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Delhi NCR News: माता-पिता लौटे, 10 साल का गौरव अकेले चला कांवड़ लेकर
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-रुड़की से पैदल हरियाणा तक अकेले पैदल यात्रा पर निकला नन्हा शिवभक्त, बोला-भोले बाबा पर भरोसा है
प्रथम चौहान
नई दिल्ली। आस्था इन्सान को मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने की ताकत देती है। ऐसी ही मिसाल बने हैं हरियाणा के 10 वर्षीय गौरव। माता-पिता की तबीयत बिगड़ने पर जब उन्होंने कांवड़ यात्रा बीच में छोड़कर घर लौटने का फैसला किया, तो गौरव ने हार नहीं मानी। उसने अकेले ही कांवड़ उठाई और रुड़की से पैदल हरियाणा की ओर निकल पड़ा।
गौरव फिलहाल पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क स्थित कांवड़ शिविर में रुका है। थोड़ा आराम करने के बाद वह आगे बढ़ेगा। महज 10 साल की उम्र में करीब 10 लीटर जल लेकर पैदल चल रहे गौरव को देख शिविर में मौजूद श्रद्धालु उसकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।
गौरव ने बताया कि वह माता-पिता के साथ कांवड़ यात्रा पर निकला था। रुड़की पहुंचने पर उसकी मां की तबीयत खराब हो गई, जिससे माता-पिता का हौसला टूट गया और उन्होंने बस से घर लौटने का फैसला किया। उन्होंने गौरव को भी साथ चलने को कहा, लेकिन उसने अकेले यात्रा पूरी करने का मन बना लिया।
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अकेले चल रहे गौरव का कहना है कि रास्ते में थकान तो होती है, लेकिन भोले बाबा पर भरोसा उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। सावन में हरिद्वार से हजारों श्रद्धालु कांवड़ लेकर जाते हैं, लेकिन गौरव की कहानी अलग है। उसके माता-पिता तो मजबूरी में लौट गए, लेकिन इस नन्हे शिवभक्त ने अकेले ही सफर जारी रखने की ठान ली। शिविर में लोग उसे हौसला दे रहे हैं और उसकी आस्था को सलाम कर रहे हैं।
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प्रथम चौहान
नई दिल्ली। आस्था इन्सान को मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने की ताकत देती है। ऐसी ही मिसाल बने हैं हरियाणा के 10 वर्षीय गौरव। माता-पिता की तबीयत बिगड़ने पर जब उन्होंने कांवड़ यात्रा बीच में छोड़कर घर लौटने का फैसला किया, तो गौरव ने हार नहीं मानी। उसने अकेले ही कांवड़ उठाई और रुड़की से पैदल हरियाणा की ओर निकल पड़ा।
गौरव फिलहाल पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क स्थित कांवड़ शिविर में रुका है। थोड़ा आराम करने के बाद वह आगे बढ़ेगा। महज 10 साल की उम्र में करीब 10 लीटर जल लेकर पैदल चल रहे गौरव को देख शिविर में मौजूद श्रद्धालु उसकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।
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गौरव ने बताया कि वह माता-पिता के साथ कांवड़ यात्रा पर निकला था। रुड़की पहुंचने पर उसकी मां की तबीयत खराब हो गई, जिससे माता-पिता का हौसला टूट गया और उन्होंने बस से घर लौटने का फैसला किया। उन्होंने गौरव को भी साथ चलने को कहा, लेकिन उसने अकेले यात्रा पूरी करने का मन बना लिया।
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अकेले चल रहे गौरव का कहना है कि रास्ते में थकान तो होती है, लेकिन भोले बाबा पर भरोसा उसे आगे बढ़ने की ताकत देता है। सावन में हरिद्वार से हजारों श्रद्धालु कांवड़ लेकर जाते हैं, लेकिन गौरव की कहानी अलग है। उसके माता-पिता तो मजबूरी में लौट गए, लेकिन इस नन्हे शिवभक्त ने अकेले ही सफर जारी रखने की ठान ली। शिविर में लोग उसे हौसला दे रहे हैं और उसकी आस्था को सलाम कर रहे हैं।