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Gurugram News: चिंटेल्स पैराडिसो फ्लैट खरीदार को देगी 4.09 करोड़ रुपये का मुआवजा
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हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने कंपनी को दिया आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडिसो सोसाइटी में फ्लैट का निर्माण ठीक से न होने पर हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) ने कंपनी को आदेश दिया है कि फ्लैट खरीदार को 4.09 करोड़ रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश हरेरा गुरुग्राम के निर्णायक अधिकारी राजेंद्र कुमार ने दिया है।
दिल्ली निवासी अरुणा गर्ग ने प्राधिकरण में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने चिंटेल्स पैराडिसो प्रोजेक्ट के टावर-सी में एक फ्लैट खरीदा था। उनका करार कंपनी के साथ 1.64 करोड़ रुपये में हुआ था लेकिन कंपनी ने उनसे 1.80 करोड़ रुपये लिए। अक्तूबर 2019 में उन्हें फ्लैट का पजेशन मिला था। कुछ दिनों बाद ही फ्लैट में लगी टाइल्स टूटने लगी और बालकनी और कॉमन एरिया में दरारें जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। शिकायतों के बावजूद चिंटेल्स इंडिया ने इन्हें ठीक नहीं किया।
10 फरवरी 2022 को टावर-डी का एक हिस्सा गिर गया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन और आईआईटी दिल्ली की जांच में सामने आया कि निर्माण में इस्तेमाल किए गए कंक्रीट में क्लोराइड होने के कारण स्टील में जंग लग गई थी। विशेषज्ञों ने कहा कि इमारत की हालत इतनी खराब है कि उसकी मरम्मत तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव नहीं है। हरेरा ने अपने आदेश में कहा कि पूरा प्रोजेक्ट अब रहने योग्य नहीं रहा और इसकी पूरी जिम्मेदारी चिंटेल्स इंडिया की है। प्राधिकरण ने सेक्टर-109 में बढ़ी प्रापर्टी कीमतों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा 13,000 प्रति वर्ग फुट के हिसाब से तय किया और कुल 4.095 करोड़ देने का आदेश दिया। मुआवजे के साथ ही कंपनी को 4.60 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी भी वापस देनी होगी। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 50 हजार रुपये देने होंगे।
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गुरुग्राम। सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडिसो सोसाइटी में फ्लैट का निर्माण ठीक से न होने पर हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) ने कंपनी को आदेश दिया है कि फ्लैट खरीदार को 4.09 करोड़ रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश हरेरा गुरुग्राम के निर्णायक अधिकारी राजेंद्र कुमार ने दिया है।
दिल्ली निवासी अरुणा गर्ग ने प्राधिकरण में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने चिंटेल्स पैराडिसो प्रोजेक्ट के टावर-सी में एक फ्लैट खरीदा था। उनका करार कंपनी के साथ 1.64 करोड़ रुपये में हुआ था लेकिन कंपनी ने उनसे 1.80 करोड़ रुपये लिए। अक्तूबर 2019 में उन्हें फ्लैट का पजेशन मिला था। कुछ दिनों बाद ही फ्लैट में लगी टाइल्स टूटने लगी और बालकनी और कॉमन एरिया में दरारें जैसी समस्याएं सामने आने लगीं। शिकायतों के बावजूद चिंटेल्स इंडिया ने इन्हें ठीक नहीं किया।
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10 फरवरी 2022 को टावर-डी का एक हिस्सा गिर गया जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। इसके बाद जिला प्रशासन और आईआईटी दिल्ली की जांच में सामने आया कि निर्माण में इस्तेमाल किए गए कंक्रीट में क्लोराइड होने के कारण स्टील में जंग लग गई थी। विशेषज्ञों ने कहा कि इमारत की हालत इतनी खराब है कि उसकी मरम्मत तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव नहीं है। हरेरा ने अपने आदेश में कहा कि पूरा प्रोजेक्ट अब रहने योग्य नहीं रहा और इसकी पूरी जिम्मेदारी चिंटेल्स इंडिया की है। प्राधिकरण ने सेक्टर-109 में बढ़ी प्रापर्टी कीमतों को ध्यान में रखते हुए मुआवजा 13,000 प्रति वर्ग फुट के हिसाब से तय किया और कुल 4.095 करोड़ देने का आदेश दिया। मुआवजे के साथ ही कंपनी को 4.60 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी भी वापस देनी होगी। इस दौरान शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी पर दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 50 हजार रुपये देने होंगे।