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Delhi NCR News: कहीं केदारनाथ तो कहीं अमरनाथ, कांवड़ मार्गों पर सजी आस्था की भव्य झांकियां
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-राम मंदिर, कैलाश और आदियोगी शिव की झांकियों ने खींचा लोगों का ध्यान, नन्हे कांवड़िए भी बने आकर्षण
चिराग गुप्ता
पूर्वी दिल्ली। सावन की कांवड़ यात्रा अपने अंतिम दौर में है। पूर्वी दिल्ली के कांवड़ मार्ग भव्य झांकियों से सज गए हैं। जीटी रोड, वजीराबाद रोड और सीलमपुर जैसे मार्गों पर ये झांकियां श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। इनमें केदारनाथ, अमरनाथ धाम, राम मंदिर और कैलाश पर्वत की प्रतिकृतियां शामिल हैं। भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की झलक भी देखने को मिल रही है।
रंग-बिरंगी रोशनी, भजनों और हर-हर महादेव के जयकारों से मार्ग भक्तिमय हो गए हैं। कांवड़ यात्री शिवम ने बताया कि बड़ी झांकियों के लिए तीन से चार महीने पहले ऑर्डर देना पड़ता है। कारीगर बांस, लकड़ी, थर्माकोल और फाइबर से इन्हें तैयार करते हैं, जिनमें लाइट और साउंड सिस्टम भी होते हैं। कई कांवड़ समितियां सावन शुरू होने से काफी पहले ही इनकी बुकिंग करा लेती हैं।
आदियोगी शिव की झांकी रही खास
जीटी रोड पर तमिलनाडु की 112 फुट ऊंची आदियोगी शिव प्रतिमा की तर्ज पर तैयार की गई झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। करीब 20 शिवभक्त हरिद्वार से लगभग 90 लीटर गंगाजल लेकर नजफगढ़ जा रहे हैं। उनके अनुसार 10 दिन की इस यात्रा में करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए हैं। यात्रा हरिद्वार से शुरू होकर रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली के नजफगढ़ तक जाएगी। कांवड़ संचालक ने बताया कि मेरठ में उन्हें झांकी के लिए प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
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छोटा भोला, बड़ी आस्था
पूर्वी दिल्ली के जीटी रोड स्थित शास्त्री पार्क के पास कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था का एक भावुक दृश्य देखने को मिला। महज तीन वर्ष का एक नन्हा शिव भक्त अपने माता-पिता के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ता नजर आया। नन्हे कांवड़िए के मुख से निकल रहे बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे।
बेटे की जिद के आगे झुके पिता
कांवड़ यात्रा में जहां हजारों शिवभक्त अपनी-अपनी मनोकामनाओं और आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं, वहीं एक आठ वर्षीय बालक की जिद भी उसके पिता को दोबारा कांवड़ यात्रा पर ले आई। शिव कुमार ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। बताया कि मैंने इस साल कांवड़ लेने का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया था, लेकिन मेरे आठ साल के बेटे ने बार-बार कहा कि पापा इस बार भी कांवड़ लेकर आओ। उसकी जिद के आगे मेरी एक नहीं चली और मैं सिर्फ उसके कहने पर ही इस बार कांवड़ यात्रा पर निकला हूं।
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चिराग गुप्ता
पूर्वी दिल्ली। सावन की कांवड़ यात्रा अपने अंतिम दौर में है। पूर्वी दिल्ली के कांवड़ मार्ग भव्य झांकियों से सज गए हैं। जीटी रोड, वजीराबाद रोड और सीलमपुर जैसे मार्गों पर ये झांकियां श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। इनमें केदारनाथ, अमरनाथ धाम, राम मंदिर और कैलाश पर्वत की प्रतिकृतियां शामिल हैं। भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों की झलक भी देखने को मिल रही है।
रंग-बिरंगी रोशनी, भजनों और हर-हर महादेव के जयकारों से मार्ग भक्तिमय हो गए हैं। कांवड़ यात्री शिवम ने बताया कि बड़ी झांकियों के लिए तीन से चार महीने पहले ऑर्डर देना पड़ता है। कारीगर बांस, लकड़ी, थर्माकोल और फाइबर से इन्हें तैयार करते हैं, जिनमें लाइट और साउंड सिस्टम भी होते हैं। कई कांवड़ समितियां सावन शुरू होने से काफी पहले ही इनकी बुकिंग करा लेती हैं।
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आदियोगी शिव की झांकी रही खास
जीटी रोड पर तमिलनाडु की 112 फुट ऊंची आदियोगी शिव प्रतिमा की तर्ज पर तैयार की गई झांकी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। करीब 20 शिवभक्त हरिद्वार से लगभग 90 लीटर गंगाजल लेकर नजफगढ़ जा रहे हैं। उनके अनुसार 10 दिन की इस यात्रा में करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए हैं। यात्रा हरिद्वार से शुरू होकर रुड़की, मुजफ्फरनगर, मेरठ और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली के नजफगढ़ तक जाएगी। कांवड़ संचालक ने बताया कि मेरठ में उन्हें झांकी के लिए प्रथम पुरस्कार भी मिल चुका है।
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छोटा भोला, बड़ी आस्था
पूर्वी दिल्ली के जीटी रोड स्थित शास्त्री पार्क के पास कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था का एक भावुक दृश्य देखने को मिला। महज तीन वर्ष का एक नन्हा शिव भक्त अपने माता-पिता के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ता नजर आया। नन्हे कांवड़िए के मुख से निकल रहे बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे थे।
बेटे की जिद के आगे झुके पिता
कांवड़ यात्रा में जहां हजारों शिवभक्त अपनी-अपनी मनोकामनाओं और आस्था के साथ शामिल हो रहे हैं, वहीं एक आठ वर्षीय बालक की जिद भी उसके पिता को दोबारा कांवड़ यात्रा पर ले आई। शिव कुमार ने बताया कि वह पिछले वर्ष भी हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा कर चुके हैं। बताया कि मैंने इस साल कांवड़ लेने का कोई कार्यक्रम नहीं बनाया था, लेकिन मेरे आठ साल के बेटे ने बार-बार कहा कि पापा इस बार भी कांवड़ लेकर आओ। उसकी जिद के आगे मेरी एक नहीं चली और मैं सिर्फ उसके कहने पर ही इस बार कांवड़ यात्रा पर निकला हूं।