UP: पति के इलाज के लिए रुपये उधार लिए, विधवा होने पर भू-माफिया ने घर पर किया कब्जा; छत वापस मिली तो छलके आंसू
पड़ोसी से डेढ़ लाख रुपये उधार लेने वाली चंचल का घर धोखाधड़ी से कब्जाया गया। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने उसे वापस दिलवाया। सूदखोरी का मुकदमा भी दर्ज होगा।
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यूपी के गाजियाबाद जिले में जरूरत के समय पड़ोसी से डेढ़ लाख रुपये उधार लेना, एक महिला को भारी पड़ गया। आरोपियों ने कथित तौर पर धोखाधड़ी कर पहले ब्याज जोड़कर रकम को सात लाख रुपये से अधिक बताया और फिर उस मकान से परिवार को बेदखल कर दिया, जिसमें वह पिछले 25 वर्षों से रह रही थीं। जिलाधिकारी से शिकायत के बाद जांच में आरोप सही पाए जाने पर शनिवार को जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने बुजुर्ग महिला चंचल को उनके घर का कब्जा वापस दिलवाया। इस दौरान डीपीसी सिटी धवल जायसवाल, एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने बताया कि विजयनगर सेक्टर-11 निवासी चंचल ने 29 मई को इस मामले की शिकायत की थी। शिकायत में ताज मोहम्मद और मोमीन द्वारा उनके घर पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया था। मामले की जांच एसडीएम को सौंपी गई। जांच में कब्जे की पुष्टि हुई।
साथ ही यह भी पता चला कि ताज मोहम्मद भूमि कब्जाने के एक मामले में पहले जेल जा चुका है। इसके बाद कार्रवाई करते हुए बुजुर्ग महिला को उनके घर का कब्जा वापस दिलाया गया। जिलाधिकारी ने बताया कि मामले में सूदखोरी का मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा।
दूसरे व्यक्ति को दे दिया कब्जा
पीड़िता चंचल ने बताया कि अक्तूबर 2025 में पति की बीमारी के दौरान उन्होंने ताज मोहम्मद से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे। रुपये देते समय उसने उनके मकान के दस्तावेज अपने पास रख लिए थे। इस बीच उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद आरोपी ने ब्याज पर ब्याज जोड़कर डेढ़ लाख रुपये के कर्ज को सात लाख रुपये से अधिक बता दिया। बाद में उसने मकान का कब्जा मोमीन नामक व्यक्ति को दे दिया और फरवरी में चंचल तथा उनके परिवार को घर से निकाल दिया।
पीड़िता के अनुसार, जब उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने का प्रयास किया तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया और धमकाने लगे। वहीं, मामला पुलिस तक पहुंचने पर इसे सिविल विवाद बताकर कोर्ट जाने की सलाह दी गई। अंततः परेशान होकर उन्होंने जिलाधिकारी से गुहार लगाई।
घर वापस मिला तो छलक पड़े आंसू
घर का कब्जा वापस मिलने के बाद चंचल भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्होंने घर वापस मिलने की उम्मीद छोड़ दी थी। लोग भी कहते थे कि एक बार घर हाथ से निकल जाए तो वापस नहीं मिलता। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का आभार जताते हुए कहा कि उनकी सुनवाई हुई और जीवनभर की पूंजी उन्हें वापस मिल गई।
चंचल ने बताया कि वह खाने की ठेली लगाकर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। उनके तीन बेटे हैं, जो इस काम में उनकी मदद करते हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि लोगों को गुमराह कर उनकी जमीन या मकान पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी अधिकारियों को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।