setback-from-the-high-court-faridabad-news-c-25-1-mwt1001-109593-2026-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: खरीदार कंपनी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: खरीदार कंपनी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
तावड़ू। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह जिले के तावडू उपमंडल अंतर्गत सुरजीवन रिजॉर्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की भूमि पंजीकरण व विरासत विवाद मामले में खरीदार कंपनी वलंटिर डायनामिक एलएलपी की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा लगाया गया यथास्थिति आदेश बरकरार रहेगा।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत दोनों ने तथ्यों और कानून के आधार पर अंतरिम निषेधाज्ञा दी है, जिसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। अदालत ने कहा कि पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र बेहद सीमित है और इसमें तथ्यों की दोबारा समीक्षा नहीं की जा सकती। बता दें कि विवादित भूमि वर्ष 2000 में स्व. अलका श्रीवास्तव के नाम रजिस्टर्ड हुई थी। उनके पति देवेंद्र कमल श्रीवास्तव का दावा है कि पूरी राशि उन्होंने स्वयं अदा की थी और संपत्ति केवल सुविधा के लिए पत्नी के नाम खरीदी गई थी। वह शुरू से ही भूमि के वास्तविक कब्जे में हैं और भूमि का एक बड़ा हिस्सा लीज पर भी दिया गया है। जुलाई 2023 में अलका श्रीवास्तव के नाम से एक कथित वसीयत सामने आई, जिसके आधार पर उनके बेटा बेटी ने संपत्ति अपने नाम म्यूटेशन करवा ली और जनवरी 2025 में करीब 18.94 करोड़ रुपये में तीन रजिस्टर्ड बिक्री विलेखों के जरिए भूमि एक निजी कंपनी को बेच दी।
इन बिक्री विलेखों में केवल प्रतीकात्मक कब्जा दर्ज है। कोर्ट के मुताबिक बिक्री विलेखों में केवल प्रतीकात्मक कब्जा दर्ज होना यह दर्शाता है कि खरीदार कंपनी ने वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं लिया। वादी के कब्जे को लेकर प्रथम दृष्टया विवाद बनता है, जिसे ट्रायल में तय किया जाएगा। वसीयत, बेनामी लेनदेन, म्यूटेशन और बिक्री प्रक्रिया से जुड़े सभी सवाल विचारणीय हैं। इतनी बड़ी संपत्ति का सीमित समय में म्यूटेशन और बिक्री होना संदेह पैदा करता है, इसलिए यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है। इस प्रकरण में इससे पहले भी खरीदार कंपनी को तीन बार जिला अदालत से झटका लग चुका है। जिला अदालत और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दोनों ने ही कंपनी की अपील खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।
-- -- -- -- -- -- -- -
100 करोड़ की है संपत्ति
बताया जा रहा है कि सुरजीवन रिजॉर्ट से जुड़ी यह चल-अचल संपत्ति करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की है, जिसे विरासत का दावा करने वाले दो युवकों ने लगभग 18 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इसी सौदे को पीड़ित देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने जिला अदालत में चुनौती दी थी, जिसके बाद पंजीकरण पर कोर्ट द्वारा स्टे लगा दी गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले का देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखकर सच्चाई सामने लाने का रास्ता साफ किया है।
Trending Videos
तावड़ू। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह जिले के तावडू उपमंडल अंतर्गत सुरजीवन रिजॉर्ट से जुड़ी करोड़ों रुपये की भूमि पंजीकरण व विरासत विवाद मामले में खरीदार कंपनी वलंटिर डायनामिक एलएलपी की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा लगाया गया यथास्थिति आदेश बरकरार रहेगा।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता ने स्पष्ट किया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट और अपीलीय अदालत दोनों ने तथ्यों और कानून के आधार पर अंतरिम निषेधाज्ञा दी है, जिसमें हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। अदालत ने कहा कि पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र बेहद सीमित है और इसमें तथ्यों की दोबारा समीक्षा नहीं की जा सकती। बता दें कि विवादित भूमि वर्ष 2000 में स्व. अलका श्रीवास्तव के नाम रजिस्टर्ड हुई थी। उनके पति देवेंद्र कमल श्रीवास्तव का दावा है कि पूरी राशि उन्होंने स्वयं अदा की थी और संपत्ति केवल सुविधा के लिए पत्नी के नाम खरीदी गई थी। वह शुरू से ही भूमि के वास्तविक कब्जे में हैं और भूमि का एक बड़ा हिस्सा लीज पर भी दिया गया है। जुलाई 2023 में अलका श्रीवास्तव के नाम से एक कथित वसीयत सामने आई, जिसके आधार पर उनके बेटा बेटी ने संपत्ति अपने नाम म्यूटेशन करवा ली और जनवरी 2025 में करीब 18.94 करोड़ रुपये में तीन रजिस्टर्ड बिक्री विलेखों के जरिए भूमि एक निजी कंपनी को बेच दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन बिक्री विलेखों में केवल प्रतीकात्मक कब्जा दर्ज है। कोर्ट के मुताबिक बिक्री विलेखों में केवल प्रतीकात्मक कब्जा दर्ज होना यह दर्शाता है कि खरीदार कंपनी ने वास्तविक भौतिक कब्जा नहीं लिया। वादी के कब्जे को लेकर प्रथम दृष्टया विवाद बनता है, जिसे ट्रायल में तय किया जाएगा। वसीयत, बेनामी लेनदेन, म्यूटेशन और बिक्री प्रक्रिया से जुड़े सभी सवाल विचारणीय हैं। इतनी बड़ी संपत्ति का सीमित समय में म्यूटेशन और बिक्री होना संदेह पैदा करता है, इसलिए यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है। इस प्रकरण में इससे पहले भी खरीदार कंपनी को तीन बार जिला अदालत से झटका लग चुका है। जिला अदालत और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दोनों ने ही कंपनी की अपील खारिज कर दी थी। अब हाईकोर्ट ने भी उनकी याचिका को खारिज कर दिया है।
100 करोड़ की है संपत्ति
बताया जा रहा है कि सुरजीवन रिजॉर्ट से जुड़ी यह चल-अचल संपत्ति करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की है, जिसे विरासत का दावा करने वाले दो युवकों ने लगभग 18 करोड़ रुपये में बेच दिया था। इसी सौदे को पीड़ित देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने जिला अदालत में चुनौती दी थी, जिसके बाद पंजीकरण पर कोर्ट द्वारा स्टे लगा दी गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले का देवेंद्र कमल श्रीवास्तव ने स्वागत किया है और इसे न्याय की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखकर सच्चाई सामने लाने का रास्ता साफ किया है।
