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Faridabad News: राजकीय महिला महाविद्यालय में एक साल से बंद हैं कैंटीन
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छात्राओं और प्राध्यापकों को करना पड़ता है परेशानी का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-16ए स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में कैंटीन काफी समय से बंद है। पुराने टेंडर का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन नए टेंडर की बढ़ी हुई लागत के कारण कोई भी ठेकेदार इसे संभालने को तैयार नहीं है। लगभग एक साल से कैंटीन बंद होने के कारण छात्राओं और प्राध्यापकों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्राओं का कहना है कि दिनभर कक्षाओं और प्रैक्टिकल के बीच उन्हें बाहर से खाना लाना पड़ता है। गर्मी और कॉलेज की दूरी इसे और भी कठिन बना देती है। कई बार सुबह घर से नाश्ता या लंच लाना मुश्किल होता है, क्योंकि कुछ छात्राएं बहुत दूर से आती हैं। मजबूरी में उन्हें बाहर से महंगा खाना या स्नैक्स खरीदकर खाने पड़ते हैं।
पिछले एक साल से हमें लगातार उम्मीद दी जा रही है कि जल्द कैंटीन खोली जाएगी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।- शिवानी, छात्रा
हमें हर दिन बाहर का खाना लेना पड़ता है। जो महंगा भी है और हमेशा सही भी नहीं होता। इससे खर्च भी बढ़ता है। - साक्षी, छात्रा
कैंटीन खुली होती तो हमें बार-बार बाहर नहीं जाना पड़ता। इस कारण पढ़ाई के बीच में बार-बार रुकावट आती है। - हिंमाशी, छात्रा
वर्जन
कॉलेज प्रशासन छात्राओं की सुविधा को प्राथमिकता देता है और नए टेंडर जल्द शुरू करेगा। तब तक अस्थायी व्यवस्था में खाने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। - डॉ. विजया श्रीधर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-16ए स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में कैंटीन काफी समय से बंद है। पुराने टेंडर का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन नए टेंडर की बढ़ी हुई लागत के कारण कोई भी ठेकेदार इसे संभालने को तैयार नहीं है। लगभग एक साल से कैंटीन बंद होने के कारण छात्राओं और प्राध्यापकों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्राओं का कहना है कि दिनभर कक्षाओं और प्रैक्टिकल के बीच उन्हें बाहर से खाना लाना पड़ता है। गर्मी और कॉलेज की दूरी इसे और भी कठिन बना देती है। कई बार सुबह घर से नाश्ता या लंच लाना मुश्किल होता है, क्योंकि कुछ छात्राएं बहुत दूर से आती हैं। मजबूरी में उन्हें बाहर से महंगा खाना या स्नैक्स खरीदकर खाने पड़ते हैं।
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पिछले एक साल से हमें लगातार उम्मीद दी जा रही है कि जल्द कैंटीन खोली जाएगी, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।- शिवानी, छात्रा
हमें हर दिन बाहर का खाना लेना पड़ता है। जो महंगा भी है और हमेशा सही भी नहीं होता। इससे खर्च भी बढ़ता है। - साक्षी, छात्रा
कैंटीन खुली होती तो हमें बार-बार बाहर नहीं जाना पड़ता। इस कारण पढ़ाई के बीच में बार-बार रुकावट आती है। - हिंमाशी, छात्रा
वर्जन
कॉलेज प्रशासन छात्राओं की सुविधा को प्राथमिकता देता है और नए टेंडर जल्द शुरू करेगा। तब तक अस्थायी व्यवस्था में खाने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। - डॉ. विजया श्रीधर, कार्यवाहक प्रधानाचार्य