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Gurugram News: ब्रेन स्ट्रोक...थ्रोम्बोलिटिक्स उपचार पद्धति लोगों को दे रही जीवनदान
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नागरिक अस्पताल में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निशुल्क इंजेक्शन की सुविधा
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। मेडिकल इमरजेंसी के दौर में समय ही जीवन है की कहावत ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में पूरी तरह सटीक बैठती है। स्ट्रोक के गंभीर खतरों को देखते हुए सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल अब मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। अस्पताल में उपलब्ध थ्रोम्बोलिटिक्स उपचार पद्धति ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की जान बचाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, हर महीने औसतन दो से तीन मरीज इस अत्याधुनिक सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रोक के लक्षण दिखने के शुरुआती तीन से चार घंटे गोल्डन आवर होते हैं। यदि इस अवधि के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो स्थायी विकलांगता और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राहत की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए तीन निशुल्क इंजेक्शन की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उपचार में जितनी तेजी दिखाई जाएगी, मरीज के सामान्य जीवन में लौटने की संभावना उतनी ही प्रबल होगी।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण (एफएएसटी नियम याद रखें) :
चेहरा (एफ): मुस्कुराते समय चेहरा एक तरफ से लटक जाता है या टेढ़ा हो जाता है।
हाथ (ए): एक हाथ या पैर में कमजोरी, सुन्नता या झुनझुनी महसूस होना।
भाषण/बोलना (एस): बोलने में लड़खड़ाहट, अस्पष्ट आवाज, या बात समझने में असमर्थता।
समय (टी): यदि ये लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्ट्रोक-रेडी अस्पताल ले जाएं।
सबसे जरूरी समय पर इलाज
ब्रेन स्ट्रोक के दौरान समय पर इलाज सबसे जरूरी होता है। इस स्थिति में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि देरी से उपचार मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के तीन से चार घंटे के भीतर इंजेक्शन लगने से मरीज को बचाना और स्वस्थ करना संभव हो जाता है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचकर इलाज शुरू कराना बेहद आवश्यक है।
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ब्रेन स्ट्रोक के दौरान बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। तीन से चार घंटे के भीतर इंजेक्शन देने पर थ्रोम्बोलिटिक्स उपचार से मरीज को बचाया जा सकता है। यह सुविधा अस्पताल में उपलब्ध है और इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाता है, जिससे मरीजों को समय पर राहत मिलती है। - डाॅ. काजल, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
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सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। मेडिकल इमरजेंसी के दौर में समय ही जीवन है की कहावत ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में पूरी तरह सटीक बैठती है। स्ट्रोक के गंभीर खतरों को देखते हुए सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल अब मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। अस्पताल में उपलब्ध थ्रोम्बोलिटिक्स उपचार पद्धति ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की जान बचाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, हर महीने औसतन दो से तीन मरीज इस अत्याधुनिक सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, स्ट्रोक के लक्षण दिखने के शुरुआती तीन से चार घंटे गोल्डन आवर होते हैं। यदि इस अवधि के भीतर मरीज को अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो स्थायी विकलांगता और मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। राहत की बात यह है कि अस्पताल प्रशासन आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए तीन निशुल्क इंजेक्शन की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उपचार में जितनी तेजी दिखाई जाएगी, मरीज के सामान्य जीवन में लौटने की संभावना उतनी ही प्रबल होगी।
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ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण (एफएएसटी नियम याद रखें) :
चेहरा (एफ): मुस्कुराते समय चेहरा एक तरफ से लटक जाता है या टेढ़ा हो जाता है।
हाथ (ए): एक हाथ या पैर में कमजोरी, सुन्नता या झुनझुनी महसूस होना।
भाषण/बोलना (एस): बोलने में लड़खड़ाहट, अस्पष्ट आवाज, या बात समझने में असमर्थता।
समय (टी): यदि ये लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्ट्रोक-रेडी अस्पताल ले जाएं।
सबसे जरूरी समय पर इलाज
ब्रेन स्ट्रोक के दौरान समय पर इलाज सबसे जरूरी होता है। इस स्थिति में बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए, क्योंकि देरी से उपचार मुश्किल हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रोक के तीन से चार घंटे के भीतर इंजेक्शन लगने से मरीज को बचाना और स्वस्थ करना संभव हो जाता है। इसलिए लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचकर इलाज शुरू कराना बेहद आवश्यक है।
ब्रेन स्ट्रोक के दौरान बिल्कुल भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए। तीन से चार घंटे के भीतर इंजेक्शन देने पर थ्रोम्बोलिटिक्स उपचार से मरीज को बचाया जा सकता है। यह सुविधा अस्पताल में उपलब्ध है और इलाज पूरी तरह निशुल्क किया जाता है, जिससे मरीजों को समय पर राहत मिलती है। - डाॅ. काजल, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल