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विश्व गुरु बनने की राह में बढ़ रहा भारत : महेंद्र
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गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मेरठ प्रांत की संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) का 15 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का सांगठनिक शौर्य, योग और ओजस्वी घोष वादन के साथ रविवार को समापन हो गया। इस मौके पर बतौर मुख्य वक्ता पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र के प्रचारक महेंद्र ने कहा कि भारत आज विश्व गुरु बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। भारत को कुछ लोग मिश्रित देश कहते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि भारत विशुद्ध रूप से हिंदू देश है। यहां की संस्कृति पूरे विश्व में फैली हुई है। उन्होंने कहा कि देश के साथ ही उत्तर प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। विज्ञान के क्षेत्र में भी भारत की पहचान विश्व में बनी है। उत्तर प्रदेश की बात करें तो रोबोटिक्स और एआई के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने ऊंची छलांग लगाई है। गाजियाबाद में ग्रीन डेटा सेंटर स्थापित हो गया है। यूपी में ही ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है।
संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में महेंद्र ने कहा कि स्वयंसेवक युवा भारत की रीढ़ हैं। 15 दिनों तक चले प्रशिक्षण में शारीरिक व मानसिक विकास के साथ शिक्षार्थियों ने आत्मसात किया।
विशिष्ठि अतिथि एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी ने कहा कि अनुशासित नागरिक ही देश की संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा की असली रीढ़ हैं। छुआछूत से दूर रहकर हमें अपने परिवार को राष्ट्रप्रेम और अच्छे संस्कार से जोड़ना है। पूरे देश में करीब एक लाख स्थानों पर संघ की शाखाओं में युवाओं को संस्कार राष्ट्रप्रेम सिखाने का काम हो रहा है। विभाग प्रचार प्रमुख गाजियाबाद अखिलेश ने बताया कि दुर्गावती हेमराज सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) आयोजित किया गया है। छह जून से प्रशिक्षण चल रहा था। प्रशिक्षण शिविर में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण लिया।
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उन्होंने कहा कि 15 दिवसीय वर्ग वास्तव में संस्कार की पाठशाला है, जहां शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित रहा। शिविर में स्व (स्वयं) से प्रारंभ होकर अनुशासन, कड़े शारीरिक अभ्यास, प्राणायाम और मानसिक दृढ़ता का पाठ पढ़ाया गया। वर्ग का मूल उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के अंतर्मन में राष्ट्र प्रथम के भाव को स्थायीरूप से जाग्रत करना रहा।
सांस्कृतिक व ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से हुआ वैचारिक पोषण
इस प्रशिक्षण वर्ग की एक मुख्य विशेषता स्वयंसेवकों का बौद्धिक और वैचारिक पोषण रही। 15 दिनों के दौरान शिक्षार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से अवगत कराया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह और महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवनसंघर्षों के माध्यम से स्वयंसेवकों को देश के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया गया।
शारीरिक कौशल और ओजस्वी घोष का अद्भुत सार्वजनिक प्रदर्शन : मैदान में उतरे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कदम-से-कदम मिलाकर पूर्ण समता का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। शिक्षार्थियों ने सामूहिक योग, प्राणायाम, निहत्थे आत्मरक्षा की प्राचीन भारतीय पद्धति नियुद्ध और दंड (लाठी) संचालन के विभिन्न कौशलों और विस्मयकारी व्यूह रचनाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 107 शिक्षार्थियों के प्रांत घोष वर्ग (बैंड) का सामूहिक वादन रहा, जिसकी देशप्रेम की ओजस्वी सुर-लहरियों ने पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचार कर दिया।
इन जिलों के स्वयंसेवकों ने लिया प्रशिक्षण
इस वर्ग में मेरठ पूर्व, मेरठ पश्चिम, हापुड़, सरधना, मवाना, लक्ष्मीनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बेहट, देवबंद, बिजनौर, धामपुर, रामपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, संभल, अमरोहा, बबराला, बुलंदशहर, खुर्जा, अनूपशहर, गौतमबुद्धनगर, नोएडा, गाजियाबाद महानगर, वैशाली, हरनंदी तथा गाजियाबाद जिला सहित कुल 28 सांगठनिक क्षेत्रों के 518 संघ शिक्षा वर्ग शिक्षार्थियों ने सहभागिता की।
संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में महेंद्र ने कहा कि स्वयंसेवक युवा भारत की रीढ़ हैं। 15 दिनों तक चले प्रशिक्षण में शारीरिक व मानसिक विकास के साथ शिक्षार्थियों ने आत्मसात किया।
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विशिष्ठि अतिथि एयर वाइस मार्शल अनिल तिवारी ने कहा कि अनुशासित नागरिक ही देश की संप्रभुता और सीमाओं की सुरक्षा की असली रीढ़ हैं। छुआछूत से दूर रहकर हमें अपने परिवार को राष्ट्रप्रेम और अच्छे संस्कार से जोड़ना है। पूरे देश में करीब एक लाख स्थानों पर संघ की शाखाओं में युवाओं को संस्कार राष्ट्रप्रेम सिखाने का काम हो रहा है। विभाग प्रचार प्रमुख गाजियाबाद अखिलेश ने बताया कि दुर्गावती हेमराज सरस्वती विद्या मन्दिर में आयोजित 15 दिवसीय आवासीय संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य) आयोजित किया गया है। छह जून से प्रशिक्षण चल रहा था। प्रशिक्षण शिविर में मेरठ प्रांत के 28 संगठनात्मक क्षेत्रों से आए 518 शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण लिया।
उन्होंने कहा कि 15 दिवसीय वर्ग वास्तव में संस्कार की पाठशाला है, जहां शिक्षार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान केंद्रित रहा। शिविर में स्व (स्वयं) से प्रारंभ होकर अनुशासन, कड़े शारीरिक अभ्यास, प्राणायाम और मानसिक दृढ़ता का पाठ पढ़ाया गया। वर्ग का मूल उद्देश्य केवल शारीरिक रूप से सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि बौद्धिक सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों के अंतर्मन में राष्ट्र प्रथम के भाव को स्थायीरूप से जाग्रत करना रहा।
सांस्कृतिक व ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से हुआ वैचारिक पोषण
इस प्रशिक्षण वर्ग की एक मुख्य विशेषता स्वयंसेवकों का बौद्धिक और वैचारिक पोषण रही। 15 दिनों के दौरान शिक्षार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक गौरव गाथाओं से अवगत कराया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह और महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवनसंघर्षों के माध्यम से स्वयंसेवकों को देश के गौरवशाली इतिहास का स्मरण कराया गया।
शारीरिक कौशल और ओजस्वी घोष का अद्भुत सार्वजनिक प्रदर्शन : मैदान में उतरे सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कदम-से-कदम मिलाकर पूर्ण समता का प्रदर्शन किया, तो दर्शकों ने करतल ध्वनि से उनका स्वागत किया। शिक्षार्थियों ने सामूहिक योग, प्राणायाम, निहत्थे आत्मरक्षा की प्राचीन भारतीय पद्धति नियुद्ध और दंड (लाठी) संचालन के विभिन्न कौशलों और विस्मयकारी व्यूह रचनाओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 107 शिक्षार्थियों के प्रांत घोष वर्ग (बैंड) का सामूहिक वादन रहा, जिसकी देशप्रेम की ओजस्वी सुर-लहरियों ने पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति की ऊर्जा का संचार कर दिया।
इन जिलों के स्वयंसेवकों ने लिया प्रशिक्षण
इस वर्ग में मेरठ पूर्व, मेरठ पश्चिम, हापुड़, सरधना, मवाना, लक्ष्मीनगर, शामली, बागपत, सहारनपुर, बेहट, देवबंद, बिजनौर, धामपुर, रामपुर, मुरादाबाद, ठाकुरद्वारा, संभल, अमरोहा, बबराला, बुलंदशहर, खुर्जा, अनूपशहर, गौतमबुद्धनगर, नोएडा, गाजियाबाद महानगर, वैशाली, हरनंदी तथा गाजियाबाद जिला सहित कुल 28 सांगठनिक क्षेत्रों के 518 संघ शिक्षा वर्ग शिक्षार्थियों ने सहभागिता की।