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Delhi NCR News: सरकारी कार्यक्रम में पौधे रोप रहे थे गोलचा, एक फरमान से कटी उनकी जड़ें
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सुबह 9 से 11 बजे...महज दो घंटे में बदल गया दिल्ली पुलिस का चेहरा
गोपनीयता और अभूतपूर्व तेजी से बदले प्रशासनिक घटनाक्रम की दिनभर रही महकमे में चर्चा
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के इतिहास में शुक्रवार की सुबह ऐसा प्रशासनिक घटनाक्रम हुआ, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हैरान कर दिया। सुबह करीब नौ बजे तक दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा एक सरकारी कार्यक्रम में पौधरोपण कर रहे थे। इसी दौरान गृह मंत्रालय का आदेश आया और कुछ ही मिनटों में साफ हो गया कि राजधानी की कानून-व्यवस्था की कमान अब 1994 बैच के आईपीएस अनुराग कुमार संभालेंगे। जिस समय गोलचा पौधे रोप रहे थे, उसी वक्त सरकारी आदेश ने उनके कार्यकाल पर विराम लगा दिया। इसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि करीब दो घंटे के भीतर अनुराग कुमार ने उनसे औपचारिक रूप से पदभार भी ग्रहण कर लिया।
पूरी प्रक्रिया अभूतपूर्व गोपनीयता और तेजी के साथ पूरी हुई। अनुराग कुमार एक दिन पहले यानी 16 जुलाई को लगभग 20 वर्ष बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से अपने मूल यूटी कैडर में लौटे थे। वापसी के महज 24 घंटे के भीतर उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया और उसी दिन कार्यभार भी सौंप दिया गया। दिल्ली पुलिस के इतिहास में इतने कम समय में शीर्ष पद पर बदलाव के उदाहरण बेहद कम देखने को मिले हैं।
पदभार संभालने के तुरंत बाद अनुराग कुमार ने विशेष पुलिस आयुक्तों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाना तथा तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध से सख्ती से निपटना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से समन्वय और जवाबदेही के साथ काम करने पर भी जोर दिया। शनिवार को सभी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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अनुराग को एलजी का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अनुराग कुमार की नियुक्ति के बाद अब उनके किसी केंद्रीय एजेंसी के निदेशक बनने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। उन्हें उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू का भरोसेमंद अधिकारी भी माना जाता है। दोनों ने वाशिंगटन में साथ काम किया था, जिससे उनके बीच बेहतर कार्यसमन्वय की चर्चा लंबे समय से होती रही है। आईबी में करीब दो दशक तक सेवाएं देने वाले अनुराग कुमार की पहचान एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, वीआईपी सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं। यही अनुभव अब दिल्ली पुलिस की कमान संभालने में उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी
सतीश गोलचा को अचानक हटाए जाने को लेकर पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि हाल में भ्रष्टाचार के मामलों में हुई कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों पर उठे सवालों के बाद यह फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी, जिसके बाद उन्हें तलब भी किया गया था। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
24 घंटे में आईबी से दिल्ली पुलिस की कमान तक
16 जुलाई को करीब 20 वर्ष बाद अनुराग कुमार की यूटी कैडर में वापसी हुई। अगले ही दिन उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। महज दो घंटे में उन्होंने सतीश गोलचा से कार्यभार भी संभाल लिया। इससे पहले वे दिल्ली के उत्तरी जिले में डीसीपी रह चुके हैं। बाद में आईबी में लंबे समय तक सेवा देते हुए जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व, वीआईपी सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
वरिष्ठता से ऊपर भरोसे को मिली प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठता क्रम में अनुराग कुमार से पहले 1992 बैच की गरिमा भटनागर और राजेश खुराना तथा 1993 बैच के रॉबिन हिबू का नाम आता है। तीनों वर्तमान में विशेष पुलिस आयुक्त हैं। इसके बावजूद सरकार ने अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस की कमान सौंपी। अब इन वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है।
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गोपनीयता और अभूतपूर्व तेजी से बदले प्रशासनिक घटनाक्रम की दिनभर रही महकमे में चर्चा
पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के इतिहास में शुक्रवार की सुबह ऐसा प्रशासनिक घटनाक्रम हुआ, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हैरान कर दिया। सुबह करीब नौ बजे तक दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा एक सरकारी कार्यक्रम में पौधरोपण कर रहे थे। इसी दौरान गृह मंत्रालय का आदेश आया और कुछ ही मिनटों में साफ हो गया कि राजधानी की कानून-व्यवस्था की कमान अब 1994 बैच के आईपीएस अनुराग कुमार संभालेंगे। जिस समय गोलचा पौधे रोप रहे थे, उसी वक्त सरकारी आदेश ने उनके कार्यकाल पर विराम लगा दिया। इसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि करीब दो घंटे के भीतर अनुराग कुमार ने उनसे औपचारिक रूप से पदभार भी ग्रहण कर लिया।
पूरी प्रक्रिया अभूतपूर्व गोपनीयता और तेजी के साथ पूरी हुई। अनुराग कुमार एक दिन पहले यानी 16 जुलाई को लगभग 20 वर्ष बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से अपने मूल यूटी कैडर में लौटे थे। वापसी के महज 24 घंटे के भीतर उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया और उसी दिन कार्यभार भी सौंप दिया गया। दिल्ली पुलिस के इतिहास में इतने कम समय में शीर्ष पद पर बदलाव के उदाहरण बेहद कम देखने को मिले हैं।
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पदभार संभालने के तुरंत बाद अनुराग कुमार ने विशेष पुलिस आयुक्तों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाना तथा तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध से सख्ती से निपटना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से समन्वय और जवाबदेही के साथ काम करने पर भी जोर दिया। शनिवार को सभी वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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अनुराग को एलजी का भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है
गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अनुराग कुमार की नियुक्ति के बाद अब उनके किसी केंद्रीय एजेंसी के निदेशक बनने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। उन्हें उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू का भरोसेमंद अधिकारी भी माना जाता है। दोनों ने वाशिंगटन में साथ काम किया था, जिससे उनके बीच बेहतर कार्यसमन्वय की चर्चा लंबे समय से होती रही है। आईबी में करीब दो दशक तक सेवाएं देने वाले अनुराग कुमार की पहचान एक ईमानदार और सख्त अधिकारी के रूप में रही है। उन्होंने खुफिया तंत्र, आंतरिक सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर, वीआईपी सुरक्षा, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और उत्तर-पूर्व से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले हैं। यही अनुभव अब दिल्ली पुलिस की कमान संभालने में उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी
सतीश गोलचा को अचानक हटाए जाने को लेकर पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि हाल में भ्रष्टाचार के मामलों में हुई कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों पर उठे सवालों के बाद यह फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, गोलचा के निजी स्टाफ से जुड़ी शिकायत उपराज्यपाल तक पहुंची थी, जिसके बाद उन्हें तलब भी किया गया था। हालांकि, सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
24 घंटे में आईबी से दिल्ली पुलिस की कमान तक
16 जुलाई को करीब 20 वर्ष बाद अनुराग कुमार की यूटी कैडर में वापसी हुई। अगले ही दिन उन्हें दिल्ली पुलिस आयुक्त नियुक्त कर दिया गया। महज दो घंटे में उन्होंने सतीश गोलचा से कार्यभार भी संभाल लिया। इससे पहले वे दिल्ली के उत्तरी जिले में डीसीपी रह चुके हैं। बाद में आईबी में लंबे समय तक सेवा देते हुए जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व, वीआईपी सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।
वरिष्ठता से ऊपर भरोसे को मिली प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार, वरिष्ठता क्रम में अनुराग कुमार से पहले 1992 बैच की गरिमा भटनागर और राजेश खुराना तथा 1993 बैच के रॉबिन हिबू का नाम आता है। तीनों वर्तमान में विशेष पुलिस आयुक्त हैं। इसके बावजूद सरकार ने अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस की कमान सौंपी। अब इन वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है।