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परंपरा से आगे बढ़ती नारी शक्ति : इंजीनियर से मैकेनिक तक मजबूत पहचान
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां एक ओर देवी शक्ति की आराधना की जा रही है, वहीं शहर की महिलाएं पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए तकनीकी क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, ऑटोमोबाइल और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाकर वे सशक्त नारी की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं।
जिले की ऐसी ही कई महिलाओं की कहानियां इस बदलाव की स्पष्ट मिसाल हैं। कोई इंजीनियर के रूप में निर्माण परियोजनाओं का नेतृत्व कर रही है, तो कोई आर्किटेक्ट के रूप में आधुनिक डिजाइनों से शहर की पहचान गढ़ रही है। वहीं कुछ महिलाएं मैकेनिक बनकर पुरुष-प्रधान क्षेत्र में अपनी दक्षता साबित कर रही हैं, जबकि कुछ तकनीकी प्रशिक्षण देकर अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखा रही हैं।
निर्माण क्षेत्र में अंजलि की मजबूत पहचान
फरीदाबाद की ग्रीन फील्ड कॉलोनी निवासी अंजलि शर्मा एक सिविल इंजीनियर के रूप में शहर की कई निर्माण परियोजनाओं में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी में साइट इंजीनियर के तौर पर शुरुआत की थी, जहां शुरुआत में उन्हें पुरुष सहयोगियों के बीच खुद को साबित करने में चुनौतियां आईं। आज अंजलि बड़ी परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और टीम का नेतृत्व कर रही हैं। उनका कहना है कि मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी क्षेत्र में पहचान बनाई जा सकती है।
आर्किटेक्चर में नेहा का ग्रीन विजन
सेक्टर-21 में रहने वाली नेहा गुप्ता एक सफल आर्किटेक्ट हैं, जो आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शहर में कई रिहायशी और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स को डिजाइन किया है। नेहा का फोकस ग्रीन बिल्डिंग और स्पेस मैनेजमेंट पर रहता है। उनका मानना है कि आर्किटेक्चर केवल इमारत बनाना नहीं, बल्कि जीवनशैली को बेहतर बनाना है। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और अब कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
मैकेनिक बनकर पूजा ने बदली सोच
एनआईटी फरीदाबाद की रहने वाली पूजा यादव ने एक ऐसे क्षेत्र में कदम रखा, जिसे आमतौर पर पुरुषों का काम माना जाता है। वह एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में मैकेनिक के रूप में काम करती हैं और टू-व्हीलर व फोर-व्हीलर की मरम्मत में माहिर हैं। शुरुआत में लोगों ने उनके काम पर सवाल उठाए, लेकिन अपनी मेहनत और हुनर से उन्होंने सभी का नजरिया बदल दिया। आज उनके पास नियमित ग्राहक हैं और वह आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहयोग भी कर रही हैं।
प्रशिक्षण से रेखा बना रहीं आत्मनिर्भर महिलाएं
बल्लभगढ़ निवासी रेखा वर्मा तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह एक प्रशिक्षण केंद्र में इलेक्ट्रिकल और बेसिक मशीन रिपेयरिंग का प्रशिक्षण देती हैं, जिससे कई महिलाएं रोजगार के अवसर पा रही हैं। रेखा का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने खुद भी संघर्ष कर यह मुकाम हासिल किया है और अब अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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जिले की ऐसी ही कई महिलाओं की कहानियां इस बदलाव की स्पष्ट मिसाल हैं। कोई इंजीनियर के रूप में निर्माण परियोजनाओं का नेतृत्व कर रही है, तो कोई आर्किटेक्ट के रूप में आधुनिक डिजाइनों से शहर की पहचान गढ़ रही है। वहीं कुछ महिलाएं मैकेनिक बनकर पुरुष-प्रधान क्षेत्र में अपनी दक्षता साबित कर रही हैं, जबकि कुछ तकनीकी प्रशिक्षण देकर अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखा रही हैं।
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निर्माण क्षेत्र में अंजलि की मजबूत पहचान
फरीदाबाद की ग्रीन फील्ड कॉलोनी निवासी अंजलि शर्मा एक सिविल इंजीनियर के रूप में शहर की कई निर्माण परियोजनाओं में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने एक निजी कंस्ट्रक्शन कंपनी में साइट इंजीनियर के तौर पर शुरुआत की थी, जहां शुरुआत में उन्हें पुरुष सहयोगियों के बीच खुद को साबित करने में चुनौतियां आईं। आज अंजलि बड़ी परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और टीम का नेतृत्व कर रही हैं। उनका कहना है कि मेहनत और आत्मविश्वास से किसी भी क्षेत्र में पहचान बनाई जा सकती है।
आर्किटेक्चर में नेहा का ग्रीन विजन
सेक्टर-21 में रहने वाली नेहा गुप्ता एक सफल आर्किटेक्ट हैं, जो आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने शहर में कई रिहायशी और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स को डिजाइन किया है। नेहा का फोकस ग्रीन बिल्डिंग और स्पेस मैनेजमेंट पर रहता है। उनका मानना है कि आर्किटेक्चर केवल इमारत बनाना नहीं, बल्कि जीवनशैली को बेहतर बनाना है। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और अब कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
मैकेनिक बनकर पूजा ने बदली सोच
एनआईटी फरीदाबाद की रहने वाली पूजा यादव ने एक ऐसे क्षेत्र में कदम रखा, जिसे आमतौर पर पुरुषों का काम माना जाता है। वह एक ऑटोमोबाइल वर्कशॉप में मैकेनिक के रूप में काम करती हैं और टू-व्हीलर व फोर-व्हीलर की मरम्मत में माहिर हैं। शुरुआत में लोगों ने उनके काम पर सवाल उठाए, लेकिन अपनी मेहनत और हुनर से उन्होंने सभी का नजरिया बदल दिया। आज उनके पास नियमित ग्राहक हैं और वह आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहयोग भी कर रही हैं।
प्रशिक्षण से रेखा बना रहीं आत्मनिर्भर महिलाएं
बल्लभगढ़ निवासी रेखा वर्मा तकनीकी प्रशिक्षण के क्षेत्र में सक्रिय हैं और महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दे रही हैं। वह एक प्रशिक्षण केंद्र में इलेक्ट्रिकल और बेसिक मशीन रिपेयरिंग का प्रशिक्षण देती हैं, जिससे कई महिलाएं रोजगार के अवसर पा रही हैं। रेखा का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने खुद भी संघर्ष कर यह मुकाम हासिल किया है और अब अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।