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गाजियाबाद सुसाइड: कोरियन कंटेंट का बढ़ता असर, डार्क वेब के जरिये बिछाया जा रहा जाल, जेन-जी बन रहे टारगेट

माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 06 Feb 2026 12:06 PM IST
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सार

 10 से 16 वर्ष के बच्चों को कोरियन, चाइनीज व जापानी सामग्री के ज़रिए निशाना बनाया जा रहा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ विदेशी समूह अपने व्यावसायिक लाभ के लिए बच्चों को इस जाल में फंसा रहे हैं। 

Ghaziabad Suicide Increasing influence of Korean content trap being laid through dark web
गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शास्त्री नगर निवासी 13 वर्षीय ईशा (बदला हुआ नाम) कोरियन गाने और वेब सीरीज पर काफी समय बिता रही है। वह न सिर्फ यह कंटेंट देख रही है, बल्कि उससे जुड़े कल्चर को भी फॉलो करने लगी है। परिवार के सवाल करने पर कहती है कि यह सब ट्रेंड का हिस्सा है। ऐसा सिर्फ ईशा के साथ नहीं हो रहा, बल्कि बड़ी संख्या में बच्चे इस तरह के कंटेंट से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जेन-जी की खुद बनाई आदत नहीं है, बल्कि कुछ कोरियन व अन्य विदेशी ग्रुप अपने व्यावसायिक फायदे के लिए बच्चों को इसका आदी बना रहे हैं।

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डार्क वेब के जरिये बिछाया जा रहा जाल
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट नितेश सिंह के अनुसार, यह पूरा मामला एक जाल की तरह काम करता है। डार्क वेब के जरिये एक विशेष डिजिटल कंटेंट को तय उम्र के वर्ग तक पहुंचाया जाता है। वह बताते हैं, कुछ रिसर्च में सामने आया है कि 10 से 16 वर्ष के लड़के-लड़कियों के बीच कोरियन, चाइनीज व जापानी सामग्री को योजनाबद्ध तरीके से फैलाया जा रहा है। इसमें कोरियन ग्रुप सबसे आगे हैं। नितेश के मुताबिक, कुछ कंपनियां इन ग्रुप से संपर्क कर अपने उत्पाद कपड़े, विशेष बैग, मेकअप किट आदि का प्रचार करवाती हैं। नाबालिगों को आकर्षित करना बड़ों की तुलना में आसान होता है। मोबाइल की आसान उपलब्धता बच्चों को इस जाल में जल्दी फंसा देती है।

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खेल के नाम पर कमाई
नितेश सिंह के अनुसार, डार्क वेब पर मिलने वाले रेड रूम में इस प्रकार के कई कोरियन ग्रुप सक्रिय हैं। यहां लाइव कंटेंट दिखाया जाता है। इसके लिए ये ग्रुप अकेले, परेशान, तनावग्रस्त बच्चों को अपने साथ जोड़ते हैं। उन्हें प्रलोभन देकर कई प्रकार के कार्य करवाते हैं, जिनको कैमरों की मदद से रेडरूम में दिखाया जाता है। यह सामग्री देखने के लिए बिटक्वाइन में भुगतान करना पड़ता है।

नितेश ने आशंका जताई कि हो सकता है आत्महत्या करने वाली मासूमों से भी किसी ऐसे ही ग्रुप का संपर्क रहा हो, जिसने उनके अकेलेपन का फायदा उठाया हो। सुसाइड नोट में भी बहनों के कुछ कोरियन दोस्तों से मिलने की बात का जिक्र है। इससे संकेत मिलता है कि वे किसी प्रभाव में थीं। उनका यह भी मानना है कि जान देने का कारण सिर्फ व्यक्तिगत पसंद नहीं हो सकता।

राजकुमारी बनाने का देते हैं प्रलोभन
साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा ने बताया कि कोरियन लवर डार्क वेब से निकला एक यूआरएल आधारित गेम है। अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार यहां कुछ ग्रुप बच्चों से बात करते हैं। उन्हें कोरियन कल्चर के बारे में बताकर उससे जीवन बदलने का प्रलोभन दिया जाता है।

कोरिया जाने और वहां की भाषा व संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्हें आभासी दुनिया से जोड़कर कोरियन राजकुमारी या राजकुमार बनाने की बात कही जाती है। इससे बच्चे असल दुनिया से दूर होने लगते हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आत्महत्या करने वाली बहनें भी कोरिया जाना चाहती थीं। साथ ही यू-ट्यूब के जरिये कोरियन भाषा सीखने का प्रयास किया था।

यह होता है डार्क वेब
डार्क वेब सामान्य सर्च इंजन की तरह नहीं होता। इसे विशेष ब्राउजर के जरिये एक्सेस किया जाता है। यहां की गतिविधियां सर्च हिस्ट्री में दर्ज नहीं होतीं। डार्क वेब का उपयोग कानूनी व गैरकानूनी दोनों तरह के कार्यों के लिए होता है, लेकिन बड़ा हिस्सा साइबर अपराध और अवैध कंटेंट के प्रसार में इस्तेमाल होता है।

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