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UP: तीसरे मोबाइल से मिलेंगे जासूसी से जुड़े कई सुराग! पाकिस्तानी नंबर पर भेजे जा रहे थे वीडियो-फोटो और लोकेशन
अमर उजाला, नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 26 Mar 2026 08:38 AM IST
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सार
जासूसी मामले से जुड़े कई सुराग तीसरे मोबाइल से मिल सकते हैं। पाकिस्तानी नंबर पर वीडियो-फोटो और लोकेशन भेजे जा रहे थे। मामला देश की सुरक्षा से जुड़े होने की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस व अन्य सुरक्षाबलों के उच्चाधिकारी इसकी जांच में जुटे थे।
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विस्तार
जासूसी के मामले में देश विरोधी गतिविधियां होने की पुष्टि हो चुकी है। अब मेरठ स्थित कमरे पर तलाशी में मिले तीसरे मोबाइल से बहुत कुछ साक्ष्य मिलने की उम्मीद है। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फॉरेंसिक जांच के लिए लैब भेजा दिया है। इससे जासूसी के अन्य मामले के तार भी जुड़ सकते है। 14 मार्च को कौशांबी पुलिस ने भोवापुर से छह लोगों को गिरफ्तार किया था।
आरोपी देश के सैन्य व सुरक्षाबल ठिकानों, प्रमुख प्रतिष्ठानों, उद्योगपतियों व धार्मिक स्थानों की रेकी कर फोटो-वीडियो और जीपीएस लोकेशन पाकिस्तानी नंबर पर भेज रहे थे। मामला देश की सुरक्षा से जुड़े होने की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस व अन्य सुरक्षाबलों के उच्चाधिकारी इसकी जांच में जुटे थे।
अभी तक की जांच के दौरान पुलिस 22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। यहां तक कि यूएपीए भी आरोपियों पर लगा है। वहीं गिरोह के मुख्यारोपी सुहेल मलिक के पास से एक तीसरा मोबाइल बरामद हुआ है। डीसीपी सिटी, धवल जयसवाल ने बताया कि आरोपियों से बरामद मोबाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा होने की वजह से प्राथमिकता पर डाटा रिकवर कराने व रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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आरोपी देश के सैन्य व सुरक्षाबल ठिकानों, प्रमुख प्रतिष्ठानों, उद्योगपतियों व धार्मिक स्थानों की रेकी कर फोटो-वीडियो और जीपीएस लोकेशन पाकिस्तानी नंबर पर भेज रहे थे। मामला देश की सुरक्षा से जुड़े होने की वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी, आईबी, मिलिट्री इंटेलिजेंस व अन्य सुरक्षाबलों के उच्चाधिकारी इसकी जांच में जुटे थे।
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अभी तक की जांच के दौरान पुलिस 22 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। यहां तक कि यूएपीए भी आरोपियों पर लगा है। वहीं गिरोह के मुख्यारोपी सुहेल मलिक के पास से एक तीसरा मोबाइल बरामद हुआ है। डीसीपी सिटी, धवल जयसवाल ने बताया कि आरोपियों से बरामद मोबाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा होने की वजह से प्राथमिकता पर डाटा रिकवर कराने व रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
शामली में पकड़ा गया समीर निकला पाकिस्तानी जासूस
शामली के बाबरी थाना इलाके के गांव बुटराड़ा निवासी समीर पाकिस्तानी जासूस निकला। गाजियाबाद पुलिस ने उसे देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को भेजने के आरोप में चार दिन पहले शामली से उठाया था।
शामली के बाबरी थाना इलाके के गांव बुटराड़ा निवासी समीर पाकिस्तानी जासूस निकला। गाजियाबाद पुलिस ने उसे देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने और गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को भेजने के आरोप में चार दिन पहले शामली से उठाया था।
बुटराड़ा निवासी समीर को चार दिन पहले शनिवार को गाजियाबाद पुलिस हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई थी। पूछताछ व जांच के बाद मंगलवार को गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि समीर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले गिरोह का सदस्य है। वह इंस्टाग्राम के माध्यम से गिरोह के मुख्य सदस्य नौशाद निवासी बिहार के संपर्क में 2024 में आया था।
इसके कुछ समय बाद नौशाद ने उसे एक व्हाटसएप ग्रुप में जोड़ा, जिसमें मीरा निवासी मथुरा पूर्व में जुड़ी हुई थी। वह मीरा के कहने पर उसके साथ मध्य प्रदेश में पिस्टल की तस्करी में भी शामिल हुआ। वर्ष 2025 में वह पाकिस्तान से देशविरोधी संचालित हो रही गतिविधियों में शामिल हो गया।
समीर पर आरोप है कि उसने विभिन्न सैन्य ठिकानों व महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों , रेलवे स्टेशन आदि की रेकी कराकर उनके फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन विदेशी नंबरों पर भेजता रहा है। एसपी शामली एनपी सिंह ने समीर को गाजियाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने की पुष्टि की है।
खाते में आती थी फंडिंग
पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि समीर और अन्य आरोपियों तक विदेशी फंडिंग पांच अलग-अलग स्तरों से पहुंचती थी। दिल्ली के एक जनसेवा केंद्र के माध्यम से यह रकम उसे मिलती थी। यहां दिनेश नाम के व्यक्ति के खाते में पैसा भेजा जाता था, जिसे जांच एजेंसियां ‘म्यूल अकाउंट’ मान रही हैं। पुलिस जांच में जुटी है।
पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि समीर और अन्य आरोपियों तक विदेशी फंडिंग पांच अलग-अलग स्तरों से पहुंचती थी। दिल्ली के एक जनसेवा केंद्र के माध्यम से यह रकम उसे मिलती थी। यहां दिनेश नाम के व्यक्ति के खाते में पैसा भेजा जाता था, जिसे जांच एजेंसियां ‘म्यूल अकाउंट’ मान रही हैं। पुलिस जांच में जुटी है।