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कनावनी में आग: जल गए अरमान, राख में तब्दील हो गए सपने, किसी के बच्चों की फीस राख, खाने तक के पड़ गए लाले

समीर बिसारिया, अमर उजाला, इंदिरापुरम Published by: Akash Dubey Updated Fri, 17 Apr 2026 10:38 AM IST
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सार

कनावनी की झुग्गियों में भीषण आग से निवासियों के घर, पहचान पत्र और भविष्य के सपने जलकर राख हो गए। बेटी की शादी और बच्चों की पढ़ाई के लिए जमा लाखों रुपये भी स्वाहा हो गए।

Fire in Kanawani hopes and future of residents were reduced to ashes
कनावनी गांव स्थित झुग्गियों में लगी आग से बचने के लिए भागते दमकलकर्मी व लोग। फोटो: नितिन कुमार  - फोटो : संवाद
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विस्तार

गाजियाबाद के कनावनी स्थित झुग्गियों में लगी आग की लपटों के साथ वहां के निवासियों के अरमान और भविष्य जलकर राख हो गए। प्रशासन और लोगों की नजरों में यह महज झुग्गियां थी लेकिन यहां रहने वाले लोगों का यह घरौंदा था, जहां सबने भविष्य के सपने संजोए थे। कई साल में पाई-पाई जोड़कर बेटी की शादी के लिए रखे गए रुपये तक जलकर स्वाह हो गए। वहीं, इन लोगों की पहचान किसी की गठरी में तो किसी का डब्बे में रखी थी, जो आग में जल गए। भयंकर आग गरीबी के बीच बच्चों की शिक्षा के लिए जमा पैसे तो बेटियों की शादी के लिए जुटाए अर्थ और सामान सब कुछ लील गया। यहां रहने वाले लोग अब इस चिंता में हैं कि अपने गांव लौटें भी तो कैसे, आग ने उनकी पहचान (आधार कार्ड) तक जला दी है।

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झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाली रेहाना ने बताया कि छोटे भाई-बहन एक निजी स्कूल में पढ़ते हैं, कई महीने से फीस जमा नहीं थी। गांव से वह करीब 50 हजार रुपये लेकर आई थीं कि फीस जमा हो सके और अन्य काम भी हो जाएंगे। आग में सामान के साथ पूरा धन जल कर राख हो गया। पेड़ की छांव में बैठी शांति देवी अपनी जली हुई झुग्गी को निहार रही थीं।

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बिहार निवासी शांति दो वर्ष से अपनी गृहस्थी संजोने में जुटी हुई थी जो मिनटों में जल कर राख हो गई। हादसे के दौरान पति मजदूरी पर गए थे, बच्चों के साथ वह घर पर थी। आग लगते ही जब उन्होंने तपिश महसूस की तो जैसे-तैसे अपने दोनों छोटे बच्चों को लेकर बाहर भागी, पीछे अपनी गृहस्थी को जलता देखती रह गई।

सावित्री ने बताया कि वह झुग्गियों के बीच रहती हूं। बीच हुई बने कबाड़ गोदाम में काम करती हैं। आग देखने के बाद साइकिल लेकर भागी, इसके अलावा वह कुछ भी न बचा सकी। घर में रखे कुछ रुपये, कपड़े, बर्तन सब जलकर राख हो गएया। गुलशबा ने बताया कि उनके पति चांद ने अपनी भांजी के निकाह के लिए करीब 2.50 लाख मेहनत-मजदूरी करके जोड़े थे। कर्ज लेकर शादी के लिए सामान र खरीदकर घर में रखा था। आग ने सब निगल लिया। अब भांजी की शादी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

न पैसे न पहचान, राहतों के रास्ते भी बंद
झुग्गियों में रहने वाले लोग दूसरे राज्यों और शहरों से यहां आकर मेहनत-मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे हैं। घर, सामान रुपये जलने के साथ-साथ उनके आधार कार्ड समेत अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज भी जलकर राख हो गए। यहां तक कि परिवारों के पास इतने भी रुपये नहीं बचे कि कुछ दिनों तक छोटे मासूम बच्चों की भूख का इंतजाम भी कर सकें।

सिलिंडर लेकर भागे लोग
हादसे के समय लोग परिवार के सदस्यों को बचाने के साथ-साथ सामान तक जो भी बचा सकते थे उसमें जुटे रहे। कई लोगों को इतना भी मौका नहीं मिला कि वह घर से एक कपड़े का टुकड़ा भी निकाल पाते। वहीं झुग्गियों में 5 किग्रा और 14 किग्रा तक के घरेलू एलपीजी सिलिंडर भी रखे थे। बड़ा हादसा ने हो इसलिए कई लोगों ने सिलिंडरों को निकालना जरूरी समझा।

बच्चों को सामने देख छलके खुशी के आंसू, घर जलने का नहीं रहा गम
आग हादसे के दौरान जब अफरा-तफरी मची नो सभी अपनी जान बचाने के लिए झुग्गियों से बाहर की ओर भागे। लोग बस्ती से बाहर निकल आए लेकिन अचानक पांच परिवारों के लोगों में चीख पुकार मच गई। चूंकि उनके जिगर के टुकड़े आग में कही फंसे हुए थे।

माता-पिता बच्चों की तलाश में भटक रहे थे और सभी के मन में डर था कि कहीं उनके मासूम बच्चे आग में न फंस जाए। जब यह जानकारी पुलिस और दमकलकर्मियों को सूचना मिली तो उनके भी हाथ-पांव उखड़ गए। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे भीड़ के बीच खड़े मिले। वहीं, लापता हुआ एक किशोर भी घटनास्थल के पास ही बैठा मिला।

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