{"_id":"6a061832fae1fc59830c48c4","slug":"the-administration-entered-the-field-with-full-preparation-before-the-monsoon-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-69936-2026-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: मानसून से पहले पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरा प्रशासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: मानसून से पहले पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरा प्रशासन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ओल्ड अंडरपास में जलभराव से निपटने की रिहर्सल की, साइरन बजते ही सक्रिय हुईं रेस्क्यू टीमें
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। हर साल बारिश के दौरान जलभराव और अंडरपास में फंसने की घटनाओं से जूझने वाले फरीदाबाद में इस बार मानसून से पहले प्रशासन पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गया है। बृहस्पतिवार को ओल्ड अंडरपास क्षेत्र में जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल आयोजित कर प्रशासन ने आपदा से निपटने की अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया। सुबह ठीक नौ बजे साइरन बजते ही पुलिस, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और सिविल डिफेंस की टीमें सक्रिय हो गईं और कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका रेस्क्यू ऑपरेशन के दृश्य में बदल गया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं था बल्कि यह परखना भी था कि अचानक बाढ़ या भारी जलभराव की स्थिति बनने पर विभिन्न विभाग कितनी तेजी और तालमेल के साथ राहत एवं बचाव कार्य कर सकते हैं।
पानी में फंसे लोगों को नावों से निकाला
ओल्ड अंडरपास में पानी भरकर कृत्रिम रूप से आपदा जैसी स्थिति तैयार की गई। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने पानी में फंसे लोगों को नावों और रस्सियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए बचाव अभियान चलाया जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देकर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने का काम किया। फायर ब्रिगेड और पुलिस टीमों ने भी मौके पर भीड़ नियंत्रण, रास्ता खाली कराने और राहत कार्यों में समन्वय का अभ्यास किया। पूरे ऑपरेशन के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और प्रतिक्रिया समय पर विशेष ध्यान दिया गया।
हर मानसून में बढ़ती है फरीदाबाद की चिंता
फरीदाबाद में हर साल मानसून के दौरान कई इलाके जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। विशेषकर तीनों अंडरपास, निचले क्षेत्र और पुराने पुलों के आसपास स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। कई बार वाहन पानी में फंस जाते हैं और लोगों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है। ओल्ड फरीदाबाद के अंडरपास में भरे पानी में डूबने से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार मानसून आने से पहले ही संवेदनशील इलाकों में तैयारी और संसाधनों की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मॉक ड्रिल से यह पता चलता है कि वास्तविक आपदा के समय किन क्षेत्रों में और सुधार की जरूरत है।
300 से ज्यादा कर्मियों और स्वयंसेवकों ने लिया हिस्सा
मॉक ड्रिल में करीब 100 पुलिस कर्मियों के अलावा गुरुग्राम के भौंडसी स्थित एसडीआरएफ यूनिट के 40 जवान, 25 होमगार्ड, 10 सिविल डिफेंस कर्मी, 10 आपदा मित्र, 30 रेडक्रॉस स्वयंसेवक, 10 स्वास्थ्य कर्मचारी और 50 एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां, तीन एम्बुलेंस, हरियाणा रोडवेज की चार बसें तथा बिजली, सिंचाई, नगर निगम, डीएफएससी, डीआईपीआरओ और एनआईसी विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं।
रिस्पॉन्स टाइम सबसे महत्वपूर्ण
डीसी आयुष सिन्हा ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रिस्पॉन्स टाइम की होती है। किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दल जितनी तेजी से घटनास्थल पर पहुंचते हैं, उतना ही नुकसान कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करना है।
लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह
प्रशासन ने नागरिकों से मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। डीसी ने कहा कि भारी बारिश के समय जलभराव वाले क्षेत्रों, अंडरपास और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचना चाहिए।
Trending Videos
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। हर साल बारिश के दौरान जलभराव और अंडरपास में फंसने की घटनाओं से जूझने वाले फरीदाबाद में इस बार मानसून से पहले प्रशासन पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गया है। बृहस्पतिवार को ओल्ड अंडरपास क्षेत्र में जिला स्तरीय बाढ़ मॉक ड्रिल आयोजित कर प्रशासन ने आपदा से निपटने की अपनी तैयारियों का प्रदर्शन किया। सुबह ठीक नौ बजे साइरन बजते ही पुलिस, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और सिविल डिफेंस की टीमें सक्रिय हो गईं और कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका रेस्क्यू ऑपरेशन के दृश्य में बदल गया।
मॉक ड्रिल का उद्देश्य केवल अभ्यास करना नहीं था बल्कि यह परखना भी था कि अचानक बाढ़ या भारी जलभराव की स्थिति बनने पर विभिन्न विभाग कितनी तेजी और तालमेल के साथ राहत एवं बचाव कार्य कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पानी में फंसे लोगों को नावों से निकाला
ओल्ड अंडरपास में पानी भरकर कृत्रिम रूप से आपदा जैसी स्थिति तैयार की गई। इसके बाद रेस्क्यू टीमों ने पानी में फंसे लोगों को नावों और रस्सियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालने का अभ्यास किया। एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए बचाव अभियान चलाया जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देकर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने का काम किया। फायर ब्रिगेड और पुलिस टीमों ने भी मौके पर भीड़ नियंत्रण, रास्ता खाली कराने और राहत कार्यों में समन्वय का अभ्यास किया। पूरे ऑपरेशन के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल और प्रतिक्रिया समय पर विशेष ध्यान दिया गया।
हर मानसून में बढ़ती है फरीदाबाद की चिंता
फरीदाबाद में हर साल मानसून के दौरान कई इलाके जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। विशेषकर तीनों अंडरपास, निचले क्षेत्र और पुराने पुलों के आसपास स्थिति ज्यादा खराब हो जाती है। कई बार वाहन पानी में फंस जाते हैं और लोगों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है। ओल्ड फरीदाबाद के अंडरपास में भरे पानी में डूबने से दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने इस बार मानसून आने से पहले ही संवेदनशील इलाकों में तैयारी और संसाधनों की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मॉक ड्रिल से यह पता चलता है कि वास्तविक आपदा के समय किन क्षेत्रों में और सुधार की जरूरत है।
300 से ज्यादा कर्मियों और स्वयंसेवकों ने लिया हिस्सा
मॉक ड्रिल में करीब 100 पुलिस कर्मियों के अलावा गुरुग्राम के भौंडसी स्थित एसडीआरएफ यूनिट के 40 जवान, 25 होमगार्ड, 10 सिविल डिफेंस कर्मी, 10 आपदा मित्र, 30 रेडक्रॉस स्वयंसेवक, 10 स्वास्थ्य कर्मचारी और 50 एनसीसी कैडेट्स ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां, तीन एम्बुलेंस, हरियाणा रोडवेज की चार बसें तथा बिजली, सिंचाई, नगर निगम, डीएफएससी, डीआईपीआरओ और एनआईसी विभाग की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं।
रिस्पॉन्स टाइम सबसे महत्वपूर्ण
डीसी आयुष सिन्हा ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रिस्पॉन्स टाइम की होती है। किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दल जितनी तेजी से घटनास्थल पर पहुंचते हैं, उतना ही नुकसान कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर करना है।
लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह
प्रशासन ने नागरिकों से मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। डीसी ने कहा कि भारी बारिश के समय जलभराव वाले क्षेत्रों, अंडरपास और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचना चाहिए।