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Faridabad News: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में युवक दोषमुक्त

Mon, 03 Aug 2026 12:15 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:15 AM IST
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Young man acquitted in rape case involving false promise of marriage.
शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के मामले में युवक दोषमुक्त
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-फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कहा- पीड़िता अदालत में अपने आरोपों से मुकर गई, अभियोजन आरोप सिद्ध नहीं कर सका

संवाद न्यूज़ एजेंसी
फरीदाबाद। शादी का झांसा देकर कई वर्षों तक दुष्कर्म करने के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नोएडा निवासी अंकित को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने ही आरोपों से मुकर गई और उसने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों के बीच शारीरिक संबंध आपसी सहमति से बने थे। ऐसे में अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष लगाए गए आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका।

अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2019 में पीड़िता की इंस्टाग्राम के माध्यम से अंकित से जान-पहचान हुई थी। शिकायत में कहा गया था कि शादी का झूठा वादा कर अलग-अलग स्थानों और होटलों में कई बार दुष्कर्म किया गया। शिकायत के आधार पर महिला थाना बल्लभगढ़ में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया और मामला विचाराधीन था।
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सुनवाई के दौरान मामले की सबसे महत्वपूर्ण गवाह पीड़िता थी, लेकिन उसने अदालत में अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया। उसने अपने बयान में कहा कि उसके और अंकित के बीच प्रेम संबंध थे तथा दोनों के बीच बने शारीरिक संबंध उसकी सहमति से थे। उसने यह भी कहा कि अंकित ने कभी शादी का वादा नहीं किया। साथ ही पुलिस के समक्ष दिए गए अपने पूर्व बयान का भी समर्थन नहीं किया। पीड़िता की मां ने भी अभियोजन के पक्ष में गवाही नहीं दी।
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अदालत ने कहा कि जब मुख्य गवाह ही अपने पहले के आरोपों से मुकर गई तो अभियोजन का पूरा मामला कमजोर हो गया और लगाए गए आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके।



फैसले में अदालत ने कहा कि मेडिकल जांच में शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं मिली। घटना पुरानी होने के कारण आवश्यक फोरेंसिक नमूने भी उपलब्ध नहीं हो सके और ऐसा कोई वैज्ञानिक साक्ष्य भी सामने नहीं आया, जिससे जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की पुष्टि हो सके।


अदालत ने अपने निर्णय में होटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। फैसले में कहा गया कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि दोनों लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहे, कई बार साथ होटलों में ठहरे और पीड़िता ने होटल में स्वयं अपनी पहचान दर्ज कर हस्ताक्षर किए। उसने किसी भी होटल कर्मचारी से कभी कोई शिकायत नहीं की। अदालत ने इन परिस्थितियों को दोनों के बीच सहमति से बने संबंधों का संकेत माना।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया बयान अपने आप में अंतिम साक्ष्य नहीं होता। यदि कोई गवाह अदालत में शपथपूर्वक उससे अलग बयान देता है, तो न्यायालय उसी बयान को अधिक महत्व देता है।


इन सभी तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। इसी आधार पर नोएडा निवासी अंकित को दोषमुक्त कर दिया गया।

सचिन
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