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Ghaziabad News: चाइनीज मांझे का कारोबार, व्यवस्था के दावों पर सवाल
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साहिबाबाद। वसुंधरा सेक्टर 16 की मार्केट में लगी पतंग की दुकान पर बिक रहा चाइनीज मांझा। संवाद
- फोटो : Self
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साहिबाबाद/गाजियाबाद। चाइनीज मांझा जानलेवा है, इस पर प्रतिबंध है और इसके कारण लोगों की जान तक जा चुकी है। इसके बावजूद शहर में इसका कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा। सवाल यह है कि जब प्रशासन को इसकी बिक्री और भंडारण की जानकारी है, हादसों का रिकॉर्ड भी सामने है और पुलिस को कार्रवाई के निर्देश भी हैं तो प्रतिबंधित मांझा बाजार तक पहुंच कैसे रहा है? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई इतनी कमजोर क्यों है कि मामला दर्ज होने के बाद उन्हें थाने से ही जमानत मिल जाती है?
चाइनीज मांझे से हादसे में मौत होने पर हत्या का मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन मांझे की बिक्री और भंडारण करने वालों पर पुलिस बीएनएस की धारा 223बी, 125 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत कार्रवाई करती है। अधिकारियों के मुताबिक ये धाराएं जमानती हैं। यानी जिस मांझे को जानलेवा मानकर प्रतिबंधित किया गया है, उसके कारोबार में पकड़े जाने के बाद आरोपी थाने से ही बाहर आ जाता है।
550 रील पकड़ीं, थाने से ही छोड़ा
हाल में लोनी थाने में दर्ज मामला व्यवस्था की कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इसी 29 जुलाई को इंद्रपुरी में चाइनीज मांझे की करीब 550 रील पकड़ी गई थीं। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन इनको थाने से ही जमानत मिल गई थी। बाद में एक कांस्टेबल का आरोपियों से रुपये के लेनदेन के संबंध में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और उसे निलंबित कर दिया गया था। इस संबंध में डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि चाइनीज मांझे के मामले में धाराओं में सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान होने के कारण आरोपियों को थाने से जमानत देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि पुलिस की मिलीभगत की जांच की जा रही है।
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15 अगस्त पर पतंगबाजी, लेकिन एडवाइजरी नहीं
मकर संक्रांति से बसंत पंचमी के बीच पुलिस-प्रशासन चाइनीज मांझे को लेकर एडवाइजरी जारी करता है। बाजारों में छापेमारी और जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर भी जिले में बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होती है। खासकर डीएमई और एनएच-9 के आसपास कई कॉलोनियां हैं, जहां इस दिन पतंग उड़ाई जाती हैं। इसके बावजूद इस बार पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई और न तो इन इलाकों में हाईवे से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम दिखे।
प्रतिबंधित मांझा मांग पर उपलब्ध
हादसे के बाद साहिबाबाद, मालीवाड़ा और खोड़ा की कुछ दुकानों पर चाइनीज मांझे के बारे में पड़ताल की गई। दुकानदारों ने मांग पर मांझा उपलब्ध होने की बात कही। उनका कहना था कि इसमें जोखिम है, इसलिए इसकी कीमत अधिक है। कुछ दुकानदारों ने 15 अगस्त के बाद स्टॉक खत्म होने की बात कही। सामान्य मांझे की एक रील 100 से 200 रुपये तक मिलती है, जबकि चाइनीज मांझे की कीमत 100 रुपये से शुरू होकर 300 से 400 रुपये तक बताई गई। यानी महंगा होने के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। दुकानदारों के मुताबिक इसकी वजह यह है कि चाइनीज मांझे से पतंग काटना आसान होता है।
तीन साल में 18 केस, हजारों रील जब्त
चाइनीज मांझे को लेकर जिले में तीन वर्षों में 18 केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न मामलों में हजारों रील जब्त होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद इसका बाजार खत्म नहीं हुआ। एनिमल वेलफेयर अधिकारी गौरव गुप्ता के अनुसार चाइनीज मांझा प्लास्टिक व नायलॉन से तैयार होता है और उस पर कांच भी लगाया जाता है। सामान्य धागे के मुकाबले अधिक मजबूत होेने के कारण शरीर का जो हिस्सा इसकी चपेट में आता है, उसे गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
हादसे होते रहे, सबक नहीं
- जुलाई 2026: कनावनी गांव में छात्र की दो उंगलियां चाइनीज मांझे की चपेट में आकर कट गईं।
- अगस्त 2025: मोदीनगर के निवाड़ी क्षेत्र में युवक चाइनीज मांझे से घायल हुआ।
- जनवरी 2025: हापुड़ रोड पर स्कूटी सवार युवक की गर्दन मांझे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुई।
अब टीम बनाने का दावा
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरण नय्यर का कहना है कि हादसे के बाद जिले के सभी थानों में टीम बनाई गई है। ये टीमें चाइनीज मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
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चाइनीज मांझे से हादसे में मौत होने पर हत्या का मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन मांझे की बिक्री और भंडारण करने वालों पर पुलिस बीएनएस की धारा 223बी, 125 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत कार्रवाई करती है। अधिकारियों के मुताबिक ये धाराएं जमानती हैं। यानी जिस मांझे को जानलेवा मानकर प्रतिबंधित किया गया है, उसके कारोबार में पकड़े जाने के बाद आरोपी थाने से ही बाहर आ जाता है।
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550 रील पकड़ीं, थाने से ही छोड़ा
हाल में लोनी थाने में दर्ज मामला व्यवस्था की कार्रवाई पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। इसी 29 जुलाई को इंद्रपुरी में चाइनीज मांझे की करीब 550 रील पकड़ी गई थीं। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन इनको थाने से ही जमानत मिल गई थी। बाद में एक कांस्टेबल का आरोपियों से रुपये के लेनदेन के संबंध में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और उसे निलंबित कर दिया गया था। इस संबंध में डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि चाइनीज मांझे के मामले में धाराओं में सात वर्ष से कम की सजा का प्रावधान होने के कारण आरोपियों को थाने से जमानत देनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि पुलिस की मिलीभगत की जांच की जा रही है।
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15 अगस्त पर पतंगबाजी, लेकिन एडवाइजरी नहीं
मकर संक्रांति से बसंत पंचमी के बीच पुलिस-प्रशासन चाइनीज मांझे को लेकर एडवाइजरी जारी करता है। बाजारों में छापेमारी और जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर भी जिले में बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होती है। खासकर डीएमई और एनएच-9 के आसपास कई कॉलोनियां हैं, जहां इस दिन पतंग उड़ाई जाती हैं। इसके बावजूद इस बार पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई और न तो इन इलाकों में हाईवे से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम दिखे।
प्रतिबंधित मांझा मांग पर उपलब्ध
हादसे के बाद साहिबाबाद, मालीवाड़ा और खोड़ा की कुछ दुकानों पर चाइनीज मांझे के बारे में पड़ताल की गई। दुकानदारों ने मांग पर मांझा उपलब्ध होने की बात कही। उनका कहना था कि इसमें जोखिम है, इसलिए इसकी कीमत अधिक है। कुछ दुकानदारों ने 15 अगस्त के बाद स्टॉक खत्म होने की बात कही। सामान्य मांझे की एक रील 100 से 200 रुपये तक मिलती है, जबकि चाइनीज मांझे की कीमत 100 रुपये से शुरू होकर 300 से 400 रुपये तक बताई गई। यानी महंगा होने के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। दुकानदारों के मुताबिक इसकी वजह यह है कि चाइनीज मांझे से पतंग काटना आसान होता है।
तीन साल में 18 केस, हजारों रील जब्त
चाइनीज मांझे को लेकर जिले में तीन वर्षों में 18 केस दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न मामलों में हजारों रील जब्त होने का दावा किया गया है। इसके बावजूद इसका बाजार खत्म नहीं हुआ। एनिमल वेलफेयर अधिकारी गौरव गुप्ता के अनुसार चाइनीज मांझा प्लास्टिक व नायलॉन से तैयार होता है और उस पर कांच भी लगाया जाता है। सामान्य धागे के मुकाबले अधिक मजबूत होेने के कारण शरीर का जो हिस्सा इसकी चपेट में आता है, उसे गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
हादसे होते रहे, सबक नहीं
- जुलाई 2026: कनावनी गांव में छात्र की दो उंगलियां चाइनीज मांझे की चपेट में आकर कट गईं।
- अगस्त 2025: मोदीनगर के निवाड़ी क्षेत्र में युवक चाइनीज मांझे से घायल हुआ।
- जनवरी 2025: हापुड़ रोड पर स्कूटी सवार युवक की गर्दन मांझे की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हुई।
अब टीम बनाने का दावा
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजकरण नय्यर का कहना है कि हादसे के बाद जिले के सभी थानों में टीम बनाई गई है। ये टीमें चाइनीज मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

साहिबाबाद। वसुंधरा सेक्टर 16 की मार्केट में लगी पतंग की दुकान पर बिक रहा चाइनीज मांझा। संवाद- फोटो : Self