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नशीली वनस्पति से रोजगार की राह: गाजियाबाद स्थित निट्रा में भांग के पौधे से बन रहे हैं रेशे, फिर बनेगा कपड़ा

Wed, 29 Jul 2026 02:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा राहुल सिंह, गाजियाबाद
राहुल सिंह, गाजियाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 29 Jul 2026 02:03 AM IST
सार

भांग के पौधे से कपड़ा तैयार करने की दिशा में देश ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसके लिए नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (निट्रा) ने दक्षिण कोरिया की तीन निजी कंपनियों के साथ हाल ही में समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया है।

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Fibers are being produced from cannabis plants at Ghaziabad-based NITRA, which will be used to make fabric
यदि यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल होता है तो भारत में भांग आधारित टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक नया बाजार तैयार हो सकता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस भांग के पौधे का नाम सुनते ही आमतौर पर नशे और युवाओं में बढ़ती लत की तस्वीर सामने आती है, वही पौधा आने वाले समय में भारत के लिए रोजगार और औद्योगिक विकास की नई राह खोल सकता है। भांग के पौधे से कपड़ा तैयार करने की दिशा में देश ने एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसके लिए नॉर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन (निट्रा) ने दक्षिण कोरिया की तीन निजी कंपनियों के साथ हाल ही में समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया है।

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निट्रा के अधिकारियों ने बताया कि हाल में दिल्ली के भारत मंडपम में लगे भारत टेक्स में निट्रा और दक्षिण कोरियाई कंपनियों के बीच हुआ एमओयू इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस सहयोग के जरिए भांग के रेशों से कपड़ा बनाने की तकनीक, उत्पादन प्रक्रिया और औद्योगिक उपयोग की संभावनाओं पर ओर अधिक कारगर तरीके से काम किया जाएगा। फिलहाल निट्रा में रेशे बनाने का काम चल रहा है। यदि यह प्रयोग बड़े स्तर पर सफल होता है तो भारत में भांग आधारित टेक्सटाइल उद्योग के लिए एक नया बाजार तैयार हो सकता है।
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आज इस पौधे को समाज में मुख्य रूप से नशे से जोड़कर देखा जाता है, उसका एक नया औद्योगिक चेहरा सामने आ रहा है। भांग के रेशे मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं और दुनिया के कई हिस्सों में इनका इस्तेमाल टेक्सटाइल सहित विभिन्न उत्पादों में किया जाता है। भारत में भी अब इस क्षेत्र को तकनीक और शोध के जरिए विकसित करने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि इस पहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भांग के पौधे की सामाजिक छवि को बदलने की क्षमता रखती है। एक ओर जहां नशे के लिए भांग का दुरुपयोग युवाओं के लिए चिंता का विषय है, वहीं दूसरी ओर नियंत्रित और औद्योगिक उपयोग के जरिए यही पौधा रोजगार, कारोबार और आर्थिक विकास का माध्यम बन सकता है।
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ऐसे बनता है भांग के पौधे से रेशा
सबसे पहले भांग के पौधे को जड़ समेत उखाड़कर सेंटर पर लया जाता है। इसके बाद पौधे को तेज धूप में सुखाया जाता है और सूखे हुए पौधे को कुछ केमिकल्स के साथ मिलाया जाता है और मशीनों में डालकर पहले मोटा रेशा और उसके बाद पतले रेशे तैयार किया जाता है। इन्हें रेशों को एकत्रित करके बाद में धागा बनाया जाता है। और इन्हें धागों से फिर कपड़े तैयार किए जाने का काम इन दिनों निट्रा में किया जाता है।

उत्तराखंड सरकार से परमिशन लेकर की जा रही है इंटरनल खेती
निट्रा के अधिकारियों ने बताया कि भारत में भांग की खेती करने के लिए सरकार से परमिशन लेनी होती है। ऐसे में निट्रा ने शुरूआत में उत्तराखंड सरकार से इस मामले में परमिशन ली है और इंटरनल खेती कराई जा रही है। इंटरनल भांग की खेती में नशे की मात्रा कम होती है। वहीं, जंगली भांग में नशे की मात्रा अधिक होती है। हालांकि जंगली भांग के पौधे से भी रेशे बनाने का काम किया जा रहा है।

टेक्सटाइल क्षेत्र में नई तकनीक, नए निवेश और रोजगार के अवसर होंगे पैदा
अधिकारियों ने बताया कि निट्रा की दक्षिण कोरियाई कंपनियों के साथ साझेदारी को इसी बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले समय में यदि भांग के रेशों से बड़े पैमाने पर कपड़ा उत्पादन शुरू होता है तो इससे टेक्सटाइल क्षेत्र में नई तकनीक, नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। भारत के युवाओं को इससे बेहतर रोजगार के साधन मिलेंगे। यानी आने वाले समय में भांग की पहचान सिर्फ नशे के पौधे के तौर पर नहीं होगी। संभव है कि यही पौधा भारत में कपड़ों के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के धागे भी बुनता नजर आएगा।


निट्रा में इन दिनों भांग के पौधे से रेशे बनाने का काम किया जा रहा है। इसके लिए तेजी से काम हो रहा है। हाल ही में दक्षिण कोरिया की तीन कंपनियों के साथ एमओयू भी साइन किया गया है। भांग के पौधे को केवल नशे के नजरिए से देखने के बजाय उसके औद्योगिक और पर्यावरणीय उपयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
-एमएस परमार, निदेशक, निट्रा भारत

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