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Gurugram News: मधुमेह की जानकारी छिपाने पर रोका दावा, पत्नी को मिलेंगे 33.40 लाख रुपये
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2022 में हुई थी युवक की मौत, पत्नी को मिलेगा मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मधुमेह की बीमारी की जानकारी पहले न देने पर बीमा कंपनी द्वारा रोका गया 33.40 लाख रुपये का दावा ब्याज सहित देना होगा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने यह आदेश दिया है। मृतक ने घर बनाने के लिए ऋण के साथ स्वास्थ्य बीमा कराया था।
सेक्टर-7 एक्सटेंशन निवासी नैना यादव ने एक याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके पति चिराग यादव ने 2018 में सेक्टर-46 में एक प्लॉट लिया था। प्लॉट बनाने के लिए एचडीएफसी एर्गो से ऋण लिया गया था। ऋण लेते समय बीमारी से मृत्यु या हादसे में दिव्यांग होने पर दावा मिलने का प्रावधान था। 30 अगस्त 2022 को चिराग यादव को सीने में तेज दर्द हुआ था। 1 सितंबर 2022 को निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। नैना यादव ने बीमा कंपनी में दावा राशि के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने यह आवेदन खारिज कर दिया था। कंपनी का कहना था कि चिराग यादव को बीते पांच साल से मधुमेह था, जिसकी जानकारी उन्होंने ऋण लेते समय नहीं दी थी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के निर्देशों के अनुसार, बीमा जारी करने से पहले बीमाकर्ता को पूरी चिकित्सा जांच करानी चाहिए। पॉलिसी जारी होने के बाद, पहले से मौजूद बीमारी के आधार पर दावा खारिज नहीं हो सकता। आयोग ने यह भी पाया कि चिराग यादव की मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई थी। इस मृत्यु का मधुमेह से कोई संबंध नहीं था। आयोग ने एचडीएफसी एर्गो को 29 सितंबर 2022 से नौ फीसदी ब्याज के साथ 33.40 लाख रुपये देने का आदेश दिया। नैना यादव को हुई मानसिक परेशानी के लिए दो लाख रुपये का मुआवजा भी मिलेगा। कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 55 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मधुमेह की बीमारी की जानकारी पहले न देने पर बीमा कंपनी द्वारा रोका गया 33.40 लाख रुपये का दावा ब्याज सहित देना होगा। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने यह आदेश दिया है। मृतक ने घर बनाने के लिए ऋण के साथ स्वास्थ्य बीमा कराया था।
सेक्टर-7 एक्सटेंशन निवासी नैना यादव ने एक याचिका दायर की थी। उन्होंने बताया कि उनके पति चिराग यादव ने 2018 में सेक्टर-46 में एक प्लॉट लिया था। प्लॉट बनाने के लिए एचडीएफसी एर्गो से ऋण लिया गया था। ऋण लेते समय बीमारी से मृत्यु या हादसे में दिव्यांग होने पर दावा मिलने का प्रावधान था। 30 अगस्त 2022 को चिराग यादव को सीने में तेज दर्द हुआ था। 1 सितंबर 2022 को निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। नैना यादव ने बीमा कंपनी में दावा राशि के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने यह आवेदन खारिज कर दिया था। कंपनी का कहना था कि चिराग यादव को बीते पांच साल से मधुमेह था, जिसकी जानकारी उन्होंने ऋण लेते समय नहीं दी थी।
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आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) के निर्देशों के अनुसार, बीमा जारी करने से पहले बीमाकर्ता को पूरी चिकित्सा जांच करानी चाहिए। पॉलिसी जारी होने के बाद, पहले से मौजूद बीमारी के आधार पर दावा खारिज नहीं हो सकता। आयोग ने यह भी पाया कि चिराग यादव की मृत्यु हृदय गति रुकने से हुई थी। इस मृत्यु का मधुमेह से कोई संबंध नहीं था। आयोग ने एचडीएफसी एर्गो को 29 सितंबर 2022 से नौ फीसदी ब्याज के साथ 33.40 लाख रुपये देने का आदेश दिया। नैना यादव को हुई मानसिक परेशानी के लिए दो लाख रुपये का मुआवजा भी मिलेगा। कानूनी प्रक्रिया पर हुए खर्च के लिए 55 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया गया है।
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