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Ghaziabad News: कार को बनाया ठगी का कॉल सेंटर, पांच गिरफ्तार
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गाजियाबाद। कार में कॉल सेंटर बनाकर चलते फिरते खुद को विभिन्न बीमा पॉलिसी कंपनी का लोकपाल और अधिकारी बताकर चार राज्यों में लोगों से ठगी करने वाले पांच ठगों को साइबर टीम ने गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य ग्राहकों को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) का प्रबंधक, भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया(आरबीआई), बीमा परिषद का शासकीय निकाय(जीबीआईसी) और एकीकृत शिकायत प्रबंधन प्रणाली (आईजीएमएस) के कूटरचित दस्तावेज भेजकर लोगों को झांसे में लेते थे।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि सूचना के आधार पर आरोपियों को विजयनगर से पकड़ा गया है। ठगों की पहचान बलिया के लालगंज निवासी सुनील मिश्रा(33), गाजीपुर के जंगीपुर के पवन कुमार यादव(42), दनाव बनियापुर जनपद सारन बिहार के राहुल कुमार मिश्रा(40),बोधनगर थाना शम्भूगंज जनपद सुल्तानगंज बिहार के रहने वाले जितेंद्र कुमार(37), हुसैनपुर खेड़ा जनपद बदायूं के दीपक कुमार(36) के रूप में हुई है। सभी हाल में दिल्ली और गौतमबुद्धनगर में अलग-अलग स्थानों पर रह रहे हैं।
डीसीपी ने बताया कि पकड़े गए पांचों ठग पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी कॉल सेंटर में काम करते थे। जहां से उन्होंने पॉलिसी धारकों का डाटा चुराया और फर्जी आईडी पर सिम लेकर लोगों को कॉल करते थे। इन्हें सिम राहुल मिश्रा और कृष्ण चौधरी मुहैया कराते थे। जितेंद्र सिंह कैनवा एप के माध्यम से पैसा जमा करने की फर्जी रसीद ग्राहकों के व्हाट्सएप पर भेजता था। ठगी गई धनराशि को एटीएम कार्ड से निकालकर आपस में बांट लेते थे।
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चक दे इंडिया व्हाट्सएप ग्रुप से खुली पोल
गिरोह ने चक दे इंडिया नाम से ग्रुप बना रखा है। जहां ये एक दूसरे से झांसे में आने वाले लोगों के नाम और ठगी गई धनराशि आपस में शेयर करते थे। इस ग्रुप से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी महाराष्ट्र के विजय शिवा से एक करोड़ रुपये और पश्चिमी बंगाल के अरुण शा से 74 हजार रुपये ठग चुके हैं। सोलापुर महाराष्ट्र निवासी दिलीप पिम्पले नासिक में रहने वाले विजय शिवाजी, गुजरात के धर्मेश चौहान, मध्यप्रदेश के अनमोल सिंह वर्मा से 1.50 करोड़ रुपये की ठगी करना उजागर हुआ है।
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जिले के युवाओं से कमीशन पर लिए खाते
डीसीपी के मुताबिक इस गिरोह ने गाजियाबाद के पांच युवाओं के बैंक खाते किराये पर ले रखे हैं। इनमें ठगी की धनराशि ट्रांसफर कराई गई है। इनके तीन साथी अभी पुलिस पकड़ से बाहर हैं। खाते उपलब्ध कराने वाले और भागे बदमाशों को भी टीम जल्द गिरफ्तार कर लेगी।
लोकेशन ट्रेस न हो इसलिए कार में चलते हुए होती थी कॉल
गिरोह कार में बैठकर लोगों को सूची के मुताबिक कॉल कर बीमा पॉलिसी से धनराशि दिलाने, लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। कार में पूरा सेटअप होने के कारण वह चलते हुए पूरी वारदात करते थे। उनकी लोकेशन ट्रेस न हो इसके लिए वह जगह और शहर बदलते रहते थे। इनसे एक कार, 10 मोबाइल, 16 एटीएम कार्ड, 10 सिम और 74 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
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डीसीपी ने बताया कि पकड़े गए पांचों ठग पहले लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी कॉल सेंटर में काम करते थे। जहां से उन्होंने पॉलिसी धारकों का डाटा चुराया और फर्जी आईडी पर सिम लेकर लोगों को कॉल करते थे। इन्हें सिम राहुल मिश्रा और कृष्ण चौधरी मुहैया कराते थे। जितेंद्र सिंह कैनवा एप के माध्यम से पैसा जमा करने की फर्जी रसीद ग्राहकों के व्हाट्सएप पर भेजता था। ठगी गई धनराशि को एटीएम कार्ड से निकालकर आपस में बांट लेते थे।
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चक दे इंडिया व्हाट्सएप ग्रुप से खुली पोल
गिरोह ने चक दे इंडिया नाम से ग्रुप बना रखा है। जहां ये एक दूसरे से झांसे में आने वाले लोगों के नाम और ठगी गई धनराशि आपस में शेयर करते थे। इस ग्रुप से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी महाराष्ट्र के विजय शिवा से एक करोड़ रुपये और पश्चिमी बंगाल के अरुण शा से 74 हजार रुपये ठग चुके हैं। सोलापुर महाराष्ट्र निवासी दिलीप पिम्पले नासिक में रहने वाले विजय शिवाजी, गुजरात के धर्मेश चौहान, मध्यप्रदेश के अनमोल सिंह वर्मा से 1.50 करोड़ रुपये की ठगी करना उजागर हुआ है।
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जिले के युवाओं से कमीशन पर लिए खाते
डीसीपी के मुताबिक इस गिरोह ने गाजियाबाद के पांच युवाओं के बैंक खाते किराये पर ले रखे हैं। इनमें ठगी की धनराशि ट्रांसफर कराई गई है। इनके तीन साथी अभी पुलिस पकड़ से बाहर हैं। खाते उपलब्ध कराने वाले और भागे बदमाशों को भी टीम जल्द गिरफ्तार कर लेगी।
लोकेशन ट्रेस न हो इसलिए कार में चलते हुए होती थी कॉल
गिरोह कार में बैठकर लोगों को सूची के मुताबिक कॉल कर बीमा पॉलिसी से धनराशि दिलाने, लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। कार में पूरा सेटअप होने के कारण वह चलते हुए पूरी वारदात करते थे। उनकी लोकेशन ट्रेस न हो इसके लिए वह जगह और शहर बदलते रहते थे। इनसे एक कार, 10 मोबाइल, 16 एटीएम कार्ड, 10 सिम और 74 हजार रुपये बरामद किए गए हैं।
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