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Faridabad News: दुष्कर्म और धोखाधड़ी के आरोप से युवक बरी
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अदालत ने कहा- संबंध आपसी सहमति और आर्थिक लेन-देन से जुड़े, अभियोजन आरोप साबित करने में विफल
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2017 के दुष्कर्म व धोखाधड़ी के मामले में आरोपी आकाश वर्मा को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका।
मामला महिला थाना सेंट्रल फरीदाबाद में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने, 52 लाख रुपये हड़पने, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने स्वयं को तलाकशुदा बताकर शादी का भरोसा दिलाया और बाद में शारीरिक संबंध बनाकर मुकर गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हर असफल प्रेम संबंध या विवाह का अधूरा वादा दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। यह साबित होना आवश्यक है कि शुरुआत से ही आरोपी की नीयत धोखा देने की थी। अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक आर्थिक लेन-देन हुआ। बैंक खातों के रिकॉर्ड में बड़ी रकम का आपसी ट्रांसफर सामने आया, जिससे संबंध केवल एकतरफा शोषण का प्रतीत नहीं हुआ।
अदालत ने यह भी पाया किया कि शिकायत और अदालत में दिए गए बयानों में कई तथ्यों में अंतर था। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन शारीरिक संबंध के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले और कथित आपत्तिजनक वीडियो भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिला एवं सत्र न्यायालय ने वर्ष 2017 के दुष्कर्म व धोखाधड़ी के मामले में आरोपी आकाश वर्मा को बरी कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ज्योति लांबा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका।
मामला महिला थाना सेंट्रल फरीदाबाद में दर्ज एफआईआर से जुड़ा था, जिसमें आरोपी पर विवाह का झूठा वादा कर दुष्कर्म करने, 52 लाख रुपये हड़पने, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने स्वयं को तलाकशुदा बताकर शादी का भरोसा दिलाया और बाद में शारीरिक संबंध बनाकर मुकर गया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हर असफल प्रेम संबंध या विवाह का अधूरा वादा दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। यह साबित होना आवश्यक है कि शुरुआत से ही आरोपी की नीयत धोखा देने की थी। अदालत ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक आर्थिक लेन-देन हुआ। बैंक खातों के रिकॉर्ड में बड़ी रकम का आपसी ट्रांसफर सामने आया, जिससे संबंध केवल एकतरफा शोषण का प्रतीत नहीं हुआ।
अदालत ने यह भी पाया किया कि शिकायत और अदालत में दिए गए बयानों में कई तथ्यों में अंतर था। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन शारीरिक संबंध के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले और कथित आपत्तिजनक वीडियो भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया।