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Ghaziabad News: 14 साल से सुविधाओं के लिए भटक रहे बीसा कॉलोनी के लोग

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:41 AM IST
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Residents of Bisa Colony have been struggling for basic amenitie
बुलंदशहर। नगर की बीसा कॉलोनी के 15 हजार से अधिक लोग पिछले 14 सालों से मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं। लोगों का कहना है कि वर्ष 2012 के बाद से कॉलोनी में नगर पालिका की ओर से न तो कोई काम कराया है और न ही उनसे किसी प्रकार का कर वसूला गया है। ऐसे में अब लोगों को जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, पेयजल, गंदे पानी की निकासी समेत अन्य कार्यों के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
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करीब 40 साल पहले भूड़ क्षेत्र के पास विकसित हुई बीसा कॉलोनी में वर्तमान में 15 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि वर्ष 2012 तक नगर पालिका की ओर से कर वसूला जाता था और पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के साथ अन्य प्रकार की सुविधाएं भी दी जाती थीं। लोगों का कहना है कि वर्ष 2012 में अचानक से नगर पालिका ने कॉलोनी को बाहर कर दिया। कॉलोनी में रह रहे परिवारों के पास वर्ष 2012 तक नगर पालिका को दिए गए गृहकर और जलकर की रसीद भी हैं, लेकिन इसके बाद भी कॉलोनी को नगर पालिका की सीमा से बाहर बता दिया। इसके बाद से न तो कॉलोनी नगर पालिका में शामिल है और न ही ग्राम पंचायत में। निकाय की सीमा से बाहर होने के बाद कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति लगातार खराब होती गई। कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन मौजूद है, लेकिन आपूर्ति बंद है। गलियां और सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। नालियों की नियमित सफाई नहीं होती और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। लोगों का कहना है कि पहले नगर पालिका की ओर से सफाईकर्मी भेजे जाते थे, लेकिन अब उन्हें खुद ही सड़कों की सफाई करानी पड़ती है।
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कॉलोनी निवासी रामसिंह ने बताया कि कॉलोनी के लोगों को सड़क, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ जरूरी प्रमाण पत्र बनवाने में भी परेशानी होती है। किसी निकाय में शामिल न होने के चलते जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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2007 में लगा कर 2012 में किया बंद
बताया जा रहा है कि बीसा कॉलोनी में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मुजाहिद अंसारी ने गृह और जलकर लगवाया था। वर्ष 2012 में जब शिकायत के आधार पर तत्कालीन एसडीएम ने जांच की तो पाया कि मऊखेड़ा गांव के खेत संख्या 608, 609 और 610 ही नगर पालिका सीमा क्षेत्र में शामिल थे। जबकि अन्य खेतों में बने मकानों पर भी अवैध रूप से कर लगा दिया था। ऐसे में एसडीएम के आदेश के बाद इन तीन खेतों में बने मकानों को छोड़कर शेष सभी मकानों को नगर पालिका सीमा से बाहर करते हुए कर लगाने की प्रक्रिया को भी बंद कर दिया गया था।
बोले लोग --
वर्षों से सड़कें बदहाल हैं। नालियां जाम हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है लेकिन समस्या का समाधान कब होगा, यह पता नहीं चल रहा।
---कपिल
कचरे के निस्तारण का भी कोई प्रबंध नहीं है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। नालियां जाम होने से मच्छर पनप रहे हैं। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना हुआ है।
-नरेंद्र कुमार
बारिश के करीब एक सप्ताह बाद भी सड़कों पर कीचड़ जमा है। कॉलोनी में मलिन बस्तियों से भी ज्यादा गंदगी रहती है। कॉलोनी को दोबारा नगर पालिका में शामिल कर विकास कार्य कराए जाने चाहिए। - मोहम्मद शफी


कोट ------
प्रकरण की जानकारी नहीं है, क्यों कॉलोनी से कर वसूला गया और क्यों फिर बंद कर दिया गया। लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही संबंधित फाइल मंगाकर लोगों के हित के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
--- नितीश कुमार, एडीएम प्रशासन
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