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लिवर की नकली दवा बनाने वाला गिरोह पकड़ा: लिव-52 के नाम से बना रहे थे टैबलेट, कई जगह सप्लाई की, पांच गिरफ्तार

संवाद न्यूज एजेंसी, गाजियाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 08 Feb 2026 06:02 PM IST
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सार

हिमालय कंपनी की लिव-52 के नाम से नकली दवाएं बनाने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में नकली टैबलेटें जब्त की हैं। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और नकली दवा निर्माण के इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।

Gang manufacturing fake liver medicine busted in Ghaziabad
पकड़े गए गिरोह का खुलासा करते पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मुरादनगर पुलिस ने हिमालय कंपनी की लिव-52 के नाम से नकली टैबलेट बनाने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से 50 हजार टैबलेट, 500 रैपर, 1200 ढक्कन व डिब्बी व वैगनआर कार बरामद की है। आरोपियों की पहचान मयंक निवासी तिबड़ा रोड, बाग कॉलोनी, मोदीनगर, नितिन त्यागी निवासी निवाड़ी, अनूप गर्ग निवासी बिंदापुर उत्तम नगर दिल्ली, तुषार ठाकुर निवासी घूकना, नंदग्राम व आकाश ठाकुर निवासी दीवान फार्म हिंडन विहार नंदग्राम के रूप में हुई है। 

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डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि हिमालय कंपनी के प्रतिनिधियों को फर्जी टैबलेट बाजार में बेचे जाने की अलीगढ़ से सूचना मिली थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने पता किया तो जानकारी मिली कि माल मुरादनगर से कोरियर द्वारा भेजा गया था। कोरियर वाले से पूछताछ के आधार पर पता चला कि फर्म जोनी निवासी जलालाबाद, थाना मुरादनगर के नाम से ट्रेडिंग के लिए पंजीकृत कराई गई थी। फिर पुलिस ने आरोपियों की भूमिका की जांच करते हुए एक के बाद एक गिरफ्तारी की। 

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कई जिलों में सप्लाई कर चुके लाखों का माल
डीसीपी ने बताया कि नितिन त्यागी का मोदीनगर में मेडिकल स्टोर है। इसलिए उसकी जानकारी मोदीनगर में तिबड़ा रोड निवासी मयंक अग्रवाल से रही है। वह एमआर रहा है। उसी का रिश्तेदार अनूप गर्ग है। वह आकाश ठाकुर के साथ इलेक्ट्रीशियन का काम का चुका है। काफी समय से बेरोजगार था। नितिन त्यागी राजनीति में भी सक्रिय रहा है। इसलिए उसने सभी को अपने प्रभाव में ले लिया है। तुषार गाजियाबाद के मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। इसलिए उसकी दवा और उससे जुड़ी तमाम जानकारी है। दवा बनाने में उसकी भूमिका अहम रही है। माल तैयार होने के बाद उनको कोरियर कराने की जिम्मेदारी आकाश की थी। 

कितनी खतरनाक, बताई की जांच रिपोर्ट
डीसीपी ने बताया कि आरोपियों ने लिवर की नकली दवा बनाने का काम इसलिए चुना, क्योंकि इसको खाने से तुरंत न कोई फायदा दिखता है और न ही कोई नुकसान। इसको बनाने की पूरी योजना मयंक और नितिन ने मिलकर बनाई थी। सैंपल फिलहाल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने बाद पता चलेगा कि इसको खाने से शरीर पर इसका कितना सही या गलत प्रभाव पड़ता है। आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि अब तक वह अलीगढ़ के अलावा मथुरा, बिजनौर, आगरा, मेरठ, शामली आदि जिलों में सप्लाई कर चुके हैं। आरोपी बाजार भाव से 20 फीसदी कम में माल मेडिकल स्टोर संचालक को देते थे, ताकि अधिक बचत होने के लालच में वह उसको खरीदे। इस मामले में मेडिकल स्टोर संचालकों व जिस कंपनी में दवाएं बनवाई जा रही थीं, उनकी भूमिका की जांच चल रही है। उनको भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

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