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Faridabad News: समय पर उपचार से मिर्गी के मरीज जी सकते हैं सामान्य जीवन

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 12:59 AM IST
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With timely treatment, patients with epilepsy can lead a normal life
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अंतरराष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता दिवस
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समाज में व्याप्त अंधविश्वास आज भी मरीजों के इलाज में बन रहा है बड़ी बाधा


नीरज धर पाण्डेय


फरीदाबाद। मिर्गी को लेकर समाज में आज भी व्याप्त अंधविश्वास मरीजों के इलाज में बड़ी बाधा बन रहा है। कई लोग इस बीमारी को जादू-टोना या अलौकिक प्रभाव से जोड़ते हैं, जिसके चलते मरीज समय पर चिकित्सकीय सहायता लेने से वंचित रह जाते हैं।


जिला नागरिक अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ. उपेंद्र भारद्वाज ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 10 से 15 मिर्गी के मरीज पहुंचते हैं, जबकि मासिक आंकड़ा 150 से 200 तक रहता है। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग इस बीमारी को ऊपरी बाधा से जोड़कर देखते हैं, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी धारणाएं अधिक प्रचलित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिर्गी का इलाज केवल अस्पताल में संभव है, न कि किसी तंत्र-मंत्र या झाड़-फूंक से।
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लक्षणों को समझना जरूरी

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें मस्तिष्क की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण दौरे पड़ते हैं। मरीज को अचानक झटके लगना, बेहोशी आना, आंखें ऊपर चढ़ना, मुंह से झाग निकलना और शरीर अकड़ना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामलों में दौरे से पहले मुंह में अजीब स्वाद आना भी एक संकेत हो सकता है।



समय पर इलाज से संभव नियंत्रण

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते बीमारी की पहचान कर नियमित उपचार शुरू किया जाए, तो करीब 70 प्रतिशत मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। दो से तीन वर्षों तक दवाओं का नियमित सेवन और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। साथ ही पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी उपचार का अहम हिस्सा है।



कारण भी जानना जरूरी

डॉ. भारद्वाज ने कहा कि मिर्गी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सिर पर चोट, मस्तिष्क संक्रमण, स्ट्रोक, जन्म के दौरान ऑक्सीजन की कमी और कुछ मामलों में ब्रेन ट्यूमर शामिल हैं। कुछ मामलों में यह समस्या अनुवांशिक भी हो सकती है।



दौरे के दौरान सही प्राथमिक उपचार

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि मिर्गी स्वयं जानलेवा नहीं होती, लेकिन दौरे के दौरान गिरने से चोट लगने का खतरा रहता है। ऐसे में मरीज को सुरक्षित स्थिति में लिटाना चाहिए और मुंह में पानी नहीं डालना चाहिए। जूता सुंघाने जैसी परंपराएं पूरी तरह गलत हैं, क्योंकि मिर्गी का दौरा क्षणिक होता है। एक या दो मिनट के बाद समाप्त हो जाता है।



भ्रांतियां दूर करना जरूरी

डॉ. उपेंद्र भारद्वाज ने कहा कि मिर्गी को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को खत्म करना बेहद जरूरी है। इसे किसी भी प्रकार के अंधविश्वास से जोड़ने के बजाय एक सामान्य चिकित्सा समस्या के रूप में समझना चाहिए, ताकि मरीज बिना डर के समय पर इलाज करवा सकें।
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