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Ghaziabad News: शिशुओं के टीकाकरण पर संकट, रोटावायरस और पोलियो वैक्सीन का स्टॉक खत्म
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आशुतोष यादव
गाजियाबाद। जिले में नवजात और छोटे बच्चों के नियमित टीकाकरण पर संकट खड़ा हो गया है। डायरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली रोटावायरस और पोलियो से बचाने वाली निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन का स्टॉक कई स्वास्थ्य केंद्रों पर समाप्त हो चुका है। पिछले करीब 15 दिनों से स्वास्थ्य केंद्रों पर रोटावायरस वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों को टीका लगवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल, संयुक्त जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर महीने लगभग 20 से 25 हजार बच्चों को रोटावायरस और पोलियो की डोज दी जाती है, लेकिन हाल ही में दोनों वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो जाने से टीकाकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन खत्म होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। कई लोग अपने शिशुओं को लेकर अलग-अलग केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से वापस लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, इस दौरान डायरिया के मामले भी बढ़ रहे हैं। रोटावायरस के अलावा निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन की भी कमी सामने आई है। यह टीका इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है और बच्चों को पोलियो से सुरक्षा प्रदान करता है। यह वैक्सीन बच्चों को 6 सप्ताह, 10 सप्ताह और 14 सप्ताह की उम्र में दी जाती है, जबकि एक बूस्टर डोज 16 से 18 महीने की उम्र में लगाई जाती है। जिले के संयुक्त जिला अस्पताल समेत कई स्वास्थ्य केंद्रों पर यह वैक्सीन भी खत्म हो चुकी है।
डायरिया से बचाती है रोटावायरस वैक्सीन
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि डायरिया (उल्टी-दस्त) से बच्चों को बचाने के लिए रोटावायरस वैक्सीन काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वैक्सीन शिशु के शरीर में जाकर पेट में मौजूद संक्रमणकारी कीटाणुओं से बचाव करती है। शिशुओं को यह वैक्सीन तीन चरणों में पिलाई जाती है। पहला डोज जन्म के लगभग डेढ़ महीने बाद, दूसरा डोज ढाई महीने पर और तीसरा डोज साढ़े तीन महीने की उम्र में दिया जाता है। यह वैक्सीन उन शिशुओं को दी जाती है जिन्होंने पेंटा वैक्सीन की पहली डोज ले ली हो। डोज के रूप में बच्चों को पांच बूंदें पिलाई जाती हैं।
जल्द होगी उपलब्ध
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर रोटावायरस और एफआईपीवी वैक्सीन का स्टॉक समाप्त हुआ है। शासन को दोनों वैक्सीन की 25-25 हजार डोज की मांग भेजी जा चुकी है। सोमवार को इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक पोलियो वैक्सीन जिले में पहुंच सकती है, जबकि रोटावायरस वैक्सीन की आपूर्ति भी जल्द शुरू होने की संभावना है।
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गाजियाबाद। जिले में नवजात और छोटे बच्चों के नियमित टीकाकरण पर संकट खड़ा हो गया है। डायरिया से बचाव के लिए दी जाने वाली रोटावायरस और पोलियो से बचाने वाली निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन का स्टॉक कई स्वास्थ्य केंद्रों पर समाप्त हो चुका है। पिछले करीब 15 दिनों से स्वास्थ्य केंद्रों पर रोटावायरस वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावकों को अपने बच्चों को टीका लगवाने के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल, संयुक्त जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हर महीने लगभग 20 से 25 हजार बच्चों को रोटावायरस और पोलियो की डोज दी जाती है, लेकिन हाल ही में दोनों वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो जाने से टीकाकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
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स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन खत्म होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। कई लोग अपने शिशुओं को लेकर अलग-अलग केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से वापस लौटना पड़ रहा है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है, इस दौरान डायरिया के मामले भी बढ़ रहे हैं। रोटावायरस के अलावा निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन की भी कमी सामने आई है। यह टीका इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है और बच्चों को पोलियो से सुरक्षा प्रदान करता है। यह वैक्सीन बच्चों को 6 सप्ताह, 10 सप्ताह और 14 सप्ताह की उम्र में दी जाती है, जबकि एक बूस्टर डोज 16 से 18 महीने की उम्र में लगाई जाती है। जिले के संयुक्त जिला अस्पताल समेत कई स्वास्थ्य केंद्रों पर यह वैक्सीन भी खत्म हो चुकी है।
डायरिया से बचाती है रोटावायरस वैक्सीन
संजय नगर स्थित संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि डायरिया (उल्टी-दस्त) से बच्चों को बचाने के लिए रोटावायरस वैक्सीन काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वैक्सीन शिशु के शरीर में जाकर पेट में मौजूद संक्रमणकारी कीटाणुओं से बचाव करती है। शिशुओं को यह वैक्सीन तीन चरणों में पिलाई जाती है। पहला डोज जन्म के लगभग डेढ़ महीने बाद, दूसरा डोज ढाई महीने पर और तीसरा डोज साढ़े तीन महीने की उम्र में दिया जाता है। यह वैक्सीन उन शिशुओं को दी जाती है जिन्होंने पेंटा वैक्सीन की पहली डोज ले ली हो। डोज के रूप में बच्चों को पांच बूंदें पिलाई जाती हैं।
जल्द होगी उपलब्ध
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि कुछ स्वास्थ्य केंद्रों पर रोटावायरस और एफआईपीवी वैक्सीन का स्टॉक समाप्त हुआ है। शासन को दोनों वैक्सीन की 25-25 हजार डोज की मांग भेजी जा चुकी है। सोमवार को इसके लिए रिमाइंडर भी भेजा गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मंगलवार तक पोलियो वैक्सीन जिले में पहुंच सकती है, जबकि रोटावायरस वैक्सीन की आपूर्ति भी जल्द शुरू होने की संभावना है।